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UP: मजदूरों की मजदूरी पर संकट! 20 दिन बाद आया आदेश, हजारों श्रमिकों का भुगतान फंसा

Thu, 06 Aug 2026 10:17 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Thu, 06 Aug 2026 10:17 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश सरकार के 22 जुलाई के आदेश ने मनरेगा के तहत जुलाई के पहले 20 दिनों में कराए गए कार्यों के भुगतान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आगरा समेत कई जिलों में हजारों मानव दिवस पहले ही सृजित हो चुके हैं, जिससे मजदूरों की मजदूरी और विभागीय कार्रवाई को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है।

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UP MGNREGA Workers Face Wage Uncertainty After Delayed ‘Zero Period’ Order
मजदूर।

विस्तार

उप्र शासन ग्राम्य विकास अनुभाग से 22 जुलाई को जारी एक पत्र ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (वीबी-जीरामजी) के कर्मियों और मजदूरों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। पत्र में जिन 60 दिन को जीरो पीरियड यानी काम न कराने के दिन बताए हैं, उनमें एक जुलाई से 20 जुलाई के 20 दिन भी शामिल हैं। समय बीतने के बाद जारी हुए पत्र ने विभागीय कर्मियों और वीबी-जीरामजी के मजदूरों में खलबली मचा दी है। पत्र में इस अवधि में काम कराने पर कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।
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वहीं ऐसे में कराए गए कार्य के लिए तैयार किए गए मस्टर रोल को शून्य माना जाएगा, बताया गया है। अब बदायूं में जहां 9708 मानव दिवस सृजित कराए जा चुके हैं, वहीं करीब 50 हजार मानव दिवस सृजित हुए हैं। इसी तरह प्रदेश के अन्य जिलों में भी मानव दिवस सृजित कर कार्य कराए गए हैं। इस पत्र के बाद अब इस दौरान काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी पर तलवार लटक गई है। उनका भुगतान कैसे होगा हर कोई यही सवाल कर रहा है।
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प्रमुख सचिव सौरभ बाबू की ओर से जारी इस पत्र में वीबी-जीरामजी के तहत वर्ष 2026-27 के लिए कृषि कार्यों के दौरान यानी 1 जुलाई से 20 जुलाई, 15 अक्तूबर से 5 नवंबर तथा 1 अप्रैल से 20 अप्रैल तक कुल 60 दिनों की अवधि को जीरो पीरियड बताया गया है। यह वह दिन हैं, जिन दिनों किसान धान की रोपाई, धान की कटाई एवं गेहूं की बुवाई तथा गेहूं की कटाई का कार्य करते हैं। आदेश में साफ लिखा है कि समय वीबी-जीरामजी यानी मनरेगा के तहत कोई नया कार्य शुरू नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य कृषि कार्यों के लिए पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध कराना है।
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इस दौरान किसी भी ग्राम पंचायत में वीबी-जीरामजी के तहत कार्य प्रारंभ, स्वीकृत अथवा संचालित नहीं किए जाएंगे। साथ ही इस अवधि में बेरोजगारी भत्ता भी देय नहीं होगा। इसके साथ ही सभी जिला कार्यक्रम समन्वयकों, कार्यक्रम अधिकारियों, ग्राम प्रधानों एवं पंचायत सचिवों को आदेश का पालन कराने और श्रमिकों को इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी जीरो पीरियड के दौरान कार्य स्वीकृत करता है, मस्टर रोल जारी करता है या भुगतान करता है तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवा भी समाप्त की जा सकती है।


लेकिन अब पेंच यहां फंस गया है कि यह पत्र 22 जुलाई को जारी हुआ और जिला में यह 24 जुलाई को मिला। तब तक सिर्फ आगरा जनपद में 27734 मानव दिवस कराए जा चुके थे, व अन्य जिलों में भी मनरेगा के तहत पौधरोपण, नहर किनारे सफाई, मिट्टी कार्य आदि कराए जा चुके हैं। ऐसे में अब जिले में 27734 मानव दिवस में कार्य करने वाले मजदूरों का भुगतान कैसे किया जाए, इसे लेकर कर्मचारियों में मंथन जारी है।


डीसी मनरेगा रामायण सिंह यादव ने बताया कि शासन से आए पत्र में 60 दिवस कृषि कार्यों के लिए छोड़े गए हैं इन दिवसों को जीरो पीरियड बताया गया है। इन दिनों में वीबी-जीरामजी के तहत कार्य नहीं कराए जाने हैं। जिले में जुलाई के इन 20 दिनों में जो काम हुए हैं, इसके भुगतान को लेकर शासन को पत्राचार किया जाएगा। कोई रास्ता निकालने का प्रयास किया जाएगा।
 
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