एक्सक्लूसिव: सरकारी काढ़े पर 'ताला', आयुर्वेद के 26 अस्पताल सात महीने से बंद, खराब हो रहीं दवाएं
- गोदाम दवाओं से भरे पड़े हैं, लेकिन मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं
- गोदाम में बंद दवाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला काढ़ा भी शामिल
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आगरा में कोरोना संक्रमण के सात महीने बाद भी आयुर्वेद के अस्पतालों को खोले जाने की अनुमति न मिल पाने के कारण इनके गोदामों में रखी दवाएं खराब हो रही हैं। इन दवाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला काढ़ा भी शामिल है। आयुर्वेद चिकित्साधिकारी ने शासन को पत्र भेजकर मांग की है कि ओपीडी शुरू कराई जाए, ताकि हर महीने आने वाले 15 हजार मरीजों को दवाएं वितरित की जा सकें।
जिले में आयुर्वेद के 26 अस्पताल और डिस्पेंसरी हैं। कोरोना वायरस के मामले शुरू होने पर इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता, काढ़ा, जुकाम-खांसी, पेट में दिक्कत समेत अन्य मर्ज की दवाओं का भंडार भेजा गया था।
कुछ दिन बाद लॉकडाउन लग गया और अस्पतालों की ओपीडी बंद करा दी। लॉकडाउन खुलने के बाद एलोपैथी के सभी अस्पताल में ओपीडी शुरू करा दी, लेकिन आयुष विभाग के 14 चिकित्सक, फार्मासिस्ट और अन्य स्टाफ की कोरोना वायरस में ड्यूटी लगने के कारण ओपीडी शुरू नहीं हो पाई है।
शासन को लिखा है पत्र: डॉ. जेके राणा
आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्साधिकारी डॉ. जेके राणा ने बताया कि पर्याप्त मात्रा में औषधियों का भंडार है, कोरोना वायरस में डॉक्टरों की ड्यूटी के कारण ओपीडी शुरू नहीं हुई है। शासन को पत्र लिखकर ओपीडी शुरू कराने की मांग की है, जिससे लोगों को इन औषधियों का लाभ मिल सके।
ये बोले आयुर्वेदिक उपचार कराने वाले
भैरों बाजार के रहने वाले विष्णु कटारा ने कहा कि कोरोना वायरस से बचाव में आयुर्वेदिक औषधियां सहायक बताई जा रहीं हैं, यदि अस्पताल में लोगों को दवाएं मिलने लगेंगी तो बड़ी राहत होगी, अभी निजी स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं।
गढ़ी भदौरिया निवासी राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने कहा कि आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल करता हूं, अस्पताल में दवाओं का भंडार है तो सरकार ओपीडी खोलने की अनुमति दे, जिससे लोगों का इनका लाभ मिल सके।
ईदगाह कॉलोनी संजू सिकरवार ने कहा कि अभी संक्रमण तेजी से फैल रहा है। चिकित्सक भी आयुर्वेदिक दवाओं के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं। दवाएं खूब हैं तो सरकार को ओपीडी शुरू कराने का आदेश जारी करना चाहिए।