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10 साल से चल रहा है रोडवेज बसों के फर्जीवाड़े का खेल, आगरा से जुड़े हैं तार

Thu, 23 Aug 2018 01:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Thu, 23 Aug 2018 01:12 PM IST
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up roadways bus fraud racket connection to agra
आईएसबीटी पर खड़ीं रोडवेज बसें - फोटो : अमर उजाला

एसटीएफ ने अलीगढ़ में रोडवेज बसों के संचालन में गुंडागर्दी और फर्जीवाड़ा पकड़ा है, उसके तार आगरा समेत कई जिलों से जुड़े हुए हैं। जांच में रोडवेज के कई अधिकारी और चेकिंग दस्तों से जुड़े अधिकारी भी फंस सकते हैं। रैकेट में पकड़ा गया एक व्यक्ति फाउंड्री नगर डिपो में भी काम कर चुका है। अभी मामले की जांच एसटीएफ कर रही है, लेकिन इसकी विभागीय जांच भी होगी। 

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स्पेशल टास्क फोर्स ने मंगलवार को अलीगढ़ के इगलास में मुठभेड़ के बाद बसों के संचालन में फर्जीवाड़ा पकड़ा था। इस खुलासे से रोडवेज के आगरा परिक्षेत्र में भी खलबली मची हुई है। बताते हैं कि यह गिरोह पिछले दस साल से हाथरस से लेकर मथुरा और अलीगढ़
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तक हावी है। 

रैकेट में पकड़ा गया खेमचंद नामक कर्मचारी आगरा फोर्ट डिपो और फाउंड्री नगर डिपो में भी काम कर चुका है। रोडवेज के सूत्रों की मानें तो इस फर्जीवाड़े में मथुरा, अलीगढ़ और आगरा के अधिकारी और कर्मचारियों की भी संलिप्तता निकल सकती है। 

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10 साल से चल रहा है फर्जीवाड़ा

तकरीबन 10 साल से फर्जी तरीके से बसों का संचालन करके सवारियों को फर्जी टिकट तक थमा दिए जाते हैं। आरएम स्कवैड, एआरएम स्कवैड ने कभी चेकिंग के दौैरान इस तरह की बसों को क्यों नहीं पकड़ा। लखनऊ से चेकिंग के लिए आने वाले दस्तों की नजर में क्यों नहीं आए। 

खुलासे के बाद चेकिंग दस्तों की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ गई है। अगर इसकी जांच एसटीएफ ने गहराई से की तो आगरा के कई डिपो के कर्मचारियों की मिलीभगत का खुलासा हो सकता है। रोडवेज अधिकारियों की कहना है कि अलीगढ़ में पकड़े गए आगरा परिक्षेत्र के कर्मचारियों के निलंबन और बर्खास्तगी तक हो सकती है। इस प्रकरण की विभागीय जांच भी शुरू हो गई है। 

रोडवेज के सूत्रों ने बताया कि इस रैकेट से जुड़े रोडवेज कर्मचारियों ने वर्ष 2012 में तत्कालीन आरएम नीरज सक्सेना पर चैंबर में घुसकर हमला किया था। यह प्रकरण तब काफी चर्चा में रहा था, लेकिन आज तक इनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।

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