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आगरा जमीन कांड: सत्ताधारी पार्टी के दो नेता आमने-सामने, सियासी पारा गर्म... आखिर किसकी 'जमीन' खिसक रही?

Wed, 17 Jan 2024 12:21 PM IST
भूपेन्द्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Wed, 17 Jan 2024 12:21 PM IST
सार

आगरा जमीन कांड मामला बढ़ता ही जा रहा है। अब सत्ताधारी पार्टी के दो नेता आमने-सामने आ गए हैं। इससे सियासी पारा गर्म हो गया है। सवाल यह है कि आखिर किसकी 'जमीन' खिसक रही है?

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Two BJP leaders have come face to face on issue of 10 thousand square yards of land in Bodla in Agra
आगरा: बोदला जमीन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ताजनगरी आगरा में बोदला की 10 हजार वर्ग गज जमीन के मुद्दे पर भाजपा के दो नेता आमने-सामने आ गए हैं। जमीन पर कब्जे की लड़ाई अब राजनीतिक जमीन बचाने की कवायद बन गई है। एक ने दूसरे पर बदनाम करने की साजिश का आरोप लगाया तो दूसरे ने साफ कहा कि वह किसी से प्रतिद्वंद्विता नहीं मानते। अब तीसरे नेताजी ने भी इस मामले में रुचि दिखाई। वह भी उस जमीन पर पहुंच गए और सीबीआई जांच की मांग कर डाली। तीनों नेताओं की खींचतान से चर्चा है कि आखिर किसकी सियासी जमीन खिसक रही है।

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लोकसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में फतेहपुर सीकरी की सामान्य सीट पर दावेदारों के बीच घमासान शुरू हो चुका है। अभी तक दावेदारी का खेल अंदरखाने ही चल रहा था। लेकिन एक विवाद ने इसे सतह पर ला दिया है। लंबे समय से प्रदेश की राजनीति में सक्रिय नेता ने अपनी नई जमीन तलाशने के लिए फतेहपुर सीकरी में सक्रियता बढ़ाई। 

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अपने परिजन का सहारा लेकर क्षेत्र में गतिविधियां शुरू कर दीं। उनकी यह सक्रियता दूसरे नेताओं को रास नहीं आई। जमीन के विवाद में नाम उछला तो प्रदेश के नेता ने अपना पक्ष तो रखा ही मगर दूसरे नेताजी को इसके पीछे बताया। कहा कि वह उनकी सक्रियता से परेशान हैं। इसलिए उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। 

इसी घटनाक्रम के बीच तीसरे नेताजी ने भी दस्तक दे दी। उन्हें अपने पुराने दिन याद आए, जब इस सीट पर उनका कब्जा था। सब कुछ ठीक था मगर उनका टिकट काट दिया गया था। यह कसक बनी हुई है। हालांकि वह उसी इलाके से विधायक हैं मगर कसक कम नहीं हुई है। ऊंचे ओहदे से कद तो कम हुआ है। तो उन्होंने भी विवादित जमीन पर पहुंचकर संदेश देने की कोशिश की। वह भी किसी दूसरे दावेदार से कम नहीं हैं।

बेटे की सक्रियता रास नहीं आ रही

जिस जमीन को लेकर उनका नाम उछाला जा रहा है, उससे उनका लेना देना नहीं है। जमीन पर कब्जे के पीछे सैफई परिवार का करीबी है। देहात के क्षेत्र में उनका बेटा जाता है। यह कुछ लोगों को रास नहीं आ रहा है। - योगेंद्र उपाध्याय, उच्च शिक्षा मंत्री

सर्वाधिक वोटों से जीतने वाले सांसद हैंः चाहर

मेरी किसी से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता नहीं रही है। वर्ष 2019 में उन्हें टिकट मिला तो वह प्रदेश में सर्वाधिक वोटों से जीतने वाले सांसद रहे। उन्हें 64.4 फीसदी वोट शेयर मिला। यह केवल उन्हें नहीं बल्कि पार्टी के चुनाव चिह्न और मोदीजी को मिला। इस बार उनके लोकसभा क्षेत्र के लोग भाजपा को 70 फीसदी वोट देंगे। - राजकुमार चाहर, सांसद, फतेहपुर सीकरी

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