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यूपी: कासगंज से जुड़े हैं लकड़ी माफिया के तार, प्रतिबंधित टीटीजेड में काटे जा रहे थे पेड़

Mon, 20 May 2024 01:33 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 20 May 2024 01:33 PM IST
सार

वन विभाग की टीम पर हमलावर होने वाले लकड़ी माफिया के तार पड़ोसी जनपद कासगंज से जुड़े हुए हैं, जो यहां प्रतिबंधित टीटीजेड (ताज ट्रिपेजियम जोन) में कई दिन से पेड़ कटवा रहा था। 
 

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Wood mafia has links with Kasganj trees were being cut in restricted TTZ
लकड़ी - फोटो : संवाद

विस्तार

एटा के जलेसर में वन विभाग की टीम पर हमलावर होने वाले लकड़ी माफिया के तार पड़ोसी जनपद कासगंज से जुड़े हुए हैं, जो यहां प्रतिबंधित टीटीजेड (ताज ट्रिपेजियम जोन) में कई दिन से पेड़ कटवा रहा था। जिनसे प्राप्त लकड़ी को कासगंज भेज दिया जाता था। उधर, माफिया का प्रभाव ऐसा है कि 70 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एक भी आरोपी को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
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जलेसर क्षेत्र ताज ट्रिपेजियम जोन में आता है। जहां हरे पेड़ों का कटान किया जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। लेकिन क्षेत्रीय किसानों और लकड़ी माफियाओं की सांठगांठ से यह काम क्षेत्र में लंबे समय से चल रहा था। कई दिनों से लगातार लकड़ी काटकर कासगंज भेजी जा रही थी। स्थानीय लोगों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई, लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया। बहुत ज्यादा हल्ला हुआ तो 15 मई को कासगंज के मुबारकपुर निवासी ऊदल सिंह के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। आरोप था कि गांव महापुर में वह यूकेलिप्टस पेड़ों को कटवा रहा था। लेकिन हैरत की बात तो यह है कि एक अधिकारी द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बाद भी पुलिस नहीं चेती और आरोपी व्यक्ति उसकी जगह अन्य पेड़ों को भी काटकर लगातार लकड़ी भरकर ट्रैक्टर-ट्रॉली कासगंज भेजते रहे।
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स्थानीय लोगों की शिकायत पर वन विभाग की टीम ने फिर हिम्मत दिखाई और 17 मई की शाम को वहां पहुंच गई। मौके पर कटान और लकडि़यों की ढुलाई होती मिली। लेकिन लकड़ी माफिया डरने या पीछे हटने के बजाए वन विभाग की टीम पर ही हावी हो गए। करीब 70 लोगों ने टीम को घेरकर अभद्रता की। क्षेत्रीय वनाधिकारी की गाड़ी के टायर फाड़ दिए। इसके बाद तीन थानों का पुलिस फोर्स भेजकर टीम को वहां से सुरक्षित निकलवाया गया। वन कर्मियों ने आरोपियों के नाम आदि पता कर 30 नामजद और 40 अज्ञात पर रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें प्रमुख ऊदल सिंह सहित कासगंज के आठ लोग नामजद हैं। लेकिन दो दिन बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
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कहां से मिल रहा संरक्षण
टीटीजेड से लकड़ी का अवैध कटान, एक रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी लगातार कटान करते रहना और वन विभाग की टीम के पहुंचने पर उसका ही घेराव करा देना। यह आम किसानों या साधारण लोगों के वश की बात नहीं है। यह बात पूरी तरह स्पष्ट है कि लकड़ी माफिया और उसके साथियों को कहीं से संरक्षण जरूर मिल रहा है। जिसके चलते गंभीर धाराओं में दूसरी रिपोर्ट दर्ज होने पर भी न तो लकड़ी माफिया और न ही अन्य आरोपियों में किसी को गिरफ्तार किया गया है।



सवालों के घेरे में सकरौली थाना पुलिस
सीओ जलेसर कृष्ण मुरारी दोहरे ने बताया कि लकड़ी कटान पर पहले वन विभाग पर ही उंगली उठती रही थीं। लेकिन इस पूरे प्रकरण के बाद सकरौली थाना पुलिस भी सवालों के घेरे में है। दरअसल, वन विभाग की ओर से तो कार्रवाई की भी गई। लेकिन थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी लकड़ी माफियाओं को कटान से रोकने और गिरफ्तार करने की जहमत नहीं की। एक मुकदमा दो दिन पहले लिखा गया है और एक इससे पहले भी लिखा गया है। आरोपी हाथ नहीं आ रहे हैं। गांव में दबिश दी जा रही है, सभी भागे हुए हैं। 
 
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