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फिरोजाबाद में बेकाबू डेंगू: 172 बच्चों में पुष्टि, वार्ड में इलाज के लिए मारामारी, अस्पताल में 440 मरीज भर्ती
Thu, 09 Sep 2021 11:23 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 09 Sep 2021 11:23 AM IST
सार
सौ शैय्या अस्पताल और नवनिर्मित बिल्डिंग में बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। इसके साथ ही सरकारी ट्रामा सेंटर में 18 साल से अधिक उम्र के मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। जो बाद में वार्ड नंबर चार और पांच में पहुंचाए जा रहे हैं। बच्चों के साथ वयस्कों में भी डेंगू का असर जोर करने लगा है।
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फिरोजाबाद: अस्पताल में भर्ती बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
फिरोजाबाद में जिला प्रशासन और नगर निगम की ओर से बुखार प्रभावित इलाकों में चलाए गए विशेष अभियान के बाद भी डेंगू का डंक कमजोर नहीं हुआ है। मंगलवार को सौ शैय्या अस्पताल में लिए सैंपलों की कराई गई एलाइजा जांच में 172 बाल रोगियों में डेंगू की पुष्टि हुई है। वायरल फीवर के मरीज भी लगातार बढ़ रहे हैं। इधर, मेडिकल कॉलेज में 440 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। पहले से बुखार प्रभावित इलाकों के साथ नए क्षेत्रों से अब मरीज आने लगे हैं। बुधवार को भी मेडिकल कॉलेज में सुबह से ही मरीजों की भीड़ रही। वार्डों में इलाज के लिए आपाधापी का माहौल रहा।
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सौ शैय्या अस्पताल के अलावा नई बिल्डिंग में एक पलंग पर दो मरीजों को भर्ती किया है। स्थिति अभी भी बेकाबू हो रही है। एलान नगर, ककरऊ कोठी, कौशल्या नगर, झलकारी नगर सहित अन्य इलाकों से मरीज पहुंचे। हाजीपुरा और रामगढ़ क्षेत्र सहित अन्य इलाकों में भी डेंगू दस्तक दे चुका है। कई बच्चों की गंभीर हालत थी। उन्हें गोदी में उठाकर परिजन अस्पताल पहुंचे। दोपहर तक करीब 90 नए बच्चों को भर्ती किया जा चुका था। साथ ही 110 मरीजों के रक्त सैंपल लिए गए। सामान्य अवस्था में पहुंचने वाले मरीजों को दवा देकर छुट्टी कर दी गई। सीएमओ डॉ. दिनेश प्रेमी ने अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्थओं को देखा। उन्होंने दवा काउंटर से लेकर पैथोलॉजी का निरीक्षण किया। मरीजों से भी पूछताछ की।
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मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा का कहना है कि अस्पताल में 440 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। डेंगू की जांच कराई जा रही है। हम स्वयं मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मरीजों की संख्या को देखते हुए नई बिल्डिंग में नए और नया वार्ड तैयार करा रहे हैं। जिसे आवश्यकता के अनुसार शुरू किया जाएगा।
सरकारी ट्रामा सेंटर में स्ट्रेचर पर लेटकर करा रहे इलाज
सौ शैय्या अस्पताल और नवनिर्मित बिल्डिंग में बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। इसके साथ ही सरकारी ट्रामा सेंटर में 18 साल से अधिक उम्र के मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। जो बाद में वार्ड नंबर चार और पांच में पहुंचाए जा रहे हैं। बच्चों के साथ वयस्कों में भी डेंगू का असर जोर करने लगा है। ट्रामा सेंटर में सभी पलंग फुल थे। बरामदे और गैलरी में पड़ी स्ट्रेचर पर भी मरीजों को लेटाकर ड्रिप चढ़ाई गई। बरामदे में पड़ी स्लिप पर भी मरीज भर्ती किए थे। यही हाल वार्ड नंबर चार और पांच है। यहां भी सभी पलंग भरे हुए हैं।
निजी क्लीनिक की रिपोर्ट नहीं मान रहे
सौ शैय्या अस्पताल में निजी क्लीनिक की रिपोर्ट को चिकित्सक नहीं मान रहे हैं। चिकित्सक अस्पताल में ही रिपोर्ट कराने के बाद ही मरीज को भर्ती करने के लिए कह रहे हैं। यदि कोई मरीज प्राइवेट अस्पताल से गंभीरवस्था में रेफर किया जाता है तो पहले पैथोलॉजी में जांच कराकर रिपोर्ट आने तक का इंतजार करने के लिए कहा जाता है। अभिभावक अस्पताल के बाहर भीषण गर्मी में मरीज को लेकर इंतजार करते रहते हैं। बच्चों को बीमार देखकर वेबस अभिभावकों के आंखों में आंसू आ जाते हैं।
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सरकारी ट्रामा सेंटर में स्ट्रेचर पर लेटकर करा रहे इलाज
सौ शैय्या अस्पताल और नवनिर्मित बिल्डिंग में बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। इसके साथ ही सरकारी ट्रामा सेंटर में 18 साल से अधिक उम्र के मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। जो बाद में वार्ड नंबर चार और पांच में पहुंचाए जा रहे हैं। बच्चों के साथ वयस्कों में भी डेंगू का असर जोर करने लगा है। ट्रामा सेंटर में सभी पलंग फुल थे। बरामदे और गैलरी में पड़ी स्ट्रेचर पर भी मरीजों को लेटाकर ड्रिप चढ़ाई गई। बरामदे में पड़ी स्लिप पर भी मरीज भर्ती किए थे। यही हाल वार्ड नंबर चार और पांच है। यहां भी सभी पलंग भरे हुए हैं।
निजी क्लीनिक की रिपोर्ट नहीं मान रहे
सौ शैय्या अस्पताल में निजी क्लीनिक की रिपोर्ट को चिकित्सक नहीं मान रहे हैं। चिकित्सक अस्पताल में ही रिपोर्ट कराने के बाद ही मरीज को भर्ती करने के लिए कह रहे हैं। यदि कोई मरीज प्राइवेट अस्पताल से गंभीरवस्था में रेफर किया जाता है तो पहले पैथोलॉजी में जांच कराकर रिपोर्ट आने तक का इंतजार करने के लिए कहा जाता है। अभिभावक अस्पताल के बाहर भीषण गर्मी में मरीज को लेकर इंतजार करते रहते हैं। बच्चों को बीमार देखकर वेबस अभिभावकों के आंखों में आंसू आ जाते हैं।
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