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तुरकिया हत्याकांड: जिस आंगन में गूंजती थी किलकारियां, अब वीरान...यहां हुई थी चार मासूम और पति-पत्नी की हत्या
Mon, 10 Feb 2025 12:07 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 10 Feb 2025 12:07 PM IST
सार
तुरकिया गांव में सत्यभान के घर का आंगन आज वीरान है। पति पत्नी और चार बच्चों का भरापूरा परिवार बेरहमी से खत्म कर दिया गया। कुल्हाड़ी से सभी को काट डाला था।
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सत्यभान का घर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
राजस्थान की सरहद पर अछनेरा के गांव तुरकिया में 12 साल पहले सत्यभान के घर के आंगन में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, अब वहां सन्नाटा है। अंदर बने दो कमरे और बरामदे को गांव के लोग अपने काम में ले रहे हैं। आंगन की तरफ वाले दरवाजे पर ताला लगा है।
पड़ोस की महिलाओं ने बताया कि सत्यभान के चार बच्चे थे। बच्चों की उछलकूद और शरारतों से घर का आंगन गुलजार था। परिवार को जैसे नजर लग गई। 9 मई, 2012 को सत्यभान, उनकी पत्नी और बच्चों को क्या पता था कि वह सोने के बाद कभी आंखें नहीं खोल पाएंगे। बच्चों को गोद में खिलाने वाले चाचा गंभीर पर ही उन सभी हत्या का आरोप लगा था। वह जेल चला गया। बाद में उनका छोटा भाई कन्हैया भी गांव छोड़कर चला गया। रिश्तेदार घर में रखा सामान लेकर चले गए।
घर की देखभाल करने वाला कोई बचा नहीं था। अंदर बने दो कमरे और बरामदे को गांव के लोग अपने काम में ले रहे हैं। घर में 6 लोगों की हत्या के बाद डर से गांव के बच्चे उधर जाने से भी डरते हैं।
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पड़ोस की महिलाओं ने बताया कि सत्यभान के चार बच्चे थे। बच्चों की उछलकूद और शरारतों से घर का आंगन गुलजार था। परिवार को जैसे नजर लग गई। 9 मई, 2012 को सत्यभान, उनकी पत्नी और बच्चों को क्या पता था कि वह सोने के बाद कभी आंखें नहीं खोल पाएंगे। बच्चों को गोद में खिलाने वाले चाचा गंभीर पर ही उन सभी हत्या का आरोप लगा था। वह जेल चला गया। बाद में उनका छोटा भाई कन्हैया भी गांव छोड़कर चला गया। रिश्तेदार घर में रखा सामान लेकर चले गए।
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घर की देखभाल करने वाला कोई बचा नहीं था। अंदर बने दो कमरे और बरामदे को गांव के लोग अपने काम में ले रहे हैं। घर में 6 लोगों की हत्या के बाद डर से गांव के बच्चे उधर जाने से भी डरते हैं।
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