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मंत्री ने एसडीएम और दो थानेदारों को हटवाया
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Thu, 08 Oct 2015 01:31 AM IST
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पंचायत चुनाव की आचार संहिता लगी होने के बावजूद फतेहाबाद के एक एसडीएम और दो थाना प्रभारियों का तबादला कर दिया गया है। पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने यह कार्रवाई करने के लिए चुनाव आयोग से खास तौर पर अनुमति ली। उधर, जानकारी यह आ रही है कि तीनों को हटाने के लिए एक मंत्री ने शासन से कहा था। इसके बाद शासन के इशारे पर अफसरों को यह कार्रवाई करनी पड़ी। हालांकि अधिकारी तबादलों के पीछे कोई दबाव या सिफारिश होने से इंकार कर रहे हैं।
एसडीएम फतेहाबाद झब्बर प्रसाद को एसीएम तृतीय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसीएम तृतीय जेपी सिंह को फतेहाबाद एसडीएम बनाया गया है। थाना प्रभारी फतेहाबाद हरेंद्र पाल सिंह और थानाध्यक्ष निबोहरा अरविंद कुमार पर भी गाज गिरी है। दोनों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। उधर, सपा सूत्रों का कहना है कि एक मंत्री ने तीनों की शिकायत पहले चुनाव आयोग में की। वहां नहीं चली, तो शासन में बात की। मंत्री का कहना था कि तीनों उनकी बात सुन नहीं रहे हैं। इसके अलावा यह भी आशंका हो गई थी कि तीनों एक अन्य मंत्री की बात को तवज्जो दे रहे हैं। मंत्री की शासन के अफसरों ने सुन ली।
डीएम पंकज कुमार ने एसडीएम और एसएसपी डाक्टर प्रीतिंदर सिंह ने दोनों थाना प्रभारियों को हटा दिया। इस बारे में एसएसपी का कहना है कि दोनों की शिकायत चुनाव आयोग से की गई थी। दोनों ठीक से काम भी नहीं कर रहे थे। इसलिए हटाया गया है। कोई दबाव या सिफारिश नहीं थी।
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सपा की गुटबाजी से टेंशन में अफसर
यह पहला मौका नहीं है जब सपा नेताओं की गुटबाजी से अफसरों को टेंशन हुई है। इससे पहले भी सपा नेता एक दूसरे का खेल बिगाड़ने के लिए अफसरों पर दबाव बनाते रहे हैं। वोटर लिस्ट तैयार होते समय भी सपा नेताओं ने अपनी मनमानी की कोशिश की थी। इसके अलावा चुनाव से ऐन पहले अफसरों की ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर भी दबाव बनाने की शिकायतें आईं थीं। अभी चुनाव में पहले चरण का मतदान भी नहीं हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि चुनाव होने तक इस तरह के मामले और भी सामने आएंगे।
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एसडीएम फतेहाबाद झब्बर प्रसाद को एसीएम तृतीय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसीएम तृतीय जेपी सिंह को फतेहाबाद एसडीएम बनाया गया है। थाना प्रभारी फतेहाबाद हरेंद्र पाल सिंह और थानाध्यक्ष निबोहरा अरविंद कुमार पर भी गाज गिरी है। दोनों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। उधर, सपा सूत्रों का कहना है कि एक मंत्री ने तीनों की शिकायत पहले चुनाव आयोग में की। वहां नहीं चली, तो शासन में बात की। मंत्री का कहना था कि तीनों उनकी बात सुन नहीं रहे हैं। इसके अलावा यह भी आशंका हो गई थी कि तीनों एक अन्य मंत्री की बात को तवज्जो दे रहे हैं। मंत्री की शासन के अफसरों ने सुन ली।
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डीएम पंकज कुमार ने एसडीएम और एसएसपी डाक्टर प्रीतिंदर सिंह ने दोनों थाना प्रभारियों को हटा दिया। इस बारे में एसएसपी का कहना है कि दोनों की शिकायत चुनाव आयोग से की गई थी। दोनों ठीक से काम भी नहीं कर रहे थे। इसलिए हटाया गया है। कोई दबाव या सिफारिश नहीं थी।
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सपा की गुटबाजी से टेंशन में अफसर
यह पहला मौका नहीं है जब सपा नेताओं की गुटबाजी से अफसरों को टेंशन हुई है। इससे पहले भी सपा नेता एक दूसरे का खेल बिगाड़ने के लिए अफसरों पर दबाव बनाते रहे हैं। वोटर लिस्ट तैयार होते समय भी सपा नेताओं ने अपनी मनमानी की कोशिश की थी। इसके अलावा चुनाव से ऐन पहले अफसरों की ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर भी दबाव बनाने की शिकायतें आईं थीं। अभी चुनाव में पहले चरण का मतदान भी नहीं हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि चुनाव होने तक इस तरह के मामले और भी सामने आएंगे।