{"_id":"600db42b8ebc3e340557ca73","slug":"tourism-in-mainpuri-mainpuri-news-agr47787227","type":"story","status":"publish","title_hn":"मैनपुरी में पर्यटन की संभावनाएं हजार, योजनाओं का अब भी इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मैनपुरी में पर्यटन की संभावनाएं हजार, योजनाओं का अब भी इंतजार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैनपुरी। एतिहासिक विरासतों को समेटे मैनपुरी में पर्यटन अब भी विकसित नहीं हो सका है। लोगों को योजनाओं का इंतजार है।
एक साल पहले मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत जिले की चार एतिहासिक विरासतों को पर्यटन के पंख लगने की उम्मीद जगी थी। इसमें प्रत्येक विधानसभा में एक स्थल का चयन किया जाना था।
इसके लिए भोगांव विधानसभा क्षेत्र से प्राचीन लालपुरी बाबा मंदिर, विधानसभा किशनी से समान पक्षी विहार, करहल विधानसभा से मार्कंडेय ऋषि आश्रम और मैनपुरी विधानसभा से पनवा के तालाब का प्रस्ताव दिया गया था। इसके बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब पर्यटन को बढ़ावा देने और इन धरोहरों के संरक्षण के लिए पहल होगी। उनकी ये उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। एक साल बीतने के बाद भी शासन ने न तो कोई धनराशि जारी की और न ही कोई काम शुरू हो सका।
धार्मिक और एतिहासिक दृष्टि अहम
चारों विधानसभाओं में संरक्षण के लिए चुने गए स्थलों का धार्मिक और एतिहासिक महत्व है। बाबा लालपुरी मंदिर में जहां गैर प्रदेशों से भी श्रद्घालु आते हैं तो वहीं मार्कंडेय ऋषि की तपोभूमि का इतिहास महाभारत काल के समान बताया जाता है। समान पक्षी विहार भी रामसर साइट में शामिल हो चुका है।
विज्ञापन
शासन के आदेश पर चारों विधानसभाओं से पूर्व में एतिहासिक स्थलों को विकसित करने के लिए प्रस्ताव भेजे गए थे। जैसा शासन का आदेश होगा, उसके अनुसार कार्य कराया जाएगा।
ईशा प्रिया, सीडीओ।
विज्ञापन
एक साल पहले मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत जिले की चार एतिहासिक विरासतों को पर्यटन के पंख लगने की उम्मीद जगी थी। इसमें प्रत्येक विधानसभा में एक स्थल का चयन किया जाना था।
इसके लिए भोगांव विधानसभा क्षेत्र से प्राचीन लालपुरी बाबा मंदिर, विधानसभा किशनी से समान पक्षी विहार, करहल विधानसभा से मार्कंडेय ऋषि आश्रम और मैनपुरी विधानसभा से पनवा के तालाब का प्रस्ताव दिया गया था। इसके बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब पर्यटन को बढ़ावा देने और इन धरोहरों के संरक्षण के लिए पहल होगी। उनकी ये उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। एक साल बीतने के बाद भी शासन ने न तो कोई धनराशि जारी की और न ही कोई काम शुरू हो सका।
विज्ञापन
धार्मिक और एतिहासिक दृष्टि अहम
चारों विधानसभाओं में संरक्षण के लिए चुने गए स्थलों का धार्मिक और एतिहासिक महत्व है। बाबा लालपुरी मंदिर में जहां गैर प्रदेशों से भी श्रद्घालु आते हैं तो वहीं मार्कंडेय ऋषि की तपोभूमि का इतिहास महाभारत काल के समान बताया जाता है। समान पक्षी विहार भी रामसर साइट में शामिल हो चुका है।
विज्ञापन
शासन के आदेश पर चारों विधानसभाओं से पूर्व में एतिहासिक स्थलों को विकसित करने के लिए प्रस्ताव भेजे गए थे। जैसा शासन का आदेश होगा, उसके अनुसार कार्य कराया जाएगा।
ईशा प्रिया, सीडीओ।