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रोहिंग्या मुसलमानों का पनाहगार निकला बांग्लादेशी, सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 13 Oct 2018 01:23 PM IST
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पकड़े गए तीन बांग्लादेशी
- फोटो : अमर उजाला
आगरा में रोहिंग्या मुस्लिमों को शरण देने वाले तीन बांग्लादेशी नागरिकों को पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। ये तीनों आठ साल से रुनकता में सड़क किनारे झोपड़ी बनाकर अवैध रूप से रह रहे थे। इन्होंने वोटर कार्ड, आधार कार्ड और जाति प्रमाणपत्र बनवा लिए थे। एक ने तो एक प्लॉट और दो गाड़ियां भी खरीद ली थीं।
पांच दिन पहले फोर्ट स्टेशन से 16 रोहिंग्या मुस्लिम पकड़े गए थे। इनके पास शरणार्थी कार्ड होने के कारण इन्हें छोड़ दिया गया। ये सभी रुनकता में सईदुल गाजी (40) के पास जाकर रहने लगे। खुफिया पुलिस ने गाजी के बारे में पड़ताल की तो पता चला कि वो बांग्लादेशी है।
सईदुल गाजी मूलरूप से बांग्लादेश के खुन्ना जिले का रहने वाला है। उसके साथ उसकी पत्नी रतना (38) और बेटे शमीम (20) को गिरफ्तार किया गया है। इनके साथ तीन नाबालिग बच्चे और हैं। इन्हें नहीं पकड़ा गया है। इन्हें शेल्टर होम भेजा जाएगा।
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पांच दिन पहले फोर्ट स्टेशन से 16 रोहिंग्या मुस्लिम पकड़े गए थे। इनके पास शरणार्थी कार्ड होने के कारण इन्हें छोड़ दिया गया। ये सभी रुनकता में सईदुल गाजी (40) के पास जाकर रहने लगे। खुफिया पुलिस ने गाजी के बारे में पड़ताल की तो पता चला कि वो बांग्लादेशी है।
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सईदुल गाजी मूलरूप से बांग्लादेश के खुन्ना जिले का रहने वाला है। उसके साथ उसकी पत्नी रतना (38) और बेटे शमीम (20) को गिरफ्तार किया गया है। इनके साथ तीन नाबालिग बच्चे और हैं। इन्हें नहीं पकड़ा गया है। इन्हें शेल्टर होम भेजा जाएगा।
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ऐसे खुली पोल
गाजी ने मीडिया के कैमरों के सामने दो दिन पहले यह कुबूल कर लिया था कि वो मूलरूप से बांग्लादेश का रहने वाला है। वो यह भी कह रहा था कि अब तो यहां आराम से रह सकता है क्योंकि उसके आधार कार्ड सहित तमाम दस्तावेज बन गए हैं।
इतना ही नहीं, उसने बताया था कि वो आठ साल पहले बंग्लादेश से 20 हजार रुपये लेकर चला था। अब उसके पास प्लॉट और गाड़ियां हैं। उसका वीडियो देखने के बाद ही पुलिस हरकत में आई।
गाजी से पूछताछ के हवाले से पुलिस ने बताया कि वो 15 साल पहले बांग्लादेश से कोलकाता आया। वहां काम नहीं मिला तो मथुरा के गांव बाद पहुंचा, वहां झोंपड़ी बनाकर रहा। आठ साल पहले रुनकता पहुंचा और सड़क किनारे रहने लगा। यहां कबाड़े का काम कर रहा था।
इतना ही नहीं, उसने बताया था कि वो आठ साल पहले बंग्लादेश से 20 हजार रुपये लेकर चला था। अब उसके पास प्लॉट और गाड़ियां हैं। उसका वीडियो देखने के बाद ही पुलिस हरकत में आई।
गाजी से पूछताछ के हवाले से पुलिस ने बताया कि वो 15 साल पहले बांग्लादेश से कोलकाता आया। वहां काम नहीं मिला तो मथुरा के गांव बाद पहुंचा, वहां झोंपड़ी बनाकर रहा। आठ साल पहले रुनकता पहुंचा और सड़क किनारे रहने लगा। यहां कबाड़े का काम कर रहा था।
फर्जी दस्तावेज से खरीदी गाड़ियां
उसने यहीं पर आधार कार्ड, वोटर कार्ड, जाति प्रमाणपत्र बनवाया। बैंक खाता खुलवाया, एक प्लॉट खरीदा और कबाड़ के काम के लिए दो गाड़ियां खरीदीं। गाड़ियों के लिए बैंक से लोन भी लिया।
रुनकता से अभी तीन बंग्लादेशी नागरिक पकड़े गए हैं । अगर ठीक से जांच पड़ताल हो तो 60 और जेल जा सकते हैं। ये लोग लंबे समय से रह रहे हैं। खुफिया पुलिस रिपोर्ट दे चुकी है कि ये बंग्लादेशी हो सकते हैं।
रुनकता से अभी तीन बंग्लादेशी नागरिक पकड़े गए हैं । अगर ठीक से जांच पड़ताल हो तो 60 और जेल जा सकते हैं। ये लोग लंबे समय से रह रहे हैं। खुफिया पुलिस रिपोर्ट दे चुकी है कि ये बंग्लादेशी हो सकते हैं।