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लापरवाही- शौचालय के लिए 1869 परिवार पाए गए अपात्र, सत्यापन में खुली पोल
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कासगंज। ग्राम पंचायतों में प्रधान व सचिवों की घोर लापरवाही से बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। शौचालय के लिए अपात्रों को सूची में शामिल कर लिया। सत्यापन में इस गड़बड़ झाले की कलई खुल गई। 1869 परिवार सत्यापन के बाद अपात्र पाए गए हैं। पंचायती राज विभाग ने सत्यापन रिपोर्ट के बाद अपात्रों को सूची से हटा दिया है। संबंधित पंचायतों के सचिवों से जवाब तलब किया है।
सरकार ग्राम पंचायतों में सभी पात्र परिवारों को शौचालय उपलब्ध करा रही हैं। जिससे स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच मुक्त भारत का सपना पूरा हो सके। शौचालय की पात्रता सूची ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव तैयार करते हैं, लेकिन इसमें अपात्रों को भी शामिल कर लिया है। शौचालय सर्वे का सत्यापन कराया तो पता चला 1869 परिवार ऐसे हैं जो शौचालय के लिए पात्र नहीं हैं। इन अपात्रों को भी सूची में शामिल कर शौचालय का लाभ देने का प्रयास किया गया। प्रशासन की सक्रियता से सरकारी खजाने को लाखों रुपये की चपत लगते लगते बच गई है। पंचायती राज विभाग ने सभी अपात्रों को सूची से हटाते हुए पंचायत सचिवों से जवाब तलब किया है।
सरकारी खजाने को लगते लगते बची 2.24 करोड़ रुपये की चपत
कासगंज। शौचालय के लिए 12 हजार रुपये प्रति परिवार के हिसाब से धनराशि दी जाती है। 1869 अपात्र परिवारों को यदि शौचालय का लाभ मिल जाता तो 2.24 करोड़ रुपये की धनराशि सरकारी खजाने से कम हो जाती ओर सरकारी कोष में बड़ी हानि होती।
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सरकार ग्राम पंचायतों में सभी पात्र परिवारों को शौचालय उपलब्ध करा रही हैं। जिससे स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच मुक्त भारत का सपना पूरा हो सके। शौचालय की पात्रता सूची ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव तैयार करते हैं, लेकिन इसमें अपात्रों को भी शामिल कर लिया है। शौचालय सर्वे का सत्यापन कराया तो पता चला 1869 परिवार ऐसे हैं जो शौचालय के लिए पात्र नहीं हैं। इन अपात्रों को भी सूची में शामिल कर शौचालय का लाभ देने का प्रयास किया गया। प्रशासन की सक्रियता से सरकारी खजाने को लाखों रुपये की चपत लगते लगते बच गई है। पंचायती राज विभाग ने सभी अपात्रों को सूची से हटाते हुए पंचायत सचिवों से जवाब तलब किया है।
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सरकारी खजाने को लगते लगते बची 2.24 करोड़ रुपये की चपत
कासगंज। शौचालय के लिए 12 हजार रुपये प्रति परिवार के हिसाब से धनराशि दी जाती है। 1869 अपात्र परिवारों को यदि शौचालय का लाभ मिल जाता तो 2.24 करोड़ रुपये की धनराशि सरकारी खजाने से कम हो जाती ओर सरकारी कोष में बड़ी हानि होती।
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