जेल से मिली ‘आजादी’ तो निकले आंसू: सुप्रीम कोर्ट से बरी पिता-पुत्र और रिश्तेदार हुए रिहा, छह लोगों की हत्या का था आरोप
बुलंदशहर में हुए सामूहिक हत्याकांड में निचली अदालत ने पिता-पुत्र सहित तीन आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी सजा की पुष्टि की थी। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों को बरी कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों पर मामले को साबित करने में पूरी तरह से विफल रहा।
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बुलंदशहर के थाना नरौरा के पिलखना में ईंट भट्ठा संचालक मौसम खां सहित छह लोगों की हत्या के आरोप में उनके बेटे मोमीन खां, भतीजे जयकम खां और इनके बेटे साजिद सुप्रीम कोर्ट से बरी होने पर शनिवार को आगरा केंद्रीय कारागार से रिहा हो गए। कारागार से बाहर आते ही तीनों की आंखों से आंसू निकल पड़े। परिजनों ने तीनों को गले से लगा लिया। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिला। अब उन्हें कोई हत्यारा नहीं कहेगा। अब नए सिरे जिंदगी शुरू होगी। परिवार का साथ मिलेगा।
23 जनवरी 2014 को हुआ था सामूहिक हत्याकांड
घटना 23 जनवरी 2014 की है। बुलंदशहर के थाना नरौरा के गांव पिलखना में ईंट भट्ठा मालिक मौसम खां, उनकी पत्नी असगरी, बेटा शौकीन, बहू सन्नो, इनके दो बच्चों समद और मुस्कान की हत्या की गई थी। पुलिस ने मौसम खां के बेटे मोमीन खां, उसकी पत्नी नाजरा, भतीजे जयकम खां और बेटे साजिद को गिरफ्तार किया था। सेशन कोर्ट से चारों को फांसी की सजा हुई। इलाहाबाद हाईकोर्ट से नाजरा बरी हो गई। बाकी तीनों की सजा बरकरार रखी गई। तीनों दोषियों को सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया। वह केंद्रीय कारागार में निरुद्ध थे।
जेल के गेट पर जयकम खां की पत्नी हसमतिया, बेटा जाकिर, साला बशरुद्दीन और दो साल का नाती नूर आलम आए थे। जयकम खां और साजिद का कहना था कि लगभग आठ साल सजा के काटने पड़े। उन्हें न्याय की उम्मीद थी। साजिद का कहना था कि वह हर दिन धार्मिक पुस्तकें पढ़ता था। यह नहीं सोचते थे कि उन्हें फांसी की सजा हुई है। बस एक ही उम्मीद थी कि न्याय मिलेगा।
पुलिस ने निर्दोष फंसाए थे पति और बेटा
हसमतिया का कहना था कि उनके पति जयकम और बेटे साजिद निर्दोष थे। कुछ लोगों के कहने पर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, जबकि वो निर्दोष थे। उनके पति और बेटे को लगभग आठ साल जेल की सलाखों के पीछे काटने पड़े। पति और बेटे को अभी घर नहीं ले जाएंगे। उन्हें रिश्तेदारों के घर में ही रखेंगे।
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सुप्रीम कोर्ट ने की थी यह टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में निचली अदालत के निष्कर्षों पर आश्चर्य व्यक्त किया। एक पैराग्राफ का जिक्र करते हुए पीठ ने कहा, एक कहानी के तौर में यह पढ़ने में तो दिलचस्प है लेकिन सभी टिप्पणियां अनुमानों पर हैं। कोई सुबूत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट से अपेक्षा की जाती है कि वे आरोपी को मौत की सजा देते समय गहनता से परीक्षण करें और सावधानी बरतें।