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Health News: 14 की उम्र में शुरू हुई आदत, 40 में कैंसर; तंबाकू पर आगरा की डरावनी रिपोर्ट
Sun, 31 May 2026 10:37 AM IST
Dhirendra Singh
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sun, 31 May 2026 10:37 AM IST
सार
एसएन मेडिकल कॉलेज के अध्ययन में सामने आया है कि 614 मरीजों में से 77% तंबाकू (गुटखा, खैनी, सिगरेट) के आदी थे, जिससे उनमें मुंह, गले और फेफड़ों का कैंसर पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार कम उम्र में शुरू हुई यह आदत गंभीर रूप ले रही है और अधिकतर मरीज अंतिम स्टेज में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
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तंबाकू।
विस्तार
अरे, एक कश में कुछ नहीं होता। दो दाने खाकर तो देखो...मजा आ जाएगा। ऐसे ही शौकिया तंबाकू-सिगरेट शुरू की, फिर चस्का लगा और 8-10 साल में एक पाउच से संख्या बढ़कर प्रतिदिन तंबाकू के 6-10 पाउच तक पहुंच गई। एसएन मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभाग की ओर से 614 मरीजों (126 महिला और 488) पर किए गए अध्ययन में 77 फीसदी तंबाकू (गुटखा, खैनी) के लती मिले, जो रोजाना 6-10 पाउच तंबाकू खाने वाले थे। नतीजतन, जीभ-गाल और फेफड़े में कैंसर बन गया।
अध्ययय में शामिल 26.3 फीसदी लोग (143) बीडी-सिगरेट और 25.1 फीसदी (154) दोनों का उपयोग करते थे। इनमें 40 साल से कम उम्र के 31 फीसदी मरीज रहे। 16 फीसदी में गुटखा और 27 फीसदी में बीडी-सिगरेट का शौक मिला। इन लोगों ने 14-18 की उम्र में पहली बार तंबाकू-सिगरेट का सेवन शुरू किया था। इसके बाद लत लग गई। 77 फीसदी मरीज रोजाना गुटखा के 6-10 पाउच खाने लगे। इनमें 35.3 फीसदी में गाल, 25.7 फीसदी में जीभ का कैंसर मिला, बाकी में फेफड़े समेत अन्य कैंसर से पीड़ित मिले। 65 फीसदी कैंसर की अंतिम स्टेज पर पहुंच गए।
तंबाकू में 60 अधिक खतरनाक तत्व, 19 तरह के कैंसर
एसएन के कैंसर रोग विभाग की डॉ. सुरभि गुप्ता ने बताया कि तंबाकू में 60 से अधिक तत्व कैंसरकारक होते हैं। तंबाकू में टार, बेंजीन, आर्सेनिक, फॉर्मलाडेहाइड, नाइट्रोसामाइन सबसे ज्यादा खतरनाक हैं। ये कोशिकाओं और डीएनए को प्रभावित कर सीधे नुकसान पहुंचाते हैं। दरअसल, इनमें पाया जाने वाला निकोटिन इसकी लत लगाता है, जिससे लोग इसकी गिरफ्त में आने लगते हैं। 614 मरीजों के अध्ययन में तंबाकू से फेफड़े, मुंह, गले, भोजन नली, पेशाब थैली, खाने की थैली समेत 19 तरह के कैंसर की पहचान हुए।
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25-30 साल के 10 फीसदी मरीज
कैंसर सर्जन डॉ. नरेंद्र देव ने बताया कि युवाओं में तंबाकू-धूम्रपान की लत तेजी से बढ़ रही है। इनमें अस्थमा, सांस रोग, टीबी, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, हाथ-पैरों की नलिकाएं सिकुड़ना, गैंग्रीन, स्ट्रोक का खतरा रहता है। शुक्राणुओं-अंडाणुओं पर भी प्रभाव पड़ रहा है, जिससे महिला-पुरुषों की प्रजनन क्षमता भी कम हो रही है। कैंसर के कुल मरीजों में 25-30 साल के 10 फीसदी हैं। इनमें 8 फीसदी अंतिम स्टेज पर इलाज कराने आते हैं। तंबाकू निर्मित उत्पाद से दूरी ही इस बीमारी का बचाव है।
