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Indian Railways: 'कवच' ब्रेकिंग सिस्टम के साथ 160 की रफ्तार पर दौड़ी वंदे भारत, जानें क्या हैं इसकी खासियत
Fri, 16 Feb 2024 02:08 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 16 Feb 2024 02:08 PM IST
सार
कवच सिस्टम लगाकर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का पलवल से मथुरा जंक्शन तक ट्रायल किया गया। ट्रेन 160 किलोमीटर की रफ्तार से ट्रैक पर दौड़ी। कवच सिस्टम डिवाइस को यात्रा के दौरान पूरे रास्ते चेक किया गया।
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'कवच' ब्रेकिंग सिस्टम के साथ 160 की रफ्तार पर दौड़ी वंदे भारत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आठ कोच के साथ वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन सुबह करीब 9:45 पर पलवल स्टेशन से आगे बढ़ी। 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पटरी पर दौड़ती हुई 11:28 पर मथुरा जंक्शन के प्लेटफार्म नम्बर पांच पर पहुंची। ट्रेन को लोको पायलट डीके शर्मा चला रहे थे।
बता दें उत्तर मध्य रेलवे में कवच सिस्टम का ट्रायल किया जा रहा है। अगर ट्रायल सफल होता है तो अन्य सवारी ट्रेनों में भी इस सिस्टम को इंजन के साथ सेट किया जाएगा। इससे ट्रेनों का संचालन बेहतर हो जाएगा।
ट्रेन पर गार्ड के रूप में मलखान गुर्जर मौजूद रहे। इसके अलावा निर्देशक आरडीएसओ मधुप श्रीवास्तव , डिप्टी सीएस टीआई कुश गुप्ता, एएस टीई पीएस चंदेल समेत करीब एक दर्जन रेलवे अधिकारी और कर्मचारी ट्रायल के दौरान ट्रेन में मौजूद रहे।
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ये है कवच सिस्टम का फायदा
कवच सिस्टम लगने के बाद ट्रेन को आने वाले स्टेशन का सिग्नल एक किलोमीटर पहले ही पता लग जायेगा। अगर सिग्नल ग्रीन होगा तो ट्रेन उसी रफ्तार से आगे बढ़ जाएग । ट्रेन की रफ्तार कम नहीं करनी पड़ेगी। अगर ट्रेन के लिए रुकने का सिग्नल होगा तो ड्राइवर के ब्रेक लगाए बिना ही ट्रेन ऑटोमेटिक मोड़ पर आकर सिग्नल पर खुद रुक जाएगी। इससे हादसे के ख़तरा पूरी तरह टल जाएगा।
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बता दें उत्तर मध्य रेलवे में कवच सिस्टम का ट्रायल किया जा रहा है। अगर ट्रायल सफल होता है तो अन्य सवारी ट्रेनों में भी इस सिस्टम को इंजन के साथ सेट किया जाएगा। इससे ट्रेनों का संचालन बेहतर हो जाएगा।
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ट्रेन पर गार्ड के रूप में मलखान गुर्जर मौजूद रहे। इसके अलावा निर्देशक आरडीएसओ मधुप श्रीवास्तव , डिप्टी सीएस टीआई कुश गुप्ता, एएस टीई पीएस चंदेल समेत करीब एक दर्जन रेलवे अधिकारी और कर्मचारी ट्रायल के दौरान ट्रेन में मौजूद रहे।
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ये है कवच सिस्टम का फायदा
कवच सिस्टम लगने के बाद ट्रेन को आने वाले स्टेशन का सिग्नल एक किलोमीटर पहले ही पता लग जायेगा। अगर सिग्नल ग्रीन होगा तो ट्रेन उसी रफ्तार से आगे बढ़ जाएग । ट्रेन की रफ्तार कम नहीं करनी पड़ेगी। अगर ट्रेन के लिए रुकने का सिग्नल होगा तो ड्राइवर के ब्रेक लगाए बिना ही ट्रेन ऑटोमेटिक मोड़ पर आकर सिग्नल पर खुद रुक जाएगी। इससे हादसे के ख़तरा पूरी तरह टल जाएगा।