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नहीं हुई बारिश, जारी रहा गर्मी का सितम
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15एमएनपी-08-गर्मी में मुंह ढ़ककर चलती युवतियां
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। सोमवार का दिन गुजरने के साथ ही एक बार फिर बारिश की उम्मीदों पर पानी फिर गया। दिन भर लोग गर्मी से जूझते रहे। तेज धूप के चलते कहीं भी राहत नहीं मिल सकी। मौसम विभाग ने रविवार और सोमवार को बारिश का पूर्वानुमान जारी किया था। लेकिन दोनों ही दिन बारिश न होने से लोगों को केवल मायूसी ही हाथ लगी।
एक पखवाड़े से भी अधिक समय से गर्मी लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। हाल ये है कि तापमान में गिरावट नहीं आ रही है। दिन हो या रात लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम विशेषज्ञों ने 14 और 15 जून को बारिश का पूर्वानुमान जारी किया था। इसके बाद लोगों को उम्मीद बंध गई थी कि बारिश से उन्हें राहत मिलेगी। लेकिन रविवार के बाद सोमवार का दिन भी बीतने के बाद बारिश की उम्मीद टूट गई। सोमवार को अधिकतम तापमान जहां 40 डिग्री सेल्सियस रहा तो वहीं न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहा। दिन भर लोग गर्मी से जूझते रहे, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल सकी। शाम को भी गर्मी का असर भरपूर रहा। उमस और गर्म हवाओं के चलते लोग घरों में छिपने के लिए मजबूर रहे।
धान की नर्सरी के लिए भी संकट
बारिश न होने से किसानों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। हाल ये है कि जिन किसानों ने नर्सरी की बुवाई कर दी है, उन्हें हर तीसरे दिन निजी संसाधनों से नर्सरी की सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे उन पर अधिक बोझ पड़ रहा है। केवल खर्च की ही बात नहीं है, मौसम अधिक गर्म होने के चलते नर्सरी की प्रगति भी प्रभावित हो रही है।
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एक पखवाड़े से भी अधिक समय से गर्मी लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। हाल ये है कि तापमान में गिरावट नहीं आ रही है। दिन हो या रात लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम विशेषज्ञों ने 14 और 15 जून को बारिश का पूर्वानुमान जारी किया था। इसके बाद लोगों को उम्मीद बंध गई थी कि बारिश से उन्हें राहत मिलेगी। लेकिन रविवार के बाद सोमवार का दिन भी बीतने के बाद बारिश की उम्मीद टूट गई। सोमवार को अधिकतम तापमान जहां 40 डिग्री सेल्सियस रहा तो वहीं न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहा। दिन भर लोग गर्मी से जूझते रहे, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल सकी। शाम को भी गर्मी का असर भरपूर रहा। उमस और गर्म हवाओं के चलते लोग घरों में छिपने के लिए मजबूर रहे।
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धान की नर्सरी के लिए भी संकट
बारिश न होने से किसानों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। हाल ये है कि जिन किसानों ने नर्सरी की बुवाई कर दी है, उन्हें हर तीसरे दिन निजी संसाधनों से नर्सरी की सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे उन पर अधिक बोझ पड़ रहा है। केवल खर्च की ही बात नहीं है, मौसम अधिक गर्म होने के चलते नर्सरी की प्रगति भी प्रभावित हो रही है।
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