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रंगों से दी राधा-कृष्ण के प्रेम को अभिव्यक्ति
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Updated Mon, 22 Feb 2016 02:04 AM IST
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‘पग-पग होत प्रयाग’ कृष्ण के चरण यमुना का रुप हैं और बृजरानी राधा के चरण साक्षात गंगा के स्वरूप हैं। इस युगल छवि का एक दूसरे के प्रति प्रेम और समर्पण सरस्वती का रूप है। यहीं से सभी कलाओं का उद्गम होता है। इस प्रेम को जो अभिव्यक्ति दे, वही सच्चा कलाकार है। कलाकार के हृदय से जब तक प्रेम फूट कर न बहे तब तक वह कला के शिखर तक नहीं पहुुंच सकता है। यह कहना है ‘अर्थ वाइस’ संस्था के अभिषेक गोस्वामी का। वे रविवार को अशोक फाउंडेशन आफ आर्ट एंड कल्चर की ओर से क्वीन मेरी एंप्रेस लाइब्रेरी में आयोजित दो दिवसीय फेस्टिवल आफ आर्ट एंड कल्चर आफ ब्रज मंडल के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बृज की चित्रकारी की विधा सांझी है। जब राधा रानी, ठाकुर को मनाने के लिए सांझी बनाती थीं इस सांझी में वे स्वयं को उड़ेल देती थीं और कन्हैया इस सांझी