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तीन माह बाद मां-बाप से मिली तो खूब रोई साधना
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Tue, 15 Dec 2015 02:00 AM IST
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फीरोजाबाद से तीन माह पहले बिछड़ी दस साल की साधना आखिर अपने मां-बाप से मिल गई। बाल गृह में जब उससे मिलने मां-बाप आए तो वह फूट-फूटकर रोेने लगी।
साधना पिनाहट में मिली थी। एक महीने तक एक परिवार ने उसे आश्रय दिया। 13 अक्तूबर को उसे राजकीय बाल गृह में लाया गया। क्वालिटी इंस्टीट्यूशन केयर एंड अल्टरनेटिव फॉर चिल्ड्रेन (क्यूआईसीएसी) के रीजनल कोआर्डिनेटर नरेश पारस ने बाल गृह में उसकी काउंसलिंग की। उसने घर का पता फीरोजाबाद के गांव घुनपई मक्खनपुर बताया। पिता भूरी सिंह मजदूरी करते हैं और मां आशादेवी चूड़ी का काम करती है।
मां के डांटने पर वह घर छोड़ आई थी। नरेश पारस ने फीरोजाबाद के आदित्य वशिष्ठ की मदद से परिवार से संपर्क किया। इसके बाद मां-बाप को सोमवार को राजकीय बाल गृह में बुलाया। मां-बाप के आने पर साधना फूट-फूटकर रोने लगी। बाल कल्याण समिति के आदेश पर बालिका को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
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साधना पिनाहट में मिली थी। एक महीने तक एक परिवार ने उसे आश्रय दिया। 13 अक्तूबर को उसे राजकीय बाल गृह में लाया गया। क्वालिटी इंस्टीट्यूशन केयर एंड अल्टरनेटिव फॉर चिल्ड्रेन (क्यूआईसीएसी) के रीजनल कोआर्डिनेटर नरेश पारस ने बाल गृह में उसकी काउंसलिंग की। उसने घर का पता फीरोजाबाद के गांव घुनपई मक्खनपुर बताया। पिता भूरी सिंह मजदूरी करते हैं और मां आशादेवी चूड़ी का काम करती है।
मां के डांटने पर वह घर छोड़ आई थी। नरेश पारस ने फीरोजाबाद के आदित्य वशिष्ठ की मदद से परिवार से संपर्क किया। इसके बाद मां-बाप को सोमवार को राजकीय बाल गृह में बुलाया। मां-बाप के आने पर साधना फूट-फूटकर रोने लगी। बाल कल्याण समिति के आदेश पर बालिका को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
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