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UP Encounter: फाती ने यूपी समेत सात राज्यों में फैला रखी थी दहशत, दूसरे जिलों में डेरा जमा लेता था बदमाश असद
Mon, 10 Mar 2025 02:25 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 10 Mar 2025 02:25 PM IST
सार
मथुरा में पुलिस मुठभेड़ में छैमार गिरोह का सरगना ढेर हो गया है। छैमार गिरोह के सरगना फाती ने यूपी समेत सात राज्यों में दहशत फैला रखी थी। पूछताछ में फाती ने सात से अधिक राज्यों में गिरोह की ओर से 200 से ज्यादा हत्या करने की बात कबूल की थी।
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UP Mathura Encounter
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मथुरा में पुलिस मुठभेड़ में ढेर छैमार गिरोह के सरगना असद खान उर्फ कदीम उर्फ फाती पर आगरा एसटीएफ ने शिकंजा कसा था। उसे 10 अगस्त 2021 को आईएसबीटी से गिरफ्तार किया था। टीम की पूछताछ में उसने सात से अधिक राज्यों में गिरोह की ओर से 200 से ज्यादा हत्या करने की बात कबूल की थी।
फाती को तब आयुध अधिनियम में जेल भेजा गया था। उस पर 25 हजार का इनाम घोषित था। 5 साल बाद गिरफ्तारी हुई थी। बदमाश ने जिन राज्यों में वारदात की थी, उसके बारे में डीजीपी को पत्र भी लिखा गया था।
एसटीएफ आगरा के तत्कालीन निरीक्षक उदय प्रताप सिंह (वर्तमान में सीओ गोरखपुर) ने फाती को गिरफ्तार किया था। तमंचा और दो कारतूस बरामद किए थे। थाना हरीपर्वत में केस दर्ज कराने के बाद उसे जेल भेजा गया था। पुलिस ने सितंबर 2021 में आरोपपत्र दाखिल किया था।
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फाती मूलरूप से बिनौरा, थाना तिर्वा, कन्नौज का रहने वाला था। गिरफ्तारी से पहले वह हापुड़ के थाना गढ़ स्थित गांव दौतई में रह रहा था। फाती के अलावा उसके कदीम, अशद खान, पहलवान उर्फ बबलू, मोनिस आदि नाम भी थे। एसटीएफ के मुताबिक, वह आगरा में बड़ी वारदात करने आया था। आईएसबीटी के पास पकड़ लिया गया था।
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फाती को तब आयुध अधिनियम में जेल भेजा गया था। उस पर 25 हजार का इनाम घोषित था। 5 साल बाद गिरफ्तारी हुई थी। बदमाश ने जिन राज्यों में वारदात की थी, उसके बारे में डीजीपी को पत्र भी लिखा गया था।
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एसटीएफ आगरा के तत्कालीन निरीक्षक उदय प्रताप सिंह (वर्तमान में सीओ गोरखपुर) ने फाती को गिरफ्तार किया था। तमंचा और दो कारतूस बरामद किए थे। थाना हरीपर्वत में केस दर्ज कराने के बाद उसे जेल भेजा गया था। पुलिस ने सितंबर 2021 में आरोपपत्र दाखिल किया था।
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फाती मूलरूप से बिनौरा, थाना तिर्वा, कन्नौज का रहने वाला था। गिरफ्तारी से पहले वह हापुड़ के थाना गढ़ स्थित गांव दौतई में रह रहा था। फाती के अलावा उसके कदीम, अशद खान, पहलवान उर्फ बबलू, मोनिस आदि नाम भी थे। एसटीएफ के मुताबिक, वह आगरा में बड़ी वारदात करने आया था। आईएसबीटी के पास पकड़ लिया गया था।
दूसरे जिलों में जमा लेता था डेरा
