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लघु और सीमांत किसानों की तरक्की के लिए तकनीक विकसित करें वैज्ञानिक: आनंदीबेन

Wed, 28 Aug 2019 07:19 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 28 Aug 2019 07:19 PM IST
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up governor anandiben patel said Scientists develop technology to Farmers
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि वैज्ञानिक आर्थिक रूप से कमजोर और लघु सीमांत कृषकों के लिए ऐसी तकनीक विकसित करें, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से व्यावहारिक हो। इसे अपनाकर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकें। आनंदीबेन वेटरनेरी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। 
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दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने शिक्षकों और पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों से कहा कि वह अपने ज्ञान का प्रकाश उन क्षेत्रों तक पहुंचाएं, जहां अब तक कोई काम नहीं हुआ है।
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उन्होंने प्रदेश में सबसे अधिक दुग्ध उत्पादन पर खुशी जाहिर की वहीं, यह सवाल भी खड़ा किया कि पशुओं की संख्या और प्रदेश की आवश्यकता के अनुरूप क्या यह पर्याप्त है...? उन्होंने पशु चिकित्सकों से कांजी हाउस में बंद गायों को भी उपयोगी बनाने की दिशा में भी काम करने की अपील की। 
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कार्यक्रम में मौजूद रहे अतिथिगण - फोटो : अमर उजाला
इस मौके पर विशिष्ट अतिथि पशुधन मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने किसानों की आय दोगुना करने के विकल्पों पर चर्चा की। कहा कि किसानों को कृषि के साथ इससे जुड़े अन्य व्यवसायों की ओर भी रुख करना होगा। विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति प्रो. एसके गर्ग ने विश्वविद्यालय के विषय में बताया। 

इससे पूर्व कुलपति प्रो. जीके सिंह ने विश्वविद्यालय की रिपोर्ट प्रस्तुत की। संचालन रजिस्ट्रार डॉ. पीके शुक्ला ने किया। समारोह के दौरान पूर्व सांसद मानवेंद्र सिंह, महापौर डॉ. मुकेश आर्य बंधु, पूर्व विधायक प्रदीप माथुर, गोवर्धन विधायक ठा. कारिंदा सिंह भी मौजूद रहे। 

पूर्व सचिव डेयरी और पूर्व महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद डा. मंगला राय ने कहा कि हरित क्रांति के साथ ही 1974 में प्रथम विश्व खाद्य शिखर सम्मेलन में एक दशक के अंदर विश्व से भुखमरी मिटाने का संकल्प लिया था, लेकिन 45 साल बाद संख्या और बढ़ रही है। 

उन्होंने प्रदेश के पशुधन मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि इस विश्वविद्यालय में कई साल पहले मत्स्य कॉलेज और डेयरी साइंस कॉलेज के लिए बिल्डिंग बनवा दी गई हैं, जबकि इनमें पढ़ाने के लिए संसाधन और शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा रही। सिर्फ बिल्डिंग खड़ी करने से सरकार का दायित्व पूरा नहीं हो रहा है। 
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