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आगरा कलेक्ट्रेट की जमीन पर कब्जा: नोटिस के बाद सामने आए ट्रस्ट के सचिव, दी कोर्ट जाने की धमकी

Fri, 11 Sep 2026 10:23 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Fri, 11 Sep 2026 10:23 AM IST
सार

कलेक्ट्रेट परिसर की जमीन पर कब्जे के आरोप में बेदखली नोटिस मिलने के बाद अंजुमन मोहम्मदिया ट्रस्ट ने आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है। ट्रस्ट के सहायक सचिव ने दावा किया कि जमीन कानूनी प्रक्रिया के तहत मिली थी और कार्रवाई हुई तो अदालत का रुख करेंगे।
 

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Trust Rejects Illegal Occupation Allegations Over Collectorate Land Warns of Court Action
आगरा कलेक्ट्रेट की जमीन पर कब्जा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा कलेक्ट्रेट परिसर की करीब 10 हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जे के मामले में प्रशासन की सख्ती के बाद अब कथित कब्जाधारक ट्रस्ट का पक्ष सामने आया है। अंजुमन मोहम्मदिया ट्रस्ट के सहायक सचिव हाजी जमील उद्दीन ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है।
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उनका दावा है कि ट्रस्ट ने कोई अवैध कब्जा नहीं किया है, बल्कि वह प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कानूनी प्रक्रिया के तहत दी गई जमीन पर नियमानुसार काबिज हैं। हाजी ने कहा कि पहले भी यह मामला 1997 में उठा था और उस समय के जिलाधिकारी दुर्गा शंकर मिश्र के साथ हुए समझौते के बाद गाटा पर कब्जे और चौहद्दी साफ हो गई थी। दस्तावेज में यह जमीन जमीदारी की है, न कि नजूल की।
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समझौते के बाद से साल 2003 तक कलेक्ट्रेट प्रशासन ही 314 रुपये प्रति साल का किराया भी देता रहा। हालांकि बाद में किराया देना बंद कर दिया। कहा कि प्रशासन दावा कर रहा है कि ट्रस्ट इस जमीन पर 25 साल से कब्जा किए हैं जबकि ट्रस्ट के माध्यम से इस जमीन पर लंबे अरसे से बालिका और बालकों के लिए दो अलग-अलग स्कूल संचालित हैं। हाजी ने चेतावनी दी है कि यदि परिसर में संचालित अल्पसंख्यक स्कूलों को जबरन बंद कराने या एकतरफा कार्रवाई करने की कोशिश की गई, तो वे अदालत का रुख करेंगे।
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बता दें कि जिलाधिकारी मनीष बंसल के निर्देश पर एसीएम तृतीय नितिन तेवतिया ने अंजुमन मोहम्मदिया ट्रस्ट समेत अन्य कब्जाधारकों को बेदखली का नोटिस जारी कर 14 सितंबर तक जवाब मांगा है। जमीन खाली न करने पर 30 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति और जुर्माने की चेतावनी दी गई है। अब ट्रस्ट के रुख के बाद यह मामला कानूनी और प्रशासनिक रूप से गर्मा गया है। प्रशासनिक रिकाॅर्ड में ट्रस्ट जिस जमीन पर काबिज है वह कलेक्ट्रेट परिसर का हिस्सा है।


कलेक्ट्रेट दस्तावेज में तो करीब 30 हजार वर्गमीटर में दर्ज है लेकिन मौके पर करीब 20 हजार वर्गमीटर जमीन पर ही काबिज है। डीएम मनीष बंसल के निरीक्षण और निर्देश के बाद अब प्रशासनिक अमला रिकाॅर्ड में दर्ज जानकारी के आधार पर कलेक्ट्रेट की पूरी जमीन पर काबिज होने के लिए कदमताल में जुटा हुआ है।
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