आगरा: एसएन में ब्लैक फंगस के तीन और संदिग्ध भर्ती, जिन मरीजों को ऑक्सीजन नहीं दी गई उन्हें भी संक्रमण
एसएन मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के कुल मरीजों की संख्या 20 पर पहुंच गई है। दो नए मरीजों में अभी शुरुआती लक्षण हैं, जबकि दो मरीजों का ऑपरेशन किया गया।
विस्तार
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में रविवार को ब्लैक फंगस के तीन नए मामले आए। दो मरीज जिले के ही हैं। इनका निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। इन मरीजों के साथ रविवार की रात साढ़े नौ बजे तक एसएन मेडिकल कॉलेज में पहुंचे ब्लैक फंगस के मरीजों की कुल संख्या 20 पहुंच गई। इसमें से दो गंभीर मरीजों की शनिवार रात मौत भी हो गई।
ब्लैक फंगस वार्ड के प्रभारी डॉ. अखिल प्रताप ने बताया कि रविवार को भर्ती हुए मरीजों में ब्लैक फंगस के अभी शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं। इनके ठीक होने की संभावना अधिक है। ईएनटी विभाग में रविवार को एक और ब्लैक फंगस के मरीज का ऑपरेशन किया गया। नाक व मुंह से फंगस को निकाला गया। गंदगी की सफाई की गई। नमूना जांच के लिए लैब भेजा गया है।
डॉ. अखिल प्रताप का कहना है कि मरीज में ब्लैक फंगस के साफ लक्षण हैं, इसमें संदेह की स्थिति नहीं है। ऑपरेशन शनिवार को ही होना था, पहले घरवाले ऑपरेशन कराने के लिए तैयार नहीं थे, शाम को सहमति दी। मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में चार मरीजों का ऑपरेशन किया जा चुका है। सभी की स्थिति फिलहाल ठीक है।
दो और मरीज का आज ऑपरेशन किया जाएगा
डॉ. अखिल प्रताप ने बताया कि ब्लैक फंगस के दो और संदिग्ध मरीज का सोमवार को ईएनटी विभाग में ऑपरेशन किया जाएगा। उनका कहना है कि ब्लैक फंगस के प्रति जागरूक रहकर मरीज गंभीर स्थिति में पहुंचने से बच सकते हैं। शुरुआती लक्षण दिखने पर ही चिकित्सक को दिखाना चाहिए। देरी करना भारी पड़ जाएगा।
सारे मरीज 40 वर्ष से अधिक उम्र के
एसएन मेडिकल कॉलेज में अब तक कुल 19 मरीज आ चुके हैं। सभी मरीजों की उम्र 40 वर्ष से अधिक ही रही है। रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक कम होने पर लोग इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
जिन मरीजों को ऑक्सीजन नहीं दी गई उन्हें भी ब्लैक फंगस
ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या बढ़ने के पीछे चिकित्सक इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन का इस्तेमाल भी मान रहे हैं। हालांकि एसएन मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के दो ऐसे मरीज भी भर्ती हैं, जिनको कभी ऑक्सीजन लगा ही नहीं है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला का कहना है कि ब्लैक फंगस के कई कारक जिम्मेदार हैं। इसमें कोरोना संक्रमण खुद बड़ा कारण है। इसके अलावा इंडस्ट्रियल सिलिंडर का इस्तेमाल, स्टेरॉइड, डायबिटीज भी वजहें हो सकती हैं।
कोरोना संक्रमण से ठीक हुए मरीजों में ब्लैक फंगस मिल रहा है। अभी तक ब्लैक फंगस के जितने भी मरीज एसएन में भर्ती हैं, वह बाहर से आए हुए हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमण का इलाज कराने वाले मरीजों में अभी तक ब्लैक फंगस की शिकायत नहीं आई है।