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राजधानी स्वीट्स के तीन नमूने जांच में निकले हानिकारक
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मैनपुरी। शहर के स्टेशन रोड स्थित राजधानी स्वीट्स से लिए गए खाद्य पदार्थों के तीन नमूने जांच में हानिकारक पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। जल्द ही राजधानी स्वीट्स के संचालक के विरुद्ध एसीजेएम प्रथम के न्यायालय में मुकदमा दायर किया जाएगा।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता बनाए रखने और मिलावट रोकने के लिए नमूने भरे जाते हैं। ये नमूने जांच के लिए राज्य प्रयोगशाला भेजे जाते है। शहर के स्टेशन रोड स्थित राजधानी स्वीट्स से कुछ दिन पूर्व खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने चिली पोटेटो, चिली चटनी और मंचूरियन के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे थे। रिपोर्ट आई तो ये नमूने जांच में हानिकारक पाए गए। इनमें अखाद्य रंगों की मिलावट की गई थी। ये रंग मानव शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। रिपोर्ट आने के बाद विभाग कार्रवाई की तैयारी में लग गया है। जल्द ही एसीजेएम प्रथम न्यायालय में राजधानी स्वीट्स के संचालक मोहित चौहान के खिलाफ मुकदमा दायर किया जाएगा।
कार्सिनोजेनिक होते हैं रंग
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी रामसुंदर पटेल ने बताया कि खाद्य पदार्थों में प्रयोग होने वाले रंग कार्सिनोजेनिक होते हैं। इसकी अत्यधिक मात्रा के सेवन से शरीर में कैंसर भी हो सकता है। उन्होंने लोगों से रंगीन मिठाइयां, फिंगर चिप्स और अनब्रांडेड रंगीन चटनी से भी परहेज करने की अपील की है।
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जुर्माना और कारावास का है प्रावधान
हानिकारक पाए जाने वाले खाद्य पदार्थों के लिए एसीजेएम प्रथम न्यायालय में मुकदमा दायर किया जाता है। एक्ट के अनुसार इसके लिए विक्रेता को जुर्माना या कारावास अथवा दोनों की सजा सुनाई जा सकती है। वहीं अधोमानक पाए जाने वाले नमूनों में अपर जिलाधिकारी द्वारा केवल जुर्माना किया जाता है।
राजधानी स्वीट्स के तीन नमूने जांच में हानिकारक पाए गए हैं। इनमें रंगों की मिलावट की गई थी। विक्रेता के विरुद्ध न्यायालय में वाद दायर किया जाएगा।
-डॉ. टीआर रावत, अभिहित अधिकारी।
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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता बनाए रखने और मिलावट रोकने के लिए नमूने भरे जाते हैं। ये नमूने जांच के लिए राज्य प्रयोगशाला भेजे जाते है। शहर के स्टेशन रोड स्थित राजधानी स्वीट्स से कुछ दिन पूर्व खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने चिली पोटेटो, चिली चटनी और मंचूरियन के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे थे। रिपोर्ट आई तो ये नमूने जांच में हानिकारक पाए गए। इनमें अखाद्य रंगों की मिलावट की गई थी। ये रंग मानव शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। रिपोर्ट आने के बाद विभाग कार्रवाई की तैयारी में लग गया है। जल्द ही एसीजेएम प्रथम न्यायालय में राजधानी स्वीट्स के संचालक मोहित चौहान के खिलाफ मुकदमा दायर किया जाएगा।
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कार्सिनोजेनिक होते हैं रंग
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी रामसुंदर पटेल ने बताया कि खाद्य पदार्थों में प्रयोग होने वाले रंग कार्सिनोजेनिक होते हैं। इसकी अत्यधिक मात्रा के सेवन से शरीर में कैंसर भी हो सकता है। उन्होंने लोगों से रंगीन मिठाइयां, फिंगर चिप्स और अनब्रांडेड रंगीन चटनी से भी परहेज करने की अपील की है।
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जुर्माना और कारावास का है प्रावधान
हानिकारक पाए जाने वाले खाद्य पदार्थों के लिए एसीजेएम प्रथम न्यायालय में मुकदमा दायर किया जाता है। एक्ट के अनुसार इसके लिए विक्रेता को जुर्माना या कारावास अथवा दोनों की सजा सुनाई जा सकती है। वहीं अधोमानक पाए जाने वाले नमूनों में अपर जिलाधिकारी द्वारा केवल जुर्माना किया जाता है।
राजधानी स्वीट्स के तीन नमूने जांच में हानिकारक पाए गए हैं। इनमें रंगों की मिलावट की गई थी। विक्रेता के विरुद्ध न्यायालय में वाद दायर किया जाएगा।
-डॉ. टीआर रावत, अभिहित अधिकारी।