फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   three person acquitted by Supreme Court got release from central jail agra

जेल से मिली ‘आजादी’ तो निकले आंसू: सुप्रीम कोर्ट से बरी पिता-पुत्र और रिश्तेदार हुए रिहा, छह लोगों की हत्या का था आरोप

Sat, 18 Dec 2021 05:34 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 18 Dec 2021 05:34 PM IST
सार

बुलंदशहर में हुए सामूहिक हत्याकांड में निचली अदालत ने पिता-पुत्र सहित तीन आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी सजा की पुष्टि की थी। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों को बरी कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों पर मामले को साबित करने में पूरी तरह से विफल रहा।

विज्ञापन
three person acquitted by Supreme Court got release from central jail agra
जेल से रिहा हुए जयकम खान, साजिद और मोमिन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बुलंदशहर के थाना नरौरा के पिलखना में ईंट भट्ठा संचालक मौसम खां सहित छह लोगों की हत्या के आरोप में उनके बेटे मोमीन खां, भतीजे जयकम खां और इनके बेटे साजिद सुप्रीम कोर्ट से बरी होने पर शनिवार को आगरा केंद्रीय कारागार से रिहा हो गए। कारागार से बाहर आते ही तीनों की आंखों से आंसू निकल पड़े। परिजनों ने तीनों को गले से लगा लिया। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिला। अब उन्हें कोई हत्यारा नहीं कहेगा। अब नए सिरे जिंदगी शुरू होगी। परिवार का साथ मिलेगा।

विज्ञापन

23 जनवरी 2014 को हुआ था सामूहिक हत्याकांड
घटना 23 जनवरी 2014 की है। बुलंदशहर के थाना नरौरा के गांव पिलखना में ईंट भट्ठा मालिक मौसम खां, उनकी पत्नी असगरी, बेटा शौकीन, बहू सन्नो, इनके दो बच्चों समद और मुस्कान की हत्या की गई थी। पुलिस ने मौसम खां के बेटे मोमीन खां, उसकी पत्नी नाजरा, भतीजे जयकम खां और बेटे साजिद को गिरफ्तार किया था। सेशन कोर्ट से चारों को फांसी की सजा हुई। इलाहाबाद हाईकोर्ट से नाजरा बरी हो गई। बाकी तीनों की सजा बरकरार रखी गई। तीनों दोषियों को सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया। वह केंद्रीय कारागार में निरुद्ध थे। 
विज्ञापन

जेल के गेट पर जयकम खां की पत्नी हसमतिया, बेटा जाकिर, साला बशरुद्दीन और दो साल का नाती नूर आलम आए थे। जयकम खां और साजिद का कहना था कि लगभग आठ साल सजा के काटने पड़े। उन्हें न्याय की उम्मीद थी। साजिद का कहना था कि वह हर दिन धार्मिक पुस्तकें पढ़ता था। यह नहीं सोचते थे कि उन्हें फांसी की सजा हुई है। बस एक ही उम्मीद थी कि न्याय मिलेगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

पुलिस ने निर्दोष फंसाए थे पति और बेटा
हसमतिया का कहना था कि उनके पति जयकम और बेटे साजिद निर्दोष थे। कुछ लोगों के कहने पर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, जबकि वो निर्दोष थे। उनके पति और बेटे को लगभग आठ साल जेल की सलाखों के पीछे काटने पड़े। पति और बेटे को अभी घर नहीं ले जाएंगे। उन्हें रिश्तेदारों के घर में ही रखेंगे।

जाकिर नाईक पर शिकंजा: आईआरएफ के खिलाफ कानूनी लड़ाई को धार, बड़े वकीलों की टीम तैयार

सुप्रीम कोर्ट ने की थी यह टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में निचली अदालत के निष्कर्षों पर आश्चर्य व्यक्त किया। एक पैराग्राफ का जिक्र करते हुए पीठ ने कहा, एक कहानी के तौर में यह पढ़ने में तो दिलचस्प है लेकिन सभी टिप्पणियां अनुमानों पर हैं। कोई सुबूत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट से अपेक्षा की जाती है कि वे आरोपी को मौत की सजा देते समय गहनता से परीक्षण करें और सावधानी बरतें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed