डिलेवरी के लिए घोड़ा गाड़ी से अस्पताल पहुंची महिला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं हो रहा है। भले राज्य सरकार एंबुलेंस से लेकर तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा हो, लेकिन अफसरशाही
के ग्रहण से लोगों तक सुविधा नहीं पहुंच पा रही है। मथुरा में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां प्रसूता महिला को एंबुलेंस नहीं मिली। वह घोड़ा गाड़ी से अस्पताल पहुंची।
गांव बाढौन राया निवासी रामवती पत्नी विजेंदर को बुधवार सुबह प्रसव पीड़ा हुआ। परिजनों ने प्रसूता को राया स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के लिए 102 एंबुलेंस को फोन किया। लंबे इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। महिला की प्रसव पीड़ा को देखते हुए परिजन घोड़ा गाड़ी से ही अस्पताल चल दिए।
अस्पताल पहुंचने से घोड़ा गाड़ी में ही महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। घटना के संबंध में डॉक्टर तुलाराम ने बताया कि परिजन घोड़ा गाड़ी से लेकर महिला को स्वास्थ्य केंद्र पर आए हैं और रास्ते में ही लड़की हुई है।
इसी तरह का एक अन्य मामला स्वास्थ्य सेवाओं की एंबुलेंस का सामने आया है। गांव मगदा राया निवासी वीरपाल पुत्र प्रकाश अमीन उम्र 50 वर्ष किडनी के मरीज थे। वे बुधवार को उपचार के लिए जा रहे थे। रास्ते में अचानक तबीयत बिगड़ गई।
सुबह 10 बजे 108 एंबुलेंस को फोन किया। एंबुलेंस आपरेटर ने आने से मना कर दिया। वे घोड़ा गाड़ी से ही स्वास्थ्य केंद्र जाने लगे। उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
मथुरा में स्वास्थ्य सेवाओं में घोर लापरवाही बरती जा रही है। लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इसके बावजूद अधिकारी व्यवस्था बनाने के बजाए चुप्पी साधे हुए हैं।