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सर्द हवा ने बढ़ाई कान और गले की बीमारी, फूल रहे टौंसिल, चिकित्सकों ने दी सलाह, बरतें ये सावधानियां
Sun, 03 Jan 2021 12:52 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 03 Jan 2021 12:52 PM IST
सार
एसएन मेडिकल कॉलेज के नाक, कान और गला रोग विभागाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि कान और सिर बिना ढके घूमने वालों
और बाइक चलाने वालों के गले में संक्रमण होने लगता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
घर से बाहर जा रहे हैं तो सिर और कान अच्छी तरह ढककर जाएं, ऐसा न करने वाले लोगों में टौंसिल फूलने और गले में सूजन की परेशानी हो रही है। सर्दी में चिकित्सकों के पास ऐेसे मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। एसएन की ओपीडी में ही इसके 25 से 35 मरीज रोज आ रहे हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज के नाक, कान और गला रोग विभागाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि कान और सिर बिना ढके घूमने वालों और बाइक चलाने वालों के गले में संक्रमण होने लगता है। इससे टौंसिल, कान गुम होना, सिर व कान में दर्द की परेशानी होने लगती है। ओपीडी में इस परेशानी के 25 से 35 मरीज आ रहे हैं। अधिकांश युवा और बच्चे हैं। बीते सप्ताह तक 10 से 15 ही ऐसे मरीज आ रहे थे।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस ट्रक से टकराई, चालक सहित दो की मौत
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सर्दी में गले में मौजूद कीटाणु हो जाते हैं प्रभावी: डॉ. आलोक
ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक मित्तल ने बताया कि गले में कीटाणु रहते हैं, जो 20 डिग्री सेल्सियस से पारा कम होने पर ज्यादा प्रभावी होने लगते हैं। इससे गले में खराश, सूजन, दर्द की परेशानी होने लगती है। बीते सात दिनों में मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के नाक, कान और गला रोग विभागाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि कान और सिर बिना ढके घूमने वालों और बाइक चलाने वालों के गले में संक्रमण होने लगता है। इससे टौंसिल, कान गुम होना, सिर व कान में दर्द की परेशानी होने लगती है। ओपीडी में इस परेशानी के 25 से 35 मरीज आ रहे हैं। अधिकांश युवा और बच्चे हैं। बीते सप्ताह तक 10 से 15 ही ऐसे मरीज आ रहे थे।
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सर्दी में गले में मौजूद कीटाणु हो जाते हैं प्रभावी: डॉ. आलोक
ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक मित्तल ने बताया कि गले में कीटाणु रहते हैं, जो 20 डिग्री सेल्सियस से पारा कम होने पर ज्यादा प्रभावी होने लगते हैं। इससे गले में खराश, सूजन, दर्द की परेशानी होने लगती है। बीते सात दिनों में मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है।
इस मौसम में हृदयाघात का खतरा: डॉ. राजकुमार गुप्ता
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजकुमार गुप्ता ने बताया कि इस मौसम में अचानक हृदयाघात होने का खतरा अधिक है। मधुमेह-हृदय और उच्च रक्तचाप के मरीज दवाएं बंद न करें। इनसे पीड़ित महिलाएं नाश्ता करने के बाद ही घर का कार्य करें। सांस लेने और सीने में जकड़न-दर्द पर चिकित्सकों को दिखाएं।
देहात के बच्चों में निमोनिया ज्यादा मिल रहा: डॉ. अरुण जैन
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण जैन ने बताया कि बीते पांच-सात दिन में निमोनिया, बुखार, खांसी, जुकाम के 70 फीसदी मरीज बढ़े हैं। खासतौर से ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में निमोनिया ज्यादा मिल रहा है। वहां सर्दी अधिक होना और देखभाल में लापरवाही इसकी वजह है।
ये बरतें सावधानी
- गुनगना पानी पीएं, नमक के पानी से गरारे करें।
- हर्बल चाय व दूध पीएं, गुड़, चना और मूंगफली खाएं।
- धूप निकलने के बाद ही टहलें, बीमार लोग छत पर टहलें।
- कान-नाक ढककर रखें, बच्चों को धूप निकलने पर ही बाहर खेलने दें।
- बीपी, मधुमेह की जांच कराएं, नाश्ता करने के बाद ही घर से निकलें।
- खाने में संतरा, आंवला, नींबू का इस्तेमाल करें।
(जैसा एसएन कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. टीपी सिंह ने बताया।)
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजकुमार गुप्ता ने बताया कि इस मौसम में अचानक हृदयाघात होने का खतरा अधिक है। मधुमेह-हृदय और उच्च रक्तचाप के मरीज दवाएं बंद न करें। इनसे पीड़ित महिलाएं नाश्ता करने के बाद ही घर का कार्य करें। सांस लेने और सीने में जकड़न-दर्द पर चिकित्सकों को दिखाएं।
देहात के बच्चों में निमोनिया ज्यादा मिल रहा: डॉ. अरुण जैन
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण जैन ने बताया कि बीते पांच-सात दिन में निमोनिया, बुखार, खांसी, जुकाम के 70 फीसदी मरीज बढ़े हैं। खासतौर से ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में निमोनिया ज्यादा मिल रहा है। वहां सर्दी अधिक होना और देखभाल में लापरवाही इसकी वजह है।
ये बरतें सावधानी
- गुनगना पानी पीएं, नमक के पानी से गरारे करें।
- हर्बल चाय व दूध पीएं, गुड़, चना और मूंगफली खाएं।
- धूप निकलने के बाद ही टहलें, बीमार लोग छत पर टहलें।
- कान-नाक ढककर रखें, बच्चों को धूप निकलने पर ही बाहर खेलने दें।
- बीपी, मधुमेह की जांच कराएं, नाश्ता करने के बाद ही घर से निकलें।
- खाने में संतरा, आंवला, नींबू का इस्तेमाल करें।
(जैसा एसएन कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. टीपी सिंह ने बताया।)