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यूपी बोर्ड फर्जी सचल दल: कई स्कूलों से वसूली करने का था प्लान, किया चौंकाने वाला खुलासा
Wed, 06 Apr 2022 02:44 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 06 Apr 2022 02:44 PM IST
सार
आगरा में यूपी बोर्ड की परीक्षा के दौरान हिरासत में आए फर्जी सचल दल के चार सदस्यों से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोपियों ने बताया कि पहले सड़क ठेकेदारों से वसूली की थी, अब स्कूल उनके निशाने पर थे, लेकिन उससे पहले ही उनका भंडाफोड़ हो गया।
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पकड़े गए चारों आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इरादतनगर के इंटर कॉलेज में वसूली करने पहुंचे फर्जी सचल दल के सरगना ने वसूली की बड़ी साजिश रची थी। पुलिस की पूछताछ में पता लगा है कि आरोपी पहले आरटीआई के नाम पर सड़क ठेकेदारों को धमकाकर उनसे वसूली कर रहे थे। अब बोर्ड परीक्षा में निरीक्षण के नाम पर विद्यालय में कमियां निकालकर ब्लैकमेल करना चाहते थे। मां वैष्णो देवी इंटर कॉलेज में वे तीसरी बार गए थे। पुलिस की पूछताछ में गैंग के कई और विद्यालयों में जाने की जानकारी मिली है।
इरादतनगर के कुर्राचित्तरपुर स्थित मां वैष्णो देवी इंटर कॉलेज में सोमवार की सुबह 8:45 बजे बोलेरो गाड़ी से चार लोग पहुंचे थे। बोलेरो पर भारत सरकार जिला मजिस्ट्रेट एनसीआरबी लिखा हुआ था। गाड़ी पर नंबर भी नहीं था। चारों कोट पेंट पहने थे। उनकेनेम प्लेट भी लगी थी। केंद्र व्यवस्थापक से स्ट्रांग रूम में जाने का दबाव बना रहे थे। मगर, निरीक्षण अधिकार पत्र नहीं दिखा सके। इसके साथ ही एनसीआरबी की फुल फॉर्म भी सही नहीं बता सके। इस पर डीआईओएस और पुलिस को जानकारी दी गई।
पुलिस की पूछताछ में वो फर्जी मजिस्ट्रेट निकले थे। आरोपियों में शमसाबाद के ठेरई निवासी रघुवीर सिंह तोमर, सैंया के कुकावर निवासी अशोक कुमार, खेरागढ़ के नगला छाछरी निवासी मुकेश और बसई खुर्द निवासी देवेंद्र कुमार थे। थानाध्यक्ष अवधेश गौतम ने बताया कि आरोपियों को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से चारों को जेल भेज दिया गया। केस में विवेचना की जा रही है।
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थानाध्यक्ष ने बताया कि रघुवीर सिंह गैंग का सरगना है। उससे पूछताछ में पता चला कि उसने वसूली के लिए गैंग बनाया था। वह सूचना अधिकार के तहत सूचना मांगने का काम भी करता है। वह पहले गांवों में खड़ंजा और सड़क बनाने वाले ठेकेदारों के पास पहुंच जाता था। उनके काम में कमी निकालकर धमकाता था, जिससे वो परेशान होकर रुपये दे दें। तीन महीने पहले मुकेश से मुलाकात होने पर उसने बड़ा खेल करने की साजिश रची। बोर्ड परीक्षा शुरू होने पर निजी विद्यालयों में निरीक्षण के नाम पर वसूली का प्लान बनाया।
27 मार्च को मां वैष्णो देवी कॉलेज में आए थे। मगर, परीक्षा संपन्न हो चुकी थी। इस कारण उन्हें लौटना पड़ा था। 30 मार्च को फिर आए, मगर परीक्षा निरस्त हो गई थी। इस कारण नहीं जा सके। तीसरी बार आने पर विद्यालय में धमकाने लगे। मगर, पकड़े गए। आरोपी इससे पहले कुछ और विद्यालयों में गए थे। मगर, वह नाम नहीं बता सके हैं। इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों से जानकारी जुटाई जा रही है। रघुवीर बार-बार बीपी की समस्या बता रहा है, जिससे पुलिस उससे सख्ती करने में कतरा रही है।
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इरादतनगर के कुर्राचित्तरपुर स्थित मां वैष्णो देवी इंटर कॉलेज में सोमवार की सुबह 8:45 बजे बोलेरो गाड़ी से चार लोग पहुंचे थे। बोलेरो पर भारत सरकार जिला मजिस्ट्रेट एनसीआरबी लिखा हुआ था। गाड़ी पर नंबर भी नहीं था। चारों कोट पेंट पहने थे। उनकेनेम प्लेट भी लगी थी। केंद्र व्यवस्थापक से स्ट्रांग रूम में जाने का दबाव बना रहे थे। मगर, निरीक्षण अधिकार पत्र नहीं दिखा सके। इसके साथ ही एनसीआरबी की फुल फॉर्म भी सही नहीं बता सके। इस पर डीआईओएस और पुलिस को जानकारी दी गई।
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पुलिस की पूछताछ में वो फर्जी मजिस्ट्रेट निकले थे। आरोपियों में शमसाबाद के ठेरई निवासी रघुवीर सिंह तोमर, सैंया के कुकावर निवासी अशोक कुमार, खेरागढ़ के नगला छाछरी निवासी मुकेश और बसई खुर्द निवासी देवेंद्र कुमार थे। थानाध्यक्ष अवधेश गौतम ने बताया कि आरोपियों को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से चारों को जेल भेज दिया गया। केस में विवेचना की जा रही है।
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थानाध्यक्ष ने बताया कि रघुवीर सिंह गैंग का सरगना है। उससे पूछताछ में पता चला कि उसने वसूली के लिए गैंग बनाया था। वह सूचना अधिकार के तहत सूचना मांगने का काम भी करता है। वह पहले गांवों में खड़ंजा और सड़क बनाने वाले ठेकेदारों के पास पहुंच जाता था। उनके काम में कमी निकालकर धमकाता था, जिससे वो परेशान होकर रुपये दे दें। तीन महीने पहले मुकेश से मुलाकात होने पर उसने बड़ा खेल करने की साजिश रची। बोर्ड परीक्षा शुरू होने पर निजी विद्यालयों में निरीक्षण के नाम पर वसूली का प्लान बनाया।
27 मार्च को मां वैष्णो देवी कॉलेज में आए थे। मगर, परीक्षा संपन्न हो चुकी थी। इस कारण उन्हें लौटना पड़ा था। 30 मार्च को फिर आए, मगर परीक्षा निरस्त हो गई थी। इस कारण नहीं जा सके। तीसरी बार आने पर विद्यालय में धमकाने लगे। मगर, पकड़े गए। आरोपी इससे पहले कुछ और विद्यालयों में गए थे। मगर, वह नाम नहीं बता सके हैं। इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों से जानकारी जुटाई जा रही है। रघुवीर बार-बार बीपी की समस्या बता रहा है, जिससे पुलिस उससे सख्ती करने में कतरा रही है।