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यूपी विधानसभा चुनाव 2022: कांग्रेस के लिए 26 साल से बंजर है ताजनगरी, आखिरी बार जीते थे मंडलेश्वर सिंह
Tue, 11 Jan 2022 10:56 AM IST
Abhishek Saxena
धर्मेंद्र यादव, अमर उजाला, आगरा
धर्मेंद्र यादव, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 11 Jan 2022 10:56 AM IST
सार
आगरा में वर्ष 1996 में खेरागढ़ सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी मंडलेश्वर सिंह आखिरी बार चुनाव जीते थे। तब से कांग्रेस पार्टी संघर्ष कर रही है।
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कांग्रेस
- फोटो : social media
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विस्तार
आजादी के बाद प्रदेश के पहले विधानसभा चुनाव में जिस कांग्रेस की आंधी चली, उस कांग्रेस के लिए 26 साल से आगरा की चुनावी जमीन बंजर हो चुकी है। 26 साल पहले 1996 में कांग्रेस के खेरागढ़ से प्रत्याशी मंडलेश्वर सिंह चुनाव जीत सके थे और तीन सीटों पर पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी, लेकिन उसके बाद से जिले की 9 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी लखनऊ जीतकर नहीं जा सके हैं। जीतना तो दूर, मुख्य मुकाबले में भी साल 2002 के बाद कांग्रेस के प्रत्याशी नजर नहीं आए। बीते दो चुनाव में गठबंधन के बाद भी कांग्रेस के प्रत्याशियों को सफलता नहीं मिल पाई।
70 सालों में सबसे ज्यादा राज करने वाली पार्टी कांग्रेस के लिए आगरा की सियासी जमीन 26 साल से उपजाऊ नहीं बन पाई है। आखिरी बार पार्टी के मंडलेश्वर सिंह ने वर्ष 1996 में खेरागढ़ विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी। उन्होंने भाजपा के जगदीशचंद्र दीक्षित को 1193 वोटों से हराया था। उस वक्त भी कांग्रेस का बसपा के साथ गठबंधन था। इसके बाद से आगरा की किसी विधानसभा सीट पर पार्टी के उम्मीदवार जनता की पसंद नहीं बन सके। इसके बाद वर्ष 1999, 2002, 2007, 2012 और 2017 के चुनाव में भी सूखा खत्म नहीं हो सका।
प्रियंका गांधी के प्रयोग पर हैं नजरें
26 साल से एक विधायक नहीं जिता पा रहे स्थानीय कांग्रेसियों की नजरें प्रियंका गांधी के प्रयोग पर हैं, जिसमें वह 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने वाली हैं। आगरा में वाल्मीकि समाज के बीच दो बार आ चुकी प्रियंका के फैसलों को लेकर पार्टी के कार्यकर्ता उत्साहित हैं और मानते हैं कि पार्टी का सूखा शायद इस बार खत्म हो जाए। पार्टी ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है, लेकिन इस बार आगरा की नौ विधानसभा सीटों में से 3 पर पार्टी महिला उम्मीदवारों पर दांव खेल सकती है।
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1996 में यहां दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस
बाह अमर चंद शर्मा
आगरा पूर्व बांके बिहारी अग्रवाल
फतेहपुर सीकरी बच्चू सिंह
सपा के साथ मिलकर लड़े और तीसरे पायदान पर टिके
2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सपा के साथ गठबंधन किया। उसके खाते में आगरा दक्षिण, आगरा ग्रामीण और खेरागढ़ सीटें आई थीं। छह सीटें सपा के पास थीं। इन तीनों सीटों पर पार्टी के प्रत्याशी गठबंधन के बाद भी तीसरे और चौथे पायदान पर रहे थे।
यादों के झरोखों से : 1952 का विधानसभा चुनाव, पहले चुनाव में चली थी कांग्रेस की आंधी, आगरा में जीतीं थीं आठ सीटें
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70 सालों में सबसे ज्यादा राज करने वाली पार्टी कांग्रेस के लिए आगरा की सियासी जमीन 26 साल से उपजाऊ नहीं बन पाई है। आखिरी बार पार्टी के मंडलेश्वर सिंह ने वर्ष 1996 में खेरागढ़ विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी। उन्होंने भाजपा के जगदीशचंद्र दीक्षित को 1193 वोटों से हराया था। उस वक्त भी कांग्रेस का बसपा के साथ गठबंधन था। इसके बाद से आगरा की किसी विधानसभा सीट पर पार्टी के उम्मीदवार जनता की पसंद नहीं बन सके। इसके बाद वर्ष 1999, 2002, 2007, 2012 और 2017 के चुनाव में भी सूखा खत्म नहीं हो सका।
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प्रियंका गांधी के प्रयोग पर हैं नजरें
26 साल से एक विधायक नहीं जिता पा रहे स्थानीय कांग्रेसियों की नजरें प्रियंका गांधी के प्रयोग पर हैं, जिसमें वह 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने वाली हैं। आगरा में वाल्मीकि समाज के बीच दो बार आ चुकी प्रियंका के फैसलों को लेकर पार्टी के कार्यकर्ता उत्साहित हैं और मानते हैं कि पार्टी का सूखा शायद इस बार खत्म हो जाए। पार्टी ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है, लेकिन इस बार आगरा की नौ विधानसभा सीटों में से 3 पर पार्टी महिला उम्मीदवारों पर दांव खेल सकती है।
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2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सपा के साथ गठबंधन किया। उसके खाते में आगरा दक्षिण, आगरा ग्रामीण और खेरागढ़ सीटें आई थीं। छह सीटें सपा के पास थीं। इन तीनों सीटों पर पार्टी के प्रत्याशी गठबंधन के बाद भी तीसरे और चौथे पायदान पर रहे थे।
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