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‘महिलाएं सशक्त बनें व समाज के प्रति अपने दायित्व को निभाएं’ कम्युनिटी रेडियो पर हुई परिचर्चा
Mon, 19 Oct 2020 11:40 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 19 Oct 2020 11:40 AM IST
सार
सामुदायिक रेडियो के निदेशक प्रो. लवकुश मिश्रा ने संचालन किया। उन्होंने बताया कि समाज के प्रति अपने दात्यिवों का निर्वहन करने के उद्देश्य से अमर उजाला और सामुदायिक रेडियो की ओर से प्रत्येक रविवार को सामाजिक सरोकार के तहत समाज हित के विभिन्न मुद्दों को उठाया जाएगा। इसमें विशेषज्ञ समाज में व्याप्त समस्याओं और उसके समाधान पर अपनी राय रखें।
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अमर उजाला और विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो- 90.4- आगरा की आवाज की ओर से सामाजिक सरोकार के तहत परिचर्चा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमर उजाला और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो- 90.4- आगरा की आवाज की ओर से सामाजिक सरोकार के तहत रविवार को परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न क्षेत्रों की महिला शक्तियों ने ‘महिला सशक्तीकरण व समाज’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को सशक्त बनने के साथ समाज के प्रति अपने दायित्वों का भी निर्वहन करना चाहिए।
कार्यक्रम का रेडियो पर प्रसारण दोपहर 03:00 से 03:30 बजे किया गया। पुन: प्रसारण सोमवार को सुबह 11:30 से दोपहर 12:00 बजे तक किया जाएगा। सामुदायिक रेडियो के निदेशक प्रो. लवकुश मिश्रा ने संचालन किया। उन्होंने बताया कि समाज के प्रति अपने दात्यिवों का निर्वहन करने के उद्देश्य से अमर उजाला और सामुदायिक रेडियो की ओर से प्रत्येक रविवार को सामाजिक सरोकार के तहत समाज हित के विभिन्न मुद्दों को उठाया जाएगा। इसमें विशेषज्ञ समाज में व्याप्त समस्याओं और उसके समाधान पर अपनी राय रखें।
बेटियों में हीन भावना नहीं डालनी चाहिए
महिला सशक्तीकरण की शुरूआत घर से होनी चाहिए। बेटियों में हीन भावना नहीं डालनी चाहिए। वह पराया धन हैं, दूसरे घर जाना है जैसी बातें नहीं करनी चाहिए। आप उम्मीद करते हैं कि आपका समाज ध्यान रखें तो आपको भी समाज की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए। - डॉ. जूही सिंघल, एसएन में आपातकालीन सेवाओं की प्रभारी
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कार्यक्रम का रेडियो पर प्रसारण दोपहर 03:00 से 03:30 बजे किया गया। पुन: प्रसारण सोमवार को सुबह 11:30 से दोपहर 12:00 बजे तक किया जाएगा। सामुदायिक रेडियो के निदेशक प्रो. लवकुश मिश्रा ने संचालन किया। उन्होंने बताया कि समाज के प्रति अपने दात्यिवों का निर्वहन करने के उद्देश्य से अमर उजाला और सामुदायिक रेडियो की ओर से प्रत्येक रविवार को सामाजिक सरोकार के तहत समाज हित के विभिन्न मुद्दों को उठाया जाएगा। इसमें विशेषज्ञ समाज में व्याप्त समस्याओं और उसके समाधान पर अपनी राय रखें।
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बेटियों में हीन भावना नहीं डालनी चाहिए
महिला सशक्तीकरण की शुरूआत घर से होनी चाहिए। बेटियों में हीन भावना नहीं डालनी चाहिए। वह पराया धन हैं, दूसरे घर जाना है जैसी बातें नहीं करनी चाहिए। आप उम्मीद करते हैं कि आपका समाज ध्यान रखें तो आपको भी समाज की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए। - डॉ. जूही सिंघल, एसएन में आपातकालीन सेवाओं की प्रभारी
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स्कूल से ही आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाए
महिला सशक्तीकरण की शुरूआत घर से होनी चाहिए। संस्थान में पढ़ने वाली जो छात्राएं हॉस्टल में रहती हैं उनमें बाहर निकलने पर असुरक्षा का भाव भी आता है। इन्हें सशक्त बनाने के साथ शारीरिक रूप से भी मजबूत बनाना चाहिए। इसके लिए स्कूल स्तर से ही आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। - प्रो. सुनंदा खन्ना, निदेशक, गृह विज्ञान संस्थान
सभी को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझनी होगी
बालिकाओं और महिलाओं के प्रति अपराध महज सख्त कानून बनाने से नहीं रुकेंगे। समाज के प्रत्येक नागरिक को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझनी होगी। व्यक्ति जागरूक होगा और अपनी जिम्मेदारियों को समझेगा तभी कानून का भी पालन हो पाएगा। घर में बेटी और बेटे को संस्कार देना होगा। - ममता सिंह, सहायक कुलसचिव, विवि
बेटियों के साथ बेटों को भी संस्कार दें
बेटियों के साथ बेटों को भी संस्कार देना चाहिए। एक ही परिवार में पुरुष और महिला दोनों रहते हैं। वह समाज में सम्मान चाहते हैं। घर के बेटों को प्रेरित करना चाहिए कि वह अपने घर की बेटी और महिला के प्रति जैसा व्यवहार चाहते हों, वैसा व्यवहार दूसरी की बेटियों के साथ करें। - प्रतिभा जिंदल, सामाजिक कार्यकर्ता
महिला सशक्तीकरण की शुरूआत घर से होनी चाहिए। संस्थान में पढ़ने वाली जो छात्राएं हॉस्टल में रहती हैं उनमें बाहर निकलने पर असुरक्षा का भाव भी आता है। इन्हें सशक्त बनाने के साथ शारीरिक रूप से भी मजबूत बनाना चाहिए। इसके लिए स्कूल स्तर से ही आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। - प्रो. सुनंदा खन्ना, निदेशक, गृह विज्ञान संस्थान
सभी को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझनी होगी
बालिकाओं और महिलाओं के प्रति अपराध महज सख्त कानून बनाने से नहीं रुकेंगे। समाज के प्रत्येक नागरिक को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझनी होगी। व्यक्ति जागरूक होगा और अपनी जिम्मेदारियों को समझेगा तभी कानून का भी पालन हो पाएगा। घर में बेटी और बेटे को संस्कार देना होगा। - ममता सिंह, सहायक कुलसचिव, विवि
बेटियों के साथ बेटों को भी संस्कार दें
बेटियों के साथ बेटों को भी संस्कार देना चाहिए। एक ही परिवार में पुरुष और महिला दोनों रहते हैं। वह समाज में सम्मान चाहते हैं। घर के बेटों को प्रेरित करना चाहिए कि वह अपने घर की बेटी और महिला के प्रति जैसा व्यवहार चाहते हों, वैसा व्यवहार दूसरी की बेटियों के साथ करें। - प्रतिभा जिंदल, सामाजिक कार्यकर्ता