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UP News: टीटीजेड में होगी पेड़ों की गिनती, कटान पर लगाई गई रोक; अब निगरानी भी होगी

Wed, 27 Nov 2024 09:56 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Wed, 27 Nov 2024 09:56 AM IST
सार

ताजमहल के 60 किमी के दायरे में पेड़ों की गिनती की जाएगी। कटान पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। पेड़ों की अवैध कटाई न हो यह निगरानी रखने के लिए व्यवस्था बनेगी।
 

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Trees will be counted in TTZ cutting of trees banned
पेड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पर्यावरण दृष्टि से संवेदनशील ताज ट्रिपैजियम जोन (टीटीजेड) में अब एक-एक पेड़ की गिनती होगी। काटने पर रोक रहेगी। साथ ही, पेड़ों की अवैध कटाई न हो यह निगरानी रखने के लिए व्यवस्था बनेगी। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट ने टीटीजेड मामले में एक याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह और टीटीजेड चेयरमैन एवं मंडलायुक्त रितु माहेश्वरी से जवाब तलब किया है। 29 नवंबर को अगली सुनवाई होगी। दोनों आला अफसरों को सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करना पड़ेगा। एमसी मेहता बनाम भारत सरकार मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
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पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने एक याचिका दायर करते हुए टीटीजेड क्षेत्र में पेड़ों की अवैध कटान और हरियाली की हत्या के आरोप लगाए थे। 22 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए ताजमहल की 60 किमी परिधि में पेड़ों की गिनती कराने के आदेश दिए हैं। गिनती होने और अवैध कटाने रोकने का तरीका तय होने तक कोई नया पेड़ नहीं काटा जा सकेगा।
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याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि मुख्य सचिव व टीटीजेड चेयरमैन के अलावा याचिका में प्रमुख वन संरक्षक, आगरा व मथुरा डीएफओ सहित 6 लोगों को पार्टी बनाया है। उन्होंने बताया कि टीटीजेड में 700 से अधिक स्थानों पर 15 हजार से अधिक पेड़ अवैध रूप से काटे जा चुके हैं। सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) ने इस संबंध में एक रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट टीटीजेड में हरियाली की हत्या और पेड़ों को काटने को लेकर सख्त है।


ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 1998 में टीटीजेड घोषित किया था। पर्यावरण दृष्टि से संवेदनशील घोषित इस क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के लिए तमाम तरह के प्रतिबंध लगाए गए। मगर, टीटीजेड में अफसरों की लचर कार्यशैली के कारण न पेड़ों का अवैध कटान रुका न प्रदूषण स्तर में अपेक्षित सुधार हो सका है।
 
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