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यमुना एक्सप्रेसवेः रफ्तार के सफर में पल-पल जान का जोखिम, 9 दिन में 13 की हुई मौत
कुशल प्रताप/अमर उजाला मांट (मथुरा)
Updated Fri, 07 Jul 2017 03:26 PM IST
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हादसा
- फोटो : अमर उजाला
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यमुना एक्सप्रेसवे पर रफ्तार का रोमांच लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। बेलगाम स्पीड से दौड़ते वाहन हादसों का सबब बन रहे हैं। इसके अलावा गर्मी के मौसम में भी एक्सप्रेसवे पर वाहनों के टायर फटने का सिलसिला जारी है। बीते नौ दिनों में इस खतरनाक एक्सप्रेसवे पर पांच हादसों में 13 लोगों की मौत हो गई। 19 लोग घायल हैं।
रफ़्तार की इस सड़क अक्सर लोग स्पीड का ध्यान नहीं रखते हैं। ऐसे में गाड़ियों के टायर गर्म होकर फट जाने से अधिकतर हादसे होते हैं। वहीं आवारा जानवर, कोहरा, बेलगाम स्पीड भी हादसों का मुख्य कारण है। मथुरा जिले में 42 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर बीते दस दिनों में हादसों का ग्राफ काफी बड़ गया है। एक दिन भी बिना हादसे के नहीं गुजर रहा है।
आंकडों पर गौर करें तो हर 60वें घंटे में एक्सप्रेसवे पर हादसे में एक मौत हो रही है। 28 जून से लेकर सात जून तक पांच हादसों में 13 लोगों की मौत हो गई और 19 लोग घायल हैं। सबसे अधिक हादसे कारों के टायर फटने से हुए। एक और बड़ी वजह है, चालकों को वाहन चलाते समय नींद आना।
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अमर उजाला की टीम ने जब इस बारे में एक्सप्रेसवे पर एक वाहन चालक से बात की तो उन्होंने बताया की एक्सप्रेसवे पर लोग अक्सर जल्दी अपने गंतव्य पर पहुंचने के लिए फर्राटा भरते हैं। एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के बाद बार-बार गियर और क्लिच नहीं दबाने पड़ते, जिससे चालक को नींद आने लगती है और वाहन अनियंत्रित होकर इधर-उधर रेलिंग से टकरा जाते हैं।
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रफ़्तार की इस सड़क अक्सर लोग स्पीड का ध्यान नहीं रखते हैं। ऐसे में गाड़ियों के टायर गर्म होकर फट जाने से अधिकतर हादसे होते हैं। वहीं आवारा जानवर, कोहरा, बेलगाम स्पीड भी हादसों का मुख्य कारण है। मथुरा जिले में 42 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर बीते दस दिनों में हादसों का ग्राफ काफी बड़ गया है। एक दिन भी बिना हादसे के नहीं गुजर रहा है।
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आंकडों पर गौर करें तो हर 60वें घंटे में एक्सप्रेसवे पर हादसे में एक मौत हो रही है। 28 जून से लेकर सात जून तक पांच हादसों में 13 लोगों की मौत हो गई और 19 लोग घायल हैं। सबसे अधिक हादसे कारों के टायर फटने से हुए। एक और बड़ी वजह है, चालकों को वाहन चलाते समय नींद आना।
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अमर उजाला की टीम ने जब इस बारे में एक्सप्रेसवे पर एक वाहन चालक से बात की तो उन्होंने बताया की एक्सप्रेसवे पर लोग अक्सर जल्दी अपने गंतव्य पर पहुंचने के लिए फर्राटा भरते हैं। एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के बाद बार-बार गियर और क्लिच नहीं दबाने पड़ते, जिससे चालक को नींद आने लगती है और वाहन अनियंत्रित होकर इधर-उधर रेलिंग से टकरा जाते हैं।
बीते नौ दिनों में हुए ये हादसे
हादसा
- फोटो : अमर उजाला
- 7 जुलाई को माइल स्टोन 115 पर ईको कार डिवाडर से टकराई पांच की मौत
- 6 जुलाई को थाना महावन क्षेत्र में कार पलटी पांच घायल
- 3 जुलाई को माइल स्टोन 92 और बाजना कट पर दो हादसों में चार की मौत, दो लोग घायल
- 2 जुलाई को माइलस्टोन 86 पर दो कारें भिड़ीं, तीन घायल
- 28 जून - माइलस्टोन 136 पर स्कोर्पियो कार पलटी, चार की मौत, नौ घायल
- अन्य तीन हादसे और हुए , हालांकि उनमें कोई भी घायल नहीं हुआ
- 6 जुलाई को थाना महावन क्षेत्र में कार पलटी पांच घायल
- 3 जुलाई को माइल स्टोन 92 और बाजना कट पर दो हादसों में चार की मौत, दो लोग घायल
- 2 जुलाई को माइलस्टोन 86 पर दो कारें भिड़ीं, तीन घायल
- 28 जून - माइलस्टोन 136 पर स्कोर्पियो कार पलटी, चार की मौत, नौ घायल
- अन्य तीन हादसे और हुए , हालांकि उनमें कोई भी घायल नहीं हुआ
गति के मानकों की उड़ रही धज्जियां
यमुना एक्सप्रेसवे
- फोटो : अमर उजाला
यमुना एक्सप्रेसवे पर गति सीमा के मानकों को हर दिन वाहनों के पहिये तले रौंदा जा रहा है। छोटे वाहनों की 100 किमी प्रति घंटा और बड़े वाहनों की 60 किलोमीटर प्रति घंटा रफ्तार की सीमा है। इसकी अनदेखी करते हुए सैकड़ों वाहन निर्धारित गति से दूनी गति में फर्राटा भरकर गुजर रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर चालान काटने वाले पुलिसकर्मी भी टोल प्लाजा पर कभी कभार ही नजर आते हैं। जिससे वाहन चालक टोल चुका कर बेधड़क फर्राटा भरते निकल जा रहे हैं। नोएडा से आगरा तक के 165 किलोमीटर लंबे सफर को आरामदेह बनाने वाला यमुना एक्सप्रेस वे अब खूनी एक्सप्रेस वे के रूप में पहचाना जाने लगा है। लचर सुरक्षा इंतजामों से एक्सप्रेस वे पर हादसों का ग्राफ बढ़ा है। मामले में एक्सप्रेसवे पर कॉरिडोर प्रभारी मेजर मनीष सिंह का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर ओवरस्पीड और ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी आरटीओ व ट्रैफिक पुलिस की है। हम रोजाना डाटा उपलब्ध कराते हैं लेकिन पुलिस कार्रवाई नहीं करती।