कैंसर के लक्षण
मुंह कम खुलना, मुंह सफेद-लाल रंग का होना। धब्बे बनना।
तंबाकू खाने वालों के मुंह में खड़ी तीन अंगुलियों नहीं जाना।
जीभ-मुंह के किसी हिस्से में दर्द रहना, सुन्न महसूस होना।
घाव-छाले ठीक न होना, निगलने में दिक्कत।
मुंह, मसूड़े, गर्दन में गांठ उभरना, सूजन महसूस करना।
खांसी रहना, दर्द रहना और आवाज बंद होना, बदलना।
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अध्ययय में शामिल 26.3 फीसदी लोग (143) बीडी-सिगरेट और 25.1 फीसदी (154) दोनों का उपयोग करते थे। इनमें 40 साल से कम उम्र के 31 फीसदी मरीज रहे। 16 फीसदी में गुटखा और 27 फीसदी में बीडी-सिगरेट का शौक मिला। इन लोगों ने 14-18 की उम्र में पहली बार तंबाकू-सिगरेट का सेवन शुरू किया था। इसके बाद लत लग गई। 77 फीसदी मरीज रोजाना गुटखा के 6-10 पाउच खाने लगे। इनमें 35.3 फीसदी में गाल, 25.7 फीसदी में जीभ का कैंसर मिला, बाकी में फेफड़े समेत अन्य कैंसर से पीड़ित मिले। 65 फीसदी कैंसर की अंतिम स्टेज पर पहुंच गए।
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तंबाकू में 60 अधिक खतरनाक तत्व, 19 तरह के कैंसर
एसएन के कैंसर रोग विभाग की डॉ. सुरभि गुप्ता ने बताया कि तंबाकू में 60 से अधिक तत्व कैंसरकारक होते हैं। तंबाकू में टार, बेंजीन, आर्सेनिक, फॉर्मलाडेहाइड, नाइट्रोसामाइन सबसे ज्यादा खतरनाक हैं। ये कोशिकाओं और डीएनए को प्रभावित कर सीधे नुकसान पहुंचाते हैं। दरअसल, इनमें पाया जाने वाला निकोटिन इसकी लत लगाता है, जिससे लोग इसकी गिरफ्त में आने लगते हैं। 614 मरीजों के अध्ययन में तंबाकू से फेफड़े, मुंह, गले, भोजन नली, पेशाब थैली, खाने की थैली समेत 19 तरह के कैंसर की पहचान हुए।
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25-30 साल के 10 फीसदी मरीज
कैंसर सर्जन डॉ. नरेंद्र देव ने बताया कि युवाओं में तंबाकू-धूम्रपान की लत तेजी से बढ़ रही है। इनमें अस्थमा, सांस रोग, टीबी, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, हाथ-पैरों की नलिकाएं सिकुड़ना, गैंग्रीन, स्ट्रोक का खतरा रहता है। शुक्राणुओं-अंडाणुओं पर भी प्रभाव पड़ रहा है, जिससे महिला-पुरुषों की प्रजनन क्षमता भी कम हो रही है। कैंसर के कुल मरीजों में 25-30 साल के 10 फीसदी हैं। इनमें 8 फीसदी अंतिम स्टेज पर इलाज कराने आते हैं। तंबाकू निर्मित उत्पाद से दूरी ही इस बीमारी का बचाव है।
कैंसर के लक्षण
मुंह कम खुलना, मुंह सफेद-लाल रंग का होना। धब्बे बनना।
तंबाकू खाने वालों के मुंह में खड़ी तीन अंगुलियों नहीं जाना।
जीभ-मुंह के किसी हिस्से में दर्द रहना, सुन्न महसूस होना।
घाव-छाले ठीक न होना, निगलने में दिक्कत।
मुंह, मसूड़े, गर्दन में गांठ उभरना, सूजन महसूस करना।
खांसी रहना, दर्द रहना और आवाज बंद होना, बदलना।