अंधेरगर्दी: तीन हजार करोड़ खर्च हुए फिर भी पानी की किल्लत, करते रहिए शिकायत, हालात सुधरने वाले नहीं
आगरा में लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। शिकायत करने के बाद भी यहां कोई सुनवाई करने वाला नहीं है। लाइन लीक होने से गंगाजल नाली में बह रहा है। इसका भी ध्यान देने वाला कोई नहीं है।
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उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में पानी की किल्लत बनी हुई है। न पानी आ रहा न लीक लाइन सुधर रही। गंगाजल बर्बाद हो रहा है या दूषित सप्लाई। शिकायत करते रहिए, जलकल विभाग में सुनवाई नहीं हो रही है। न लीकेज की मरम्मत हो रही, न पानी आपूर्ति सुधारी जा रही। शिकायत करते-करते लोग थक जा रहे हैं। अफसरों की लापरवाही कम नहीं हो रही। गर्मी बढ़ते ही शहर में पेयजल की परेशानी होने लगी है।
आगरा पेयजल आपूर्ति योजना (गंगाजल) पर 3 हजार करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी पूरे शहर में पानी सप्लाई का नेटवर्क नहीं बिछ सका। गंगाजल से लोगों को गला तर नहीं हो सका है। जलकल विभाग की 100 साल पुरानी पाइपलाइन जर्जर हैं, जो आए दिन लीक हो रही हैं। जिम्मेदार आंख मूंदे हैं।
विभाग में रोज तीन से चार शिकायतें पहुंच रही हैं। ये स्थिति तब है जब शहर में सप्लाई के लिए पर्याप्त गंगाजल उपलब्ध है। परंतु, वितरण के संसाधन नहीं होने के कारण 2 लाख से अधिक घरों में गंगाजल नहीं पहुंच सका है। वहीं, इस संबंध में जलकल महाप्रबंधक कुलदीप सिंह का कहना है कि कंट्रोल रूम पर आई शिकायतों को तत्काल संबंधित अधिकारी के लिए भेज दी जाती है। शिकायतों की नियमित समीक्षा की जाएगी।
केस-1
नई आबादी नगला परसोती निवासी सुनील कुमार ने 20 फरवरी को जलकल कंट्रोल रूम पर पाइपलाइन लीकेज की शिकायत दर्ज कराई। विभाग ने शिकायत कागजों में किसी कर्मचारी के लिए भेज दी। तीन दिन बाद भी लीकेज की मरम्मत नहीं हुई।
केस-2
टीला माईथान निवासी शिखा श्रीवास्तव ने 19 फरवरी को जलकल कंट्रोल रूम पर क्षेत्र में पानी सप्लाई नहीं आने की शिकायत दर्ज कराई। समाधान के लिए शिकायत आगे बढ़ा दी गई। चार दिन बाद भी कोई जांच के लिए नहीं पहुंचा।
केस-3
बसई कला, नहारगंज निवासी राजू ने सड़क पर पाइपलाइन लीक होने की 21 फरवरी को जलकल कंट्रोल रूम पर शिकायत दर्ज कराई। दो दिन बाद भी लीक लाइन नहीं जोड़ी गई। सड़कों पर रोज हजारों लीटर गंगाजल बर्बाद हो रहा है।