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जाकिर नाईक पर शिकंजा: आईआरएफ के खिलाफ कानूनी लड़ाई को धार, बड़े वकीलों की टीम तैयार

Sat, 18 Dec 2021 04:51 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Sat, 18 Dec 2021 04:51 PM IST
सार

गृह मंत्रालय ने 13 दिसंबर 2021 को एक नोटिफिकेशन के जरिए कहा है कि आईआरएफ को गैरकानूनी घोषित करना सही फैसला है। 

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Central government engaged in giving edge to the legal fight against Zakir Naik IRF
Zakir Naik - फोटो : ANI

विस्तार

2016 से देश से फरार जाकिर नाईक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के खिलाफ कानूनी लड़ाई की तैयारी को केंद्र सरकार और धार देने में जुट गई है। आईआरएफ को एक गैरकानूनी संगठन घोषित करने के अपने फैसले के बचाव के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के नेतृत्व में सात सदस्यीय वकीलों की टीम का गठन किया गया है। केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) 1967 की धारा 3 (1) के प्रावधानों के तहत आईआरएफ को गैरकानूनी घोषित किया था। तुषार मेहता के अलावा इस टीम में वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन दत्ता, अमित महाजन, रजत नायर, कानू अग्रवाल, जय प्रकाश और ध्रुव पांडे शामिल हैं।

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वकीलों की टीम ट्रिब्यूनल के समक्ष हो सकती है पेश
गृह मंत्रालय ने 13 दिसंबर 2021 को एक नोटिफिकेशन के जरिए कहा है कि आईआरएफ को गैरकानूनी घोषित करना सही फैसला है और इस मामले में भारत सरकार की ओर से वकीलों की एक टीम यूएपीए ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश हो सकती है। इससे पहले गृह मंत्रालय ने आईआरएफ पर प्रतिबंध लगाने के लिए यूएपीए के तहत दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल की अध्यक्षता में एक ट्रिब्यूनल का गठन किया था।
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यह ट्रिब्यूनल को इस बात का निर्णय करने के उद्देश्य से गठित किया गया है कि इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को गैरकानूनी संगठन घोषित करने के लिए पर्याप्त कारण हैं या नहीं। आपको बता दें कि गृह मंत्रालय ने हाल ही में भारत में जन्मे इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक के एनजीओ आईआरएफ पर लगाए गए प्रतिबंध को और पांच साल के लिए बढ़ा दिया था। गृह मंत्रालय ने कहा था कि नाइक के बयान और भाषण आपत्तिजनक और विध्वंसक हैं। इस तरह के बयान धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी, घृणा को बढ़ावा देते हैं। 
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2016 में देश से फरार हो गया था नाइक 
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में कहा है कि आईआरएफ ऐसी गतिविधियों में लिप्त है जो देश की सुरक्षा के लिए हानिकारक है। ये गतिविधियां शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के साथ-साथ देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को खराब कर सकते हैं। मंत्रालय के अनुसार, नाइक कट्टरपंथी बयान और भाषण देता है जिसे दुनिया भर में करोड़ों लोग देखते हैं। नाइक पीस टीवी और पीस टीवी उर्दू नाम से दो टेलीविजन स्टेशन चलाता है। दोनों चैनल भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम में बैन हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) नाइक के खिलाफ जांच शुरू करने वाली थी, उससे ठीक पहले 2016 में वह मलेशिया भाग गया था।

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