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अमर उजाला फाउडेंशन: आज होगा वेद गर्ग का बोन मैरो ट्रांसप्लांट, मां है डोनर

Wed, 04 May 2022 12:14 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Wed, 04 May 2022 12:14 AM IST
सार

अमर उजाला फाउंडेशन ने वेद के इलाज के लिए बीड़ा उठाया है। फाउंडेशन की ओर से एक लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है। दानदाताओं की मदद से 11.69 लाख रुपये एकत्र हो गए हैं। जिसके बाद  जन्मजात रक्त रोग थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित चार साल के वेद गर्ग का बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया जाएगा। इसके लिए पूरी तैयारी हो गई है। 
 

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Ved Garg bone marrow transplant with help of Amar Ujala Foundation  
थैलेसीमिया से ग्रसित वेद गर्ग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में जन्मजात रक्त रोग थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित चार साल के वेद गर्ग का बुधवार को जयपुर स्थित साउथ ईस्ट एशिया इंस्टीट्यूट फॉर थैलेसीमिया में बोन मैरो ट्रांसप्लांट होगा। वेद की मां कृष्णा बेटे के लिए बोन मैरो दान करेंगी। दोनों 20 अप्रैल से हॉस्पिटल में भर्ती हैं। वेद का ट्रांसप्लांट के लिए जयपुर में 25 फरवरी से इलाज चल रहा है।

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खेरागढ़ निवासी वेद गर्ग के पिता जितेंद्र गर्ग मजदूर हैं। उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए आर्थिक सहयोग मांगा। अमर उजाला फाउंडेशन ने मदद का बीड़ा उठाया। अमर उजाला फाउंडेशन व दानवीरों के सहयोग से 11.69 लाख रुपये एकत्र हुए। वेद के पिता जितेंद्र ने बताया कि आठ लाख रुपया प्री ट्रांसप्लांट कोर्स पर खर्च हो चुका है। ट्रांसप्लांट के समय चार लाख रुपये जमा कराने हैं। 

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30 दिन बाद होगा डिस्चार्ज

बुधवार सुबह आठ बजे डॉ. प्रिया मारवा व डॉ. राजप्रीत सोनी की टीम वेद का ऑपरेशन करेंगी। पहले मां का बोन मैरो निकाला जाएगा। फिर उसे वेद गर्ग में स्थानांतरित किया जाएगा। सब ठीक रहा तो 30 दिन बाद चार जून को वेद हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो जाएगा। इसके बाद करीब छह महीने तक वेद का पोस्ट ट्रांसप्लांट फॉलोअप होगा। इसमें हर सात दिन बाद उसकी जांचें करानी होंगी।  

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आगरा के ब्लड बैंक ने भी की मदद

जयपुर स्थित महात्मा गांधी हॉस्पिटल के सहयोग से साउथ ईस्ट एशिया इंस्टीट्यूट फॉर थैलेसीमिया का संचालन किया जाता है। जितेंद्र ने बताया कि वेद को जन्मजात थैलेसीमिया था। छह महीने का होने पर पता चला। तीन साल से एम्स से उपचार चल रहा था। महीने में दो से तीन बार रक्त चढ़वाना पड़ता था। इसमें आगरा के ब्लड बैंक ने मदद की। उन्होंने कहा अमर उजाला फाउंडेशन की मदद से मेरे बेटे को नया जीवन मिल जाएगा।

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