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Agra News: मर्ज से थे बेखबर...आंत और बच्चेदानी में मिले टीबी के कीटाणु

Tue, 03 Feb 2026 02:31 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 03 Feb 2026 02:31 AM IST
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They were unaware of the disease... TB germs found in the intestine and uterus
डॉ. जीवी सिंह, डॉ. सुखेश गुप्ता
आगरा। खांसी-बलगम नहीं, बुखार आने से वजन कम हो रहा था। लक्षणों को नजरअंदाज किया। कई बार खुद ही बुखार की दवा खाते रहे। स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और जांच की तो दिमाग, आंत, बच्चेदानी, हड्डी, बगल में टीबी के कीटाणु पनप रहे थे। ये एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी है, जिसके पहले के मुकाबले दोगुने मरीज मिले हैं।
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स्वास्थ्य विभाग ने बीते साल घरों, ढाबों, बस स्टॉप समेत विभिन्न स्थानों से 7.51 लाख लोगों की टीबी की स्क्रीनिंग की। संदिग्ध मरीजों की जांच कराने पर 30,936 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई। इसमें 17,433 पुरुष और 13,503 महिलाएं हैं। इनमें 2256 बालक-बालिकाएं शामिल हैं। 1519 मरीज दूसरे जिलों के थे।
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चिह्नित मरीजों में 18,982 में फेफड़े की टीबी (पल्मोनरी) और 10,435 मरीजों में दिमाग, बच्चेदानी, रीढ़ की हड्डी, जोड़, गुप्तांग, आंख, गर्दन, बगल में ( एक्स्ट्रा पल्मोनरी) टीबी पाई गई। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि विशेष अभियान में एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के 10,435 मरीजों में अधिकांश को टीबी का अंदेशा नहीं था। कई मरीज तो बुखार, भूख कम लगने, वजन कम होने पर बुखार की ही दवा ले लेते थे। इनको टीबी का इलाज देने पर 27,159 मरीज ठीक हो चुके हैं।
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टीबी मरीज पहचानने में आगरा अव्वल



- जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि टीबी मरीजों को चिह्नित करने में आगरा प्रदेश में अव्वल रहा है। 30 हजार से अधिक मरीज एक साल में चिह्नित किए हैं। टीबी में छह महीने और ड्रग रेजिस्टेंट टीबी का इलाज 9-11 महीने चलता है। एक्सडीआर टीबी के मरीजों की 18 से 20 महीने दवाएं चली।




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मधुमेह, किडनी-लिवर के मरीजों में ज्यादा खतरा



एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. जीवी सिंह ने बताया मधुमेह, कैंसर, लिवर-किडनी मरीजों के अलावा बच्चों-बुजुर्गाे में एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी का खतरा अधिक है। ऐसे मरीजों की दर बढ़ी है। खांसी-बलगम नहीं है। बुखार, कमजोरी और वजन कम हो रहा है तो टीबी की जांच जरूर कराएं।

ये हैं टीबी के लक्षण



- दो सप्ताह से अधिक से खांसी-बलगम।



- बुखार, रात में पसीना आना, मुंह से खून आना।

- सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, वजन कम होना।

- भूख न लगना, थकान, गर्दन में गिल्टी/गांठे, बांझपन।



- दिमाग की टीबी में मिर्गी के दौरे आना।

डॉ. जीवी सिंह,  डॉ. सुखेश गुप्ता

डॉ. जीवी सिंह, डॉ. सुखेश गुप्ता

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