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Firozabad: अंतिम समय में ली जैनेश्वरी दीक्षा, अन्न- जल तक त्याग दिया...देखें वीडियो

Sun, 25 Aug 2024 05:15 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 25 Aug 2024 05:15 PM IST
सार

फिरोजाबाद के एक चूड़ी व्यापारी का समाधीपूर्वक मरण हुआ। उन्होंने अंतिम समय में जैनेश्वरी दीक्षा ली। उससे पहले ही उन्होंने अन्न-जल त्याग दिया था।

 

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Took Jaineshwari initiation at the last moment gave up even food and water
जैनेश्वरी दीक्षा - फोटो : संवाद

विस्तार

फिरोजाबाद शहर के प्रमुख चूड़ी व्यवसायी एवं प्रमुख समाजसेवी हरिकिशन जैन का जैनेश्वरी दीक्षा के साथ हुआ समाधि मरण । प्रमुख व्यवसायी हरिकिशन जैन पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। ग्रहस्थ जीवन का त्याग करके वह मुनि श्री अमित सागर जी महाराज की शरण में आ गए थे । 
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रविवार को सुबह 7 बजे हरि किशन जैन को जैन मुनि श्री अमित सागर जी महाराज ने जैनेश्वरी दीक्षा दी । उनको नग्न मुनि दीक्षा दी गई। दीक्षा के संस्कार मुनि श्री अमित सागर जी महाराज द्वारा संपन्न कराए गए। हरि किशन जैन चूड़ी व्यवसायी के रूप में  ग्रहस्थ अवस्था में जाने जाते थे उनका जनेश्वरी दीक्षा के बाद नया नाम अन्यत्व सागर दिया गया।
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अंतिम समय में उन्होंने अन्न-जल का त्याग कर दिया था। सभी प्रकार के आहारों का त्याग कर दिया था। जैन समाज के लोगों को जैसे ही दिगंबर संत के समाधि मरण की सूचना मिली काफी संख्या में भक्तजन नसिया जी मंदिर परिसर में एकत्रित हो गए। यहां से उनकी वैराग्य यात्रा निकाली गई । नसिया जी मंदिर से वैराग्य यात्रा शुरू हुई। 

 

अन्यत्व सागर महाराज के ग्रहस्थ अवस्था के भाई एंजिल जैन ने बताया कि उनके परिवार के लिए यह अत्यंत गौरव की बात है कि उनके भाई का समाधि पूर्वक मरण हुआ है । जैनेश्वरी दीक्षा के साथ उन्होंने समाधि ली है। वहीं ब्रह्मचारिणी आरती दीदी ने कहा कि जैन धर्म में समाधि पूर्वक संलेखना पूर्वक मरण मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करता है।

 

 मुनि श्री अमित सागर महाराज की शिष्या ब्रह्मचारिणी सारिका दीदी ने भी समाधि मरण का विशेष महत्व बताया। उन्होंने बताया कि हरिकिशन जैन पिछले काफी समय से अस्वस्थ थे। मुनि श्री अमित सागर महाराज के सानिध्य में नसिया मंदिर के त्यागी व्रती आश्रम में ही कई दिनों से उनके प्रवास कर रहे थे। धार्मिक भावना, त्याग भावना और धर्म के प्रति उनकी रुचि ने उनका समाधि पूर्वक मरण कराया है। 
 
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