Women's day: एसिड अटैक फाइटर रूपा नारी शक्ति पुरस्कार के लिए चयनित
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एसिड अटैक पीड़िताओं के पुनर्वास के लिए आगरा में चल रहे शीरोज हैंगआउट कैफे से जुड़ी रूपा को भारत सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मान के लिए चुना गया है। रूपा ने यह उपलब्धि हासिल कर समाज में महिला सशक्तीकरण के लिए सच्ची मिसाल पेश की है।
मुजफ्फरनगर निवासी रूपा पर 2008 में उनकी सौतले मां ने जमीन हड़पने के लिए तेजाब से हमला कर चेहरा जला दिया था। उस वक्त वह मात्र 14 साल की थी। आठवीं तक पढ़ाई करने वाली रूपा बताती हैं कि उन्हें बचपन से फैशन डिजायनिंग का शौक था। हमले के बाद 2013 में उन्होंने फरीदाबाद के एक इंस्टीट्यूट से फैशन डिजायनिंग का कोर्स किया। इसके बाद वह 2014 में बने छांव फाउंडेशन के शीरोज हैंगआउट कैफे से जुड़ गईं।
उन्होंने 2014 में आई बॉलीवुड फिल्म हैदर के प्रमोशन के लिए कॉस्ट्यूम डिजाइन कर चुकी हैं। साथ ही वे फिल्म अकीरा में अभिनय भी कर चुकी हैं। रूपा ने बताया कि वह इस पुरस्कार के लिए चयनित होने पर काफी खुश हैं। किसी भी महिला को समाज में हमेशा सिर उठाकर जीना चाहिए।
तेजाब ने सिर्फ चेहरा जलाया, हौसले नहीं
शीरोज हैंगआउट कैफे से ही अन्य एसिड अटैक फाइटर्स ने बताया कि तेजाब हमले से सिर्फ उनका चेहरा जला है, हौसले आज भी बुलंद हैं। महिलाओं को किसी भी परिस्थिति में हार नहीं माननी चाहिए। बिजनौर की बाला प्रजापति और उनके दादा पर 2012 में गांव के जमींदार ने तेजाब से हमला किया था, जिसमें वह दोनों झुलस गए।
बाला ने बताया कि जमींदार उनकी मां पर बुरी नीयत रखता था। इसका विरोध करने पर उसने तेजाब फेंक दिया, लेकिन उन्होंने इन परिस्थितियों में हार नहीं मानी और अब सामान्य जीवनयापन कर रही हैं। वहीं, शाहगंज आगरा की नीतू और गीता पर उनके पिता ने 1992 में रात को सोते समय तेजाब फेंक दिया था, इसमें पास में सो रही एक बहन की मृत्यु हो गई।
नीतू बताती हैं कि पिता को बेटे की चाहत थी। इस कारण उन्होंने हमारे ऊपर तेजाब फेंक दिया। पहले तो वह घर से बाहर निकलने में डरती थीं, लेकिन अब उन्होंने आगे आकर सामाजिक बुराइयों से लड़ने की ठानी है।