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आगरा में होली की धूम: गांव सरैंधी में खेला गया अनूठा खेल, 700 साल पुरानी है यह परंपरा

Mon, 29 Mar 2021 02:55 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 29 Mar 2021 02:55 PM IST
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Unique game play on holi in saraindhi village of agra
अनूठे खेल में गांव के युवा - फोटो : अमर उजाला
आगरा जिले में होली का पर्व धूमधाम से मनाया गया। जगनेर ब्लाक के गांव सरैंधी में एक बार फिर 700 वर्ष पुरानी परंपरा जीवंत हुई। यहां होली पर झू मेले में  अनूठे खेल का आयोजन परंपरागत तरीके से सोमवार सुबह करीब नौ बजे से शुरू हुआ। इस अनूठे खेल को देखने के लिए हजारों लोग उमड़े। सभी लोग गांव सरैंधी के पूर्वज अचलम बाबा मंदिर पर एकत्रित हुए। 
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बाबा लाखन सिंह ने करीब 700 वर्ष पूर्व सरैंधी गांव बसाया था। बाद में वे अचलम बाबा को यहां का जागीरदार नियुक्त कर गए। बड़ा गांव होने के कारण गांव में चौबीस थोक मोहल्ले हैं, जिन्हें छह पार्टियों (टीकैत पार्टी, लौहरी पार्टी, बढ़ी पार्टी, थोक हवेली, चौक, तिहाय के नाम) के रूप में भी जाना जाता है। बाबा अचलम सिंह गांव के मध्य में बने अपने स्थल पर दरबार लगाकर न्याय करते थे। 
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होली पर यहां दरबार में लगने वाले झू मेले में अनूठे खेल का विशेष महत्व हैं। पड़वा के दिन गुलाल की होली खेलने के बाद सभी हुरियारे नहा धोकर हनुमान रूपी वेशभूषा में लंगोटी पहनकर अपने घरों के बाहर खड़े हो जाते हैं। उधर, गांव का नट ढोल नगाढ़ा बजाते हुए पूरे गांव की परिक्रमा करता है। इसके बाद लोग नट के पीछे जुड़ते हुए बाबा अचलम के दरबार में पहुंचते हैं। 
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ऐसे होता है खेल
दरबार के बीचोंबीच बने गेट में लोगों की भीड़ दो भागों में बंट जाती है। दो भागों में बंटकर हुरियारे अपना शक्ति प्रदर्शन करते हैं। परंपरा के अनुसार दरबार के गेट की दूसरे हिस्से में एक गुट को तीन बार गुजरना पड़ता है जिसमें हर गुट एक दूसरे का अपने हिस्से में आने से रोकने का प्रयास करता है। विजय के लिए एक गुट को दूसरे गुट को पीछा करते हुए उसके भाग में दो बार जाना पड़ता है। 

इस दौरान हुरियारों के उत्साहवर्धन के लिए पानी की बौछार की जाती है जिसे बाबा अचलम का आशीर्वाद माना जाता है। इस बार भी झू मेले में अनूठे दंगल का आयोजन हुआ, जो बराबरी पर छूटा। इसे देखने के लिए आसपास के गांवों के हजारों लोगों की भीड़ जुटी। इस अनूठे खेल को देखकर हर कोई रोमांचित हो गया।  

दौज को लगता है दरबार 
होली की दौज के दिन गांव के राजा वीरेंद्र सिंह अचलम बाबा मंदिर के सामने बने पुराने चबूतरे पर बैठ कर न्याय और गांव के अगामी विकास कार्यों पर चर्चा करते हैं। राज वंशज के तिलक के बाद गांव में होली का समापन हो जाता है। 

 
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