फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Up Election 2022: goverdhan vidhan sabha seat no candidate get three time victory

यूपी का रण 2022: गोवर्धन क्षेत्र में किसी एक दल का नहीं रहा प्रभाव, राजा बच्चू सिंह की लहर में विधायक बने थे निर्दलीय खेमचंद

Thu, 27 Jan 2022 10:34 AM IST
Abhishek Saxena संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 27 Jan 2022 10:34 AM IST
सार

गोवर्धन विधानसभा क्षेत्र में कभी भी किसी विधायक को लगातार तीन जीत का मौका नहीं मिला, आचार्य जुगल किशोर, ज्ञानेंद्र स्वरूप, अजय कुमार पोइया लगातार दो-दो बार के विधायक बने, लेकिन हैट्रिक नहीं बना सके।

विज्ञापन
Up Election 2022: goverdhan vidhan sabha seat no candidate get three time victory
गोवर्धन स्थित गिर्राज दान घाटी मंदिर

विस्तार

मथुरा जनपद की गोवर्धन विधानसभा क्षेत्र की जनता ने कभी किसी एक पार्टी को लंबे समय तक प्रतिनिधित्व का मौका नहीं दिया है। समय के साथ यहां राजनीतिक दलों का प्रभाव बदलता रहा है। यहां कांग्रेस से ज्यादा उसके विरोधी दल कामयाब रहे हैं। करीब 45 साल तक यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित भी रही है।

विज्ञापन

गोवर्धन विधानसभा का पहला चुनाव 1957 में हुआ था। उस वक्त यह सीट आरक्षित नहीं थी। कांग्रेस से आचार्य जुगल किशोर यहां पहले विधायक बने। उन्होंने एक बार फिर 1962 के चुनाव में कांग्रेस से ही विधानसभा में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद 1967 में परिसीमन के बाद इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया। इसी के साथ कांग्रेस ने यह सीट गंवा दी। पहली बार गोवर्धन से आईएनडी के खेमचंद पहले गैर कांग्रेसी विधायक बने। लेकिन कन्हैया लाल अगले चुनाव में कांग्रेस से फिर विधायक बन गए।
विज्ञापन

कांग्रेस नहीं कर सकी वापसी
1974 बीकेडी से ज्ञानेंद्र स्वरूप और 1977 में जेएनपी से वे चुने गए। अगले चुनाव में जेएनपी का दबदबा रहा, लेकिन विधायक कन्हैया लाल बने। इंदिरा गांधी की मौत के बाद 1985 के चुनाव में कांग्रेस ने फिर वापसी की। बलजीत विधायक बने, लेकिन अगले दो चुनाव में जनता दल का प्रभाव यहां देखने को मिला। ज्ञानेंद्र स्वरूप और पूरन प्रकाश विधायक बने। इसके बाद 1993 के चुनाव में पहली बार भाजपा ने यहां जीत दर्ज की। अजयकुमार पोइया भाजपा के पहले विधायक बने। लगातार दो जीत के बाद भाजपा ने 2002 के चुनाव में प्रत्याशी बदल दिया। इसके बावजूद भाजपा को श्याम सिंह अहेरिया के रूप में लगातार तीसरी जीत मिली। भाजपा की जीत का यह सिलसिला 2007 में उस वक्त टूट गया, जब भाजपा के विद्रोह करके पूर्व विधायक अजय कुमार पोइया चुनाव मैदान में उतर आए। इस बार विधायक बनने का मौका आरएलडी से पूरन प्रकाश को मिला। इसके बाद यह क्षेत्र आरक्षित नहीं रहा। परिसीमन में सामान्य सीट होने पर 2012 के चुनाव में पहली बार बसपा ने राजकुमार रावत के रूप में यहां जीत दर्ज की लेकिन 2017 में इसे भाजपा ने मोदी लहर में बसपा से छीन लिया और ठाकुर कारिंदा सिंह यहां के विधायक बन गए, जिन्हें पिछले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।

विज्ञापन
विज्ञापन

Up Election 2022: goverdhan vidhan sabha seat no candidate get three time victory
गोवर्धन महाराज, दान घाटी - फोटो : अमर उजाला

ये हैं गोवर्धन विधानसभा के विधायक
1957 जुगल किशोर कांग्रेस
1962 आचार्य जुगल किशोर, आईएनसी 
1967 (एससी वर्ग) खेमचंद, आईएनडी
1969 कन्हैया लाल, कांग्रेस
1974 ज्ञानेंद्र स्वरूप, बीकेडी
1977 ज्ञानेंद्र स्वरूप, जेएनपी
1980 कन्हैया लाल एम, जेएनपी
1985 बलजीत, कांग्रेस
1989 ज्ञानेंद्र स्वरूप, जेडी
1991 पूरन प्रकाश, जेडी
1993 अजय कुमार, बीजेपी
1996 अजय कुमार पोइया, बीजेपी 
2002 श्याम सिंह अहेरिया, बीजेपी
2007 पूरन प्रकाश, आरएलडी 
2012 राजकुमार रावत, बसपा
2017 कारिंदा सिंह, भाजपा

हैट्रिक नहीं लगा सका कोई
गोवर्धन विधानसभा क्षेत्र में कभी भी किसी विधायक को लगातार तीन जीत का मौका नहीं मिला; आचार्य जुगल किशोर, ज्ञानेंद्र स्वरूप, अजय कुमार पोइया लगातार दो-दो बार के विधायक बने, लेकिन हैट्रिक नहीं बना सके। हालांकि कन्हैया लाल तीन बार के विधायक रहने के बावजूद कभी लगातार चुनाव नहीं जीत सके। इंदिरा गांधी की मौत के बाद हुए चुनाव बेहद रोचक रहा। इंद्रिरा लहर में भी गोवर्धन से कांग्रेस प्रत्याशी बलजीत को महज 623 मतों से ही एलकेडी के ज्ञानेंद्र स्वरूप पर जीत दर्ज कर सके थे।

 

Up Election 2022: goverdhan vidhan sabha seat no candidate get three time victory
गोवर्धन स्थित दानघाटी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
राजा बच्चू सिंह की लहर में विधायक बने थे निर्दलीय खेमचंद
1967 में लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एक साथ हुआ था। भरतपुर के राजा बच्चू सिंह इस चुनाव में मथुरा से लोकसभा के निर्दलीय उम्मीदवार थे। उन्हें उगता हुआ सूरज चुनाव चिन्ह मिला था। इसी वर्ष गोवर्धन विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई। निर्दलीय उम्मीदवार खेमचंद को भी विधानसभा में उगता हुआ सूरज मिला था। राजा बच्चू सिंह की जाट बाहुल्य मथुरा लोकसभा में लहर के चलते लोगों ने विधानसभा के मतपत्र में भी उगते हुए सूरज पर मतदान किया था। इससे गोवर्धन विधानसभा में भी उगते सूरज के सहारे निर्दलीय खेमचंद विधायक बन गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed