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आईआईटी कानपुर के गोल्ड मेडिलिस्ट रहे अभिषेक यादव को मिली 613वीं रैंक
Wed, 05 Aug 2020 12:20 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 05 Aug 2020 12:20 AM IST
सार
खैरगढ़ के गांव हुसैनपुर निवासी अभिषेक यादव ने यूपीएसई परीक्षा में 613वीं रैंक हासिल की
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माता-पिता के साथ अभिषेक यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यूपीएसई परीक्षा का परिणाम मंगलवार को घोषित हुआ। इसमें फिरोजाबाद जनपद के एक गांव के मेधावी छात्र ने अपनी प्रतिभा का परचम फहराया है। खैरगढ़ के गांव हुसैनपुर निवासी अभिषेक यादव ने यूपीएसई परीक्षा में 613वीं रैंक हासिल की है। परिणाम आने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। दोस्तों एवं परिवारिजनों ने अभिषेक को अच्छे परिणाम आने पर बधाई दी।
27 वर्षीय अभिषेक यादव शुरू ही मेधावी रहे हैं। उन्होंने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई लखनऊ के आर्मी पब्लिक स्कूल से की। वर्ष 2012 में आईआईटी कानपुर में गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे हैं।
वर्ष 2016 में आईआईटी पूरी करने के बाद अभिषेक बंगलुरू की एक कंपनी में कार्यरत रहे। वर्ष 2019 में वह नौकरी करने के लिए जर्मनी चले गए। एक साल जर्मनी में एक कंपनी में नौकरी की। जनवरी 2020 में पुन: बंगलुरू आ गए।
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27 वर्षीय अभिषेक यादव शुरू ही मेधावी रहे हैं। उन्होंने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई लखनऊ के आर्मी पब्लिक स्कूल से की। वर्ष 2012 में आईआईटी कानपुर में गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे हैं।
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वर्ष 2016 में आईआईटी पूरी करने के बाद अभिषेक बंगलुरू की एक कंपनी में कार्यरत रहे। वर्ष 2019 में वह नौकरी करने के लिए जर्मनी चले गए। एक साल जर्मनी में एक कंपनी में नौकरी की। जनवरी 2020 में पुन: बंगलुरू आ गए।
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नौकरी करते हुए उन्होंने आईएएस की तैयारी की। अभिषेक ने आईएएस बनने का लक्ष्य बना लिया था। वह परीक्षा की तैयारी करते रहे। अभिषेक के पिता अनार सिंह सेना में सूबेदार रहे हैं। उनकी एक बहन आर्मी में सेंट्रल कमांड में सीनियर ऑपरेटर पद पर तैनात है।
अभिषेक के बड़े भाई सेना में कैप्टन थे। परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद परिवारिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। अभिषेक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवारिजनों को दिया है।
भाई आलोक की 2016 में हो गई थी हत्या
अभिषेक के बड़े भाई कैप्टन आलोक यादव की 21 फरवरी, 2016 को शिकोहाबाद से वापस गांव हुसैनपुर जगे लौटने के दौरान बछलई के पास गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्यारोपी की गिरफ्तारी नहीं होने पर अभिषेक की बहन ममता यादव, पिता रिटायर्ड सूबेदार मेजर अनार सिंह यादव के साथ आंदोलन किया था।
25 अप्रैल 2016 को भूख हड़ताल की थी, लेकिन तत्कालीन एसडीएम सत्यप्रकाश ने आश्वासन देकर समाप्त करा दी थी। लेकिन हत्यारोपी गिरफ्तार नहीं हुए तो ममता यादव ने दोबारा से भूख हड़ताल तीन मई को शुरू की थी। छह मई 2016 को देररात्रि तत्कालीन डीएम निधि केसरवानी के आश्वासन पर भूख हड़ताल समाप्त हुई थी।
अभिषेक के बड़े भाई सेना में कैप्टन थे। परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद परिवारिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। अभिषेक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवारिजनों को दिया है।
भाई आलोक की 2016 में हो गई थी हत्या
अभिषेक के बड़े भाई कैप्टन आलोक यादव की 21 फरवरी, 2016 को शिकोहाबाद से वापस गांव हुसैनपुर जगे लौटने के दौरान बछलई के पास गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्यारोपी की गिरफ्तारी नहीं होने पर अभिषेक की बहन ममता यादव, पिता रिटायर्ड सूबेदार मेजर अनार सिंह यादव के साथ आंदोलन किया था।
25 अप्रैल 2016 को भूख हड़ताल की थी, लेकिन तत्कालीन एसडीएम सत्यप्रकाश ने आश्वासन देकर समाप्त करा दी थी। लेकिन हत्यारोपी गिरफ्तार नहीं हुए तो ममता यादव ने दोबारा से भूख हड़ताल तीन मई को शुरू की थी। छह मई 2016 को देररात्रि तत्कालीन डीएम निधि केसरवानी के आश्वासन पर भूख हड़ताल समाप्त हुई थी।