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Mathura: अद्भुत हैं भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की दो हजार साल पुरानी मूर्तियां, मोह लेंगी आपका मन

Mon, 04 Sep 2023 09:44 AM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 04 Sep 2023 09:44 AM IST
सार

ब्रज में न तो कान्हा के मंदिरों की कमी है न उनके विग्रहों की। लेकिन राजकीय संग्रहालय मथुरा में कुछ ऐसी मूर्तियां हैं जो अद्भुत हैं। एक खास मूर्ति है जिसमें श्रीकृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार करते वासुदेव दर्शाए गए हैं।
 

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Two thousand years old statues of birth of Lord Krishna in mathura
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की दो हजार साल पुरानी मूर्तियां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजकीय संग्रहालय मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ा दो हजार साल पुराना शिलाखंड मौजूद है। यह श्रीकृष्ण का मथुरा में सबसे पुराना शिलाखंड है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण को टोकरी में रखकर वासुदेव यमुना पार करते दर्शाए गए हैं। इसके अलावा भी राजकीय संग्रहालय में भगवान श्रीकृष्ण की अनेक मूर्तियों का संग्रह है।
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मूर्तिकला के लिए देश के सबसे धनी संग्रहालयों में से एक मथुरा राजकीय संग्रहालय में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ा शिलाखंड भी मौजूद है। इसमें श्रीकृष्ण को टोकरी में रखकर वासुदेव यमुना नदी को पार करते दर्शाए गए हैं। इसमें कालिया नाग अपने फनों को फैलाए है। इसके अलावा मगरमच्छ, मछलियां आदि जल जीवों की मौजूदगी भी यमुना जल में दर्शाई गई है। यह शिलाखंड लाल बलुआ पत्थर का कुषाणकालीन है।
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इसे करीब 1800-2000 वर्ष पुराना माना गया है, जो गताश्रम टीला नारायण मंदिर में खुदाई के दौरान मिला था। इसके अलावा भी इस स्थल पर खुदाई में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी कई प्रतिमाएं मिली हैं। ये राजकीय संग्रहालय में संग्रहीत हैं। संग्रहालय के वीथिका सहायक हरीबाबू बताते हैं कि संग्रहालय में भगवान श्रीकृष्ण से जुडे़ कई शिलाखंड मौजूद हैं। इसमें सबसे प्राचीन शिलाखंड श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ा हुआ है।
 
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 श्रीकृष्ण की मूर्तियों का संग्रह

राजकीय संग्रहालय में भगवान श्रीकृष्ण और बलराम से जुड़ी प्रतिमाओं का संग्रह है। इन्हें एक स्थान पर ही प्रदर्शित करने के लिए अलग कृष्ण बलराम वीथिका बनाई गई है। इसमें कुषाणकालीन और मध्यकालीन नौ मूर्तियां मौजूद हैं। इसमें गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण की प्रतिमा अद्भुत है। भगवान श्रीकृष्ण अंगुली के स्थान पर हाथ पर गोवर्धन पर्वत को उठाए हैं। उनका दूसरा हाथ अपनी जांघ पर बलपूर्वक रखा है, जो दर्शा रहा है कि गोवर्धन पर्वत उठाने से शरीर पर पड़ रहे भार को रोकने के लिए वे दूसरे हाथ का प्रयोग कर रहे हैं।

यह प्रतिमा सातवीं ईस्वी की है। यह प्रतिमा भी गताश्रम टीला नारायण मंदिर से प्राप्त हुई है। यह भी लाल पत्थर की है। इसके अलावा एक अन्य प्रतिमा में भगवान श्रीकृष्ण बंशी बजाते हुए हैं, जिनके चारों ओर गोपिकाएं नृत्य कर रही हैं। यह प्रतिमा करीब 550 साल पुरानी बताई जा रही है, जिसे सौंख टीला से प्राप्त किया गया है।
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