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Agra News: ज्यादा बिकने वाली दवाएं नकली बनवाकर छह राज्यों में करते थे तस्करी

Mon, 13 Jul 2026 02:59 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jul 2026 02:59 AM IST
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They used to get counterfeit versions of best-selling medicines manufactured and smuggle them across six states.
जांच करतीं एफएसडीए आयुक्त
आगरा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने तीन चरणों में आगरा में छापा मारकर नकली दवाओं के अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। दवा माफिया व्यवस्थित ढंग से नकली दवाओं का सिंडिकेट चला रहे थे। ये नामी कंपनियों की ज्यादा बिकने वाली दवाएं ही नकली बनवाते थे। इसके लिए उत्तराखंड में फैक्टरी बना रखी थी। ब्रांडेड दवाओं की हूबहू पैकिंग करवाते थे। मोटे कमीशन पर छह राज्यों में दवाएं भेजी जाती थीं। तीसरे चरण में हुई कार्रवाई में 13 मेडिकल फर्मों के 14 संचालकों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
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औषधि विभाग की जांच में पता चला कि माफिया उत्तराखंड के रुड़की में फैक्टरी में दवा बनवाते थे। टीम ने वहां छापा मारकर नामी कंपनियों के नकली पैकेजिंग सामग्री बरामद की। ये दवाएं उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में तस्करी करते थे। वहां के औषधि निरीक्षकों की जांच में पता चला कि नकली दवाओं की खरीद आगरा से की गई है।
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इसके बाद 22 फरवरी को आगरा के मंटोला क्षेत्र में घर में नामी कंपनियों की दमा की दवा के 8 हजार रैपर जब्त किए थे। आरोपी जुबैर भाग गया था। इसके बाद टीमों ने तीन चरणों में छापा मारकर करीब 120 मेडिकल फर्मों की जांच की। साथ ही 58 थोक विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त कर दिए। 128 दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे और 3.72 करोड़ रुपये की नकली, सैंपल, सरकारी और एक्सपायर्ड दवाएं जब्त की। अभी भी चार गोदाम सील हैं, इनमें भी करोड़ों रुपये की दवाएं भरी हुई हैं।
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एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब का कहना है कि नकली, सैंपल, सरकारी और एक्सपायर्ड दवाओं के अवैध कारोबार का बड़ा सिंडिकेट पकड़ा है। इनके तार कई राज्यों से जुड़े हैं। चरणबद्ध तरीके से जांच चल रही है।
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150 से अधिक तरह की दवाओं की तस्करी

दवा माफिया देश-विदेश की 30-35 नामी कंपनियों की 150 से अधिक तरह की दवाएं नकली बनवाते थे। इनमें एंटीबायोटिक, मधुमेह, हृदय रोग, त्वचा रोग, पेट रोग, कैल्शियम, विटामिन डी, थायराइड, हार्मोन्स, हाइपरटेंशन, दमा-सांस रोग, कॉस्मेटिक समेत कई बीमारियों की दवाएं हैं। इन दवाओं की कुल बिक्री में करीब 40-50 फीसदी की हिस्सेदारी है। अधिक खपत के कारण ही दवा माफिया नकली दवाएं बनवाते थे और एआई की मदद से नामी कंपनियाें की हूबहू पैकिंग कर बाजार में मोटे कमीशन पर दुकानदारों को बेचते थे।

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महीनों रेकी कर एसटीएफ-औषधि विभाग ने पकड़ा रैकेट

खुफिया विभाग से सैंपल, सरकारी, एक्सपायर्ड और नकली दवाओं के आगरा से तस्करी के इनपुट के बाद लखनऊ से विशेष टीम बनाई गई। इसमें एफएसडीए और एसटीएफ के तेजतर्रार 50 अधिकारियों को शामिल किया गया। टीम ने 5-6 महीने रेकी कर साक्ष्य जुटाए। इसके बाद सिंडिकेट के सदस्यों के नाम, फोटो, फर्म का नाम, दवाओं की सूची बनाकर ताबड़तोड़ छापे मारे। इसमें आगरा में तीन महीने में करीब 120 फर्मों की जांच कर साक्ष्य जुटाए। इसमें नकली, सैंपल, सरकारी और एक्सपायर्ड दवाएं बरामद कीं। अभी चार गोदाम सील हैं।
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