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आगरा: बाह में क्रांतिकारी गेंदालाल दीक्षित की धरोहर को संरक्षित करने के लिए अनशन शुरू

Mon, 20 Dec 2021 02:15 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 20 Dec 2021 02:15 PM IST
सार

बाह के क्रांतिकारी गेंदालाल दीक्षित का जन्म मई गांव में हुआ था। लोगों का आरोप है कि क्रांतिकारी का गांव शासन-प्रशासन की अनदेखी का शिकार है। गांव में कच्ची सड़कें हैं। गेंदालाल दीक्षित घर भी खंडहर हो गया है। 

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villagers start protest to protect the heritage of revolutionary Gendalal Dixit started in Bah Agra
धरने पर बैठे मई गांव के लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा जनपद के बाह क्षेत्र में क्रांति के अग्रदूत कमांडर-इन-चीफ गेंदालाल दीक्षित की धरोहर को संरक्षित किए जाने की मांग को लेकर उनकी जीवनीकार शाह आलम ने बाह के मई गांव में तीन दिवसीय अनशन शुरू कर दिया है। इस दौरान गांव में 21 दिसंबर को चबूतरा का निर्माण कराकर उसमें शिलालेख भी लगाया जाएगा।  

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क्रांतिवीर राम प्रसाद बिस्मिल के बलिदान दिवस पर शुरू हुए अनशन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। शाह आलम ने बताया कि उनकी मांग है कि गेंदालाल दीक्षित के जन्म स्थान मई गांव तक पक्की सड़क के निर्माण, खंडहर में तब्दील उनके घर को राष्ट्रीय स्मारक बनाने, बलिदान शताब्दी वर्ष पर डाक टिकट जारी करने, आगरा विश्वविद्यालय में उनकी याद में स्वर्ण पदक दिए जाने, गांव को पर्यटन मानचित्र से जोड़ने, उनके गौरवशाली इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। 
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बिस्मिल की शहादत को किया नमन
अनशन पर लोगों ने अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल को शहादत दिवस पर नमन किया गया। मौके पर भारत सिंह चौहान, पवन टाइगर, शाहिद महक, विनोद सांवरिया, डॉ. रिपुदमन सिंह, कुलदीप मिश्र प्रधान, रमेश कटारा, बच्चू सिंह तोमर, अजय कुमार, परवीन भारतीय, अजय राजपूत, नेत्रपाल  एडवोकेट, अशोक कुमार, इसरत अली, विजेंद्र दिक्षित आदि रहे। 

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कार्यक्रम के प्रवक्ता शंकर देव तिवारी ने बताया कि बाह के लोग क्रांतिकारी गेंदालाल दीक्षित के बलिदान के सौ वर्ष पूरे होने पर 21 दिसंबर को सामूहिक उपवास करेंगे। इसी दिन उनकी जन्मस्थली पर चबूतरा निर्माण के बाद शिलालेख लगाया जाएगा। 
                                                                                                      
कॉकोरी के नायक बिस्मिल की भूले कर्मस्थली
19 दिसंबर 1927 को फांसी के फंदे पर झूले कॉकोरी के नायक राम प्रसाद बिस्मिल ने चंबल के बीहड में क्रांति की ज्वाला जलाई थी। बाह के जोधपुरा गांव के बीहड के खंडहरों में उनकी यादों का इतिहास झांक रहा है। बिस्मिल का बचपन ननिहाल जोधपुरा में ही बीता था। 

यहीं से मैनपुरी षडयंत्र केस के हीरो रहे मई गांव के गेंदालाल दीक्षित के संपर्क में आए बिस्मिल क्रांति धारा से जुडे़। पूर्वसैनिक सेवा संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष जितेंद्र सिंह भदौरिया ने केंद्र और प्रदेश सरकार से यहां उनका स्मारक बनाए जाने की मांग की है। 

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