एसटीएफ के मुताबिक, फाती से पूछताछ में पता चला था कि गिरोह अलग-अलग राज्यों में घूमता रहता है। वह शहर से बाहर सुनसान इलाकों में डेरा बना लेते हैं। पूरा परिवार साथ रहता है, जिससे पुलिस भी नहीं पकड़ पाती है। वह जहां रहते हैं, उसके आसपास के जिले में जाते हैं। भीख मांगने के बहाने घरों और दुकानों की रेकी करते हैं। चोरी, लूट और हत्या के बाद दूसरे जिले में डेरा जमाने चले जाते हैं।
एसटीएफ के मुताबिक, फाती से पूछताछ में पता चला था कि गिरोह अलग-अलग राज्यों में घूमता रहता है। वह शहर से बाहर सुनसान इलाकों में डेरा बना लेते हैं। पूरा परिवार साथ रहता है, जिससे पुलिस भी नहीं पकड़ पाती है। वह जहां रहते हैं, उसके आसपास के जिले में जाते हैं। भीख मांगने के बहाने घरों और दुकानों की रेकी करते हैं। चोरी, लूट और हत्या के बाद दूसरे जिले में डेरा जमाने चले जाते हैं।
गिरोह के सभी सदस्य इसी तरह के काम करते हैं। वर्ष 2016 में उसे लखनऊ एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। तब वह फर्जी जमानती लगाकर जेल से बाहर आया और फरार हो गया था। फाती ने पूछताछ में गिरोह के उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान के अलग-अलग जिलों में 200 हत्याएंं अंजाम देने की बात कबूल की थी।
स्थानीय लोगों को देते हैं लालच
एसटीएफ के मुताबिक, छैमार गिरोह के 10-15 सदस्य लोगों के विरोध पर लाठी-डंडों से हत्या कर देते हैं। इसके बाद एक जगह पर एकत्रित होकर माल का बंटवारा करने के बाद फरार हो जाते हैं। पकड़े जाने पर फर्जी जमानतदार पेश करते हैं।
एसटीएफ के मुताबिक, छैमार गिरोह के 10-15 सदस्य लोगों के विरोध पर लाठी-डंडों से हत्या कर देते हैं। इसके बाद एक जगह पर एकत्रित होकर माल का बंटवारा करने के बाद फरार हो जाते हैं। पकड़े जाने पर फर्जी जमानतदार पेश करते हैं।
जमानत मिलने पर फरार हो जाते हैं। उनके नहीं मिलने पर पुलिस भी केस बंद कर देती है। अलग नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवा लेते हैं। गिरोह के सदस्य देशभर में सक्रिय हैं। जहां रहते हैं, वहां पर स्थानीय लोगों और जन प्रतिनिधियों को भी लालच में फंसा लेते हैं।
वेश और नाम बदलने में माहिर था छैमार गैंग का सरगना
मुठभेड़ में ढेर हुआ असद उर्फ फाती नाम और वेश बदलने में माहिर था। गैंग के अन्य सदस्य भी इसी तर्ज पर काम करते हैं। वह भिखारी का वेश धारण कर पहले रेकी करते। इसके बाद रात को घर पर गैंग के साथ धावा बोल देते। गैंग के सदस्य धारदार हथियारों का ज्यादा प्रयोग करते हैं। मामला बिगड़ने पर ही तमंचा आदि का इस्तेमाल करते हैं।
मुठभेड़ में ढेर हुआ असद उर्फ फाती नाम और वेश बदलने में माहिर था। गैंग के अन्य सदस्य भी इसी तर्ज पर काम करते हैं। वह भिखारी का वेश धारण कर पहले रेकी करते। इसके बाद रात को घर पर गैंग के साथ धावा बोल देते। गैंग के सदस्य धारदार हथियारों का ज्यादा प्रयोग करते हैं। मामला बिगड़ने पर ही तमंचा आदि का इस्तेमाल करते हैं।
डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि शातिर डकैत नाम और वेश बदलने में माहिर था। अभी तक उसके हापुड़ गढमुक्तेश्वर निवासी फाती उर्फ कदीम उर्फ असद उर्फ पहलवान उर्फ बबलू उर्फ मोनीस आदि नामों की जानकारी हुई है। उसके और नामों की भी जानकारी की जा रही है। बताया कि छैमर गैंग वारदात से पहले घर की रेकी करता है, इसके बाद वारदात को अंजाम देते हैं।