उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को किससे मिली प्रेरणा, जो अंबेडकर से 'आंबेडकर' किया नाम
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आगरा का विश्वविद्यालय उन दिनों नाम बदलने के मामले में चर्चा में था। दरअसल आगरा के डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के नाम में संशोधन किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन को 'अंबेडकर' की जगह 'आंबेडकर' लिखे जाने के आदेश दिए गए। ये आदेश राज्यपाल राम नाईक ने दिए थे।
इस नाम को सही या बदलने के पीछे किसकी प्रेरणा थी? इसका राज मंगलवार को आगरा के डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय परिसर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा अनावरण के आयोजन के दौरान खुला। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक ने स्वयं नाम सही करने के पीछे की पूरी कहानी बताई, जिसकी प्रेरणा से नाम सही कराया।
राज्यपाल नाईक ने इसका पूरा श्रेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय को दिया। उन्होंने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय हमेशा कहते थे, जो काम करो, सही से करो। इसी प्रेरणा से डा. भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी का नाम सही लिखा। इसके लिए संविधान की आठवीं अनुसूची की मूलप्रति का अवलोकन किया गया, जिसमें अपने नाम के हस्ताक्षर में आंबेडकर लिखा है।
राज्यपाल राम नाईक ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर भी कुछ बातें कहीं। बताया कि डा. भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी के छात्र रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय का दर्शन आज भी प्रासंगिक हैं। कारण कुछ भी हो, लेकिन आगरा में पंडित दीनदयाल संस्थान बन्द हुआ।
इसे कुलपति ने फिर से शुरू किया। अब पंडित दीनदयाल ग्राम्य संस्थान की नई इमारत भी बनी है। यहां शोध होगा, उनके विचारों के प्रसार होगा। मुझे पंडितजी के साथ विचार विनिमय का सौभाग्य मिला। जीवन के अंतिम भाषण में उन्होंने जो कहा, आज के वर्तमान में ऐसे लगता है कि वह प्रासंगिक है।