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स्टिंग ऑपरेशन में फंसे इंस्पेक्टर व दो दरोगा सस्पेंड, फर्जी एनकाउंटर की बात आई थी सामने

Tue, 07 Aug 2018 12:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Tue, 07 Aug 2018 12:14 PM IST
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three policeman suspended after sting operation of fake encounter
प्रतीकात्मक तस्वीर
आगरा में एक न्यूज चैनल की ओर से किए गए स्टिंग ऑपरेशन में फंसे तीन पुलिसकर्मी निलंबित कर दिए गए हैं। इनमें बसई जगनेर थाना का इंस्पेक्टर जगदंबा सिंह और दरोगा बलवीर सिंह, चित्राहट थाना का दरोगा सर्वेश कुमार है। इन पर आरोप है कि इन्होंने पुलिस की छवि धूमिल की।
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इन पर कार्रवाई के लिए डीजीपी ओपी सिंह ने एसएसपी अमित पाठक को निर्देश दिए। एसएसपी ने निलंबन का आदेश जारी कर दिया। जगदंबा सिंह कई थानों का प्रभारी रह चुका है। वो आगरा शहर में लोहामंडी थाना का इंस्पेक्टर भी रहा है। 
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इससे पहले हरीपर्वत थाना की चौकी टीपी नगर पर था। फिलहाल कुछ समय से देहात के थानों में है। बलवीर सिंह और सर्वेश कुमार काफी समय से देहात में हैं। अगर जांच में ये पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं तो इनके खिलाफ केस भी दर्ज हो सकता है।
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जिले में सामने आ चुके हैं फर्जी मामले

जिले की पुलिस कई बार फर्जीवाड़ा कर चुकी है। 15 दिन पहले ही कोर्ट ने दरोगा के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए थे। यह मामला बाह से युवक के अपहरण का था। पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ दिखाकर बेकुसूर युवक को जेल भेजा था। कमला नगर के एक कारोबारी पर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट तक लगा दिया था।

..तो हत्या कर सकता है पुलिसवाला 

स्टिंग ऑपरेशन में जो दिखाया गया है, वो सच है या झूठ, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन अगर यह सच निकला तो पूरे महकमे को शर्मसार करने वाला है। निलंबित किए गए तीन पुलिसकर्मियों में से एक कहता नजर आ रहा है, थाना प्रभारी का पद ही ऐसा है, इसके लिए कोई हत्या तक कर सकता है। इनकी बातें सुनकर अधिकारी हैरान रह गए।

एक पुलिसकर्मी के बोल हैं, स्मैक लगाने के 2.5 लाख लूंगा, लेकिन फर्जी एनकाउंटर चार लाख में नहीं, पांच से छह लाख में करूंगा। एक पुलिसकर्मी यह भी कह रहा है कि जब फर्जी एनकाउंटर होता, तो जांच होती है, हर कदम पर पैसा दिया जाता है। वो एक तरह से जांच अधिकारियों को भ्रष्ट ठहरा रहा है।

कुल मिलाकर इस पूरी कहानी में ऐसा लगता है जैसे धाराएं बिक रही हैं, पैसा दो, जो मर्जी लगवा लो, हथकड़ी नीलाम की जा रही है, जेब भरो, किसी के हाथ में भी लगवा लो।

एक भी बदमाश नहीं मरा पुलिस की गोली से

एक हकीकत यह भी है कि इस जिले में पिछले दो साल में पुलिस की गोली से एक भी बदमाश नहीं मरा है। मुठभेड़ हुई हैं, बदमाशों को गोली लगी है, वे घायल हुए हैं, लेकिन किसी की जान नहीं गई। इस अवधि में दो पुलिसवाले मुठभेड़ में शहीद हुए हैं। ऐसे जिले के पुलिसवाले मुठभेड़ में किसी की जान लेने की बात कह रहे हैं।
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