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अमर उजाला असर: बालगृह की आया की सेवा समाप्त होगी, अधीक्षक के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति
Fri, 06 Nov 2020 12:21 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 06 Nov 2020 12:21 AM IST
सार
- तीन शिशुओं की मौत का मामला, राज्य बाल आयोग के सदस्य की जांच में आहार दूषित व देखभाल में लापरवाही मिली
- निदेशक महिला कल्याण और बाल आयोग अध्यक्ष को भेजी जाएगी कार्रवाई के लिए रिपोर्ट
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राजकीय बाल गृह (शिशु) आगरा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा के राजकीय बाल (शिशु) गृह में तीन शिशुओं की मौत के मामले में बुधवार को जांच के लिए पहुंचे बाल आयोग के सदस्य डॉ. साक्षी बैजल ने एक आया की सेवा समाप्त करने और अधीक्षक के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति निदेशक महिला कल्याण और बाल आयोग अध्यक्ष से की है। डॉ. बैजल ने बताया कि शिशुओं की मौत दूषित आहार व देखभाल में प्रबंधन की लापरवाही से हुई है।
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दो दिन में तीन शिशुओं की मौत की खबर अमर उजाला में प्रकाशित हुई थी। इसी का संज्ञान लेकर सुबह 10.30 बजे टीम के साथ आयोग सदस्य ने धनौली-जगनेर रोड स्थित अभयपुरा मोड़ पर दीक्षित कांप्लेक्स में किराये पर संचालित राजकीय बाल गृह का निरीक्षण किया। बच्चों के पोषण, उपचार, प्रबंधन व अन्य रजिस्टर जांचे।
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मौके पर चिकित्सक व अधिकारियों से सवाल किए। कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। सबके बयान दर्ज किए। यहां से लौटकर दोपहर 12.30 बजे सर्किट हाउस में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी लवकुश भार्गव से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की। कमियां दूर करने के लिए सुझाव भी दिए।
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डॉ. बैजल ने बताया कि शिशुओं की मौत की मुख्य वजह लापरवाही है। शिशुओं के प्रति असंवेदनशील आया रहीसा की सेवा समाप्त कराई जाएगी। अधीक्षक विजय कुमार के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति शासन भेजी जाएगी।
पांच शिशु कुपोषित मिले
बाल गृह में पर्याप्त आहार हैं, लेकिन शिशुओं को नहीं खिलाया जाता। पांच शिशु कुपोषित मिले। उन्होंने कहा कि 15 दिन बाद फिर से जांच करने आएंगे। डीपीओ व सीएमओ को जो सुझाव दिए हैं, उनमें सुधार नहीं होने पर इनके विरुद्ध भी कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
नहीं मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट
प्रदेश बाल अधिकार सरंक्षण आयोग सदस्य डॉ. साक्षी बैजल ने डीपीओ से मृत शिशुओं की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी। एसीएमओ रिपोर्ट नहीं दिखा सके। डीपीओ व एसीएमओ के बयानों में फेरबदल मिला। उन्होंने 48 घंटे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। डॉ. बैजल ने बताया एक्ट के मुताबिक मृत शिशुओं का पोस्टमार्टम होना चाहिए, लेकिन रिपोर्ट नहीं मिलने स्थिति संदिग्ध प्रतीत हो रही है।
ये मिलीं कमियां
- बाल गृह में मल निस्तारण के लिए सीवर या सेप्टिक टैंक नहीं है।
- शिशु गृह के चारों तरफ गंदा पानी भरा है। मच्छर पनप रहे हैं।
- कुपोषण के कारण 0 से 5 साल के बच्चे बेहद कमजोर हैं।
- बच्चों को पेट के कीड़े मारने की दवा नहीं खिलाई गई।
- बच्चों में विटामिन ए व डी के अलावा कैल्शियम की कमी है।
- पोषण आहार रखा है, खाने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाता।
- कई आया के हाथ के नाखून गंदे और बढ़े हुए थे। इसके कारण शिशुओं के पेट में संक्रमण हुआ।
नहीं मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट
प्रदेश बाल अधिकार सरंक्षण आयोग सदस्य डॉ. साक्षी बैजल ने डीपीओ से मृत शिशुओं की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी। एसीएमओ रिपोर्ट नहीं दिखा सके। डीपीओ व एसीएमओ के बयानों में फेरबदल मिला। उन्होंने 48 घंटे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। डॉ. बैजल ने बताया एक्ट के मुताबिक मृत शिशुओं का पोस्टमार्टम होना चाहिए, लेकिन रिपोर्ट नहीं मिलने स्थिति संदिग्ध प्रतीत हो रही है।
ये मिलीं कमियां
- बाल गृह में मल निस्तारण के लिए सीवर या सेप्टिक टैंक नहीं है।
- शिशु गृह के चारों तरफ गंदा पानी भरा है। मच्छर पनप रहे हैं।
- कुपोषण के कारण 0 से 5 साल के बच्चे बेहद कमजोर हैं।
- बच्चों को पेट के कीड़े मारने की दवा नहीं खिलाई गई।
- बच्चों में विटामिन ए व डी के अलावा कैल्शियम की कमी है।
- पोषण आहार रखा है, खाने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाता।
- कई आया के हाथ के नाखून गंदे और बढ़े हुए थे। इसके कारण शिशुओं के पेट में संक्रमण हुआ।
ये दिए सुझाव
- 5 से 10 साल के बच्चों के लिए आरओ पानी की व्यवस्था की जाए।
- शिशुओं के लिए एक प्रशिक्षित स्टाफ नर्स की नियुक्ति की जाए।
- बाल रोग विशेषज्ञ से हर माह बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराएं।
- बच्चों में पोषण के लिए प्रोटीन, विटामिन व दूध की खुराक दी जाए।
- स्टाफ की स्वच्छता के लिए सीएमओ एक प्रोटोकॉल निर्धारित करें।
- हर 15 दिन में डाइटीशियन जांच करें, कुपोषितों का डाइट चार्ट बनाए।
- शिशु गृह में खाली पदों को भरने की संस्तुति निदेशक से की जाएगी।
- शिशुओं के लिए एक प्रशिक्षित स्टाफ नर्स की नियुक्ति की जाए।
- बाल रोग विशेषज्ञ से हर माह बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराएं।
- बच्चों में पोषण के लिए प्रोटीन, विटामिन व दूध की खुराक दी जाए।
- स्टाफ की स्वच्छता के लिए सीएमओ एक प्रोटोकॉल निर्धारित करें।
- हर 15 दिन में डाइटीशियन जांच करें, कुपोषितों का डाइट चार्ट बनाए।
- शिशु गृह में खाली पदों को भरने की संस्तुति निदेशक से की जाएगी।