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Agra News: मुगल शहजादी की निशानी...कह रही बदहाली की कहानी

Thu, 09 Jul 2026 01:41 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2026 01:41 AM IST
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The sign of a Mughal princess...tells the story of her plight
मस्जिद की टूटी मीनार,बदहाल छतरियां
धर्मेंद्र यादव
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आगरा। मुगल शहजादी जहांआरा की निशानी शाही जामा मस्जिद रखरखाव नहीं हो पाने के कारण बदहाल होती जा रही है। मस्जिद की खूबसूरती को बढ़ाने वाली एक दर्जन से अधिक छतरियों का पेंट उखड़ चुका है। वुजू टैंक में काई की मोटी परतें जमी हुई हैं। मुख्य गुंबद भी जीर्ण-शीर्ण हो गया है। सुभाष बाजार में खुलने वाले मस्जिद के गेट की सीढि़यां जर्जर हैं, जिनकी ईंटें तक निकल गई हैं। परिसर के बाहर अतिक्रमण हो गए हैं। मस्जिद इंतजामिया कमेटी जुमे की नमाज के लिए आने वाले नमाजियों के लिए व्यवस्थाएं कराती है। इंतजामिया कमेटी के पदाधिकारियों का कहना है कि मस्जिद का संरक्षण करने में एएसआई के अधिकारी उदासीनता बरत रहे हैं।
शाही जामा मस्जिद कभी आगरा किले के परिसर में ही स्थित हुआ करती थी। लेकिन अब किले से जोड़ने वाला गेट गायब हो चुका है। मस्जिद में हर शुक्रवार को नमाज के लिए सैकड़ों नमाजी पहुंचते हैं। इसके अलावा देसी-विदेशी सैलानी भी मस्जिद का भ्रमण करने आते हैं। मुगल स्थापत्य कला के इस नायाब नमूने में दाग लग रहे हैं। मस्जिद की छोटी छतरियों पर पेंट नहीं किया गया है। कई जगह से टूट-फूट भी हो चुकी है। मस्जिद में ताजमहल के सेंट्रल टैंक की तर्ज पर वुजू खाना बना हुआ है। इसका पानी नहीं बदलने से कई इंच मोटी काई की परत जमी हुई है। इसका पानी इतना गंदा है कि वुजू करना तो दूर इसके पानी से हाथ धोने से संक्रमण का खतरा है। कमेटी से जुड़े फैजल कुरैशी का कहना है कि टैंक में पानी का निकास सिस्टम खराब पड़ा है। टैंक के पास फव्वारा है, जोकि बंद पड़ा है।
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अतिक्रमण हटे और संरक्षण हो, कमेटी की मांग
सुभाष बाजार की ओर वाले गेट की सीढि़यां जर्जर हैं। ईंट तक निकल चुकी हैं। मरम्मत नहीं हुई है। शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के चेयरमैन मोहम्मद जाहिद का कहना है कि मस्जिद का रखरखाव बेहतर करने के लिए निजी खर्च से कई काम कराए हैं। मस्जिद परिसर की दुकानों में अवैध निर्माण करा रखे हैं, एएसआई के अधिकारी शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं करते हैं। मस्जिद के जुनूबी मैदान में अतिक्रमण हैं, इन्हें हटाया नहीं जा रहा है।
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20 साल पहले टूटी मीनार, अब तक नहीं बनी
मस्जिद के मुख्य द्वार के ऊपरी हिस्से में दो मीनारें बनी हुई थीं। तकरीबन 40 साल पहले इसकी एक मीनार आंधी में गिर गई थी। तभी से मस्जिद की एक मीनार है। टूटी हुई मीनार की मरम्मत के लिए मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने एएसआई से पत्राचार किया मगर मीनार नहीं बन सकी। हिंदुस्तानी बिरादरी के अध्यक्ष डॉ. सिराज कुरैशी बताते हैं कि मीनार टूटने के बाद उन्होंने गृह मंत्रालय तक पत्र लिखे लेकिन मीनार का निर्माण नहीं हो सका है। वह मीनार के मामले में तत्कालीन गृह मंत्री बूटा सिंह से मिले थे।



जहेज की रकम से बनवाई थी मस्जिद
मुगल बादशाह शाहजहां की बेटी जहांआरा ने अपने जहेज (दहेज) में दी जाने वाली धनराशि से वर्ष 1648 में शाही जामा मस्जिद का निर्माण कराया था। यह भी कहा जाता है कि शहजादी ने उन्हें मिलने वाले शाही भत्ते से इसका निर्माण कराया गया था। इसकी लागत करीब पांच लाख रुपये आई थी। वह धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। उन्होंने निकाह नहीं किया था। मस्जिद में जहांआरा का उर्स मस्जिद इंतजामिया कमेटी की ओर से मनाया जाता था। हालांकि उनकी कब्र दिल्ली स्थित हजरत निजामुद्दीन दरगाह परिसर में है।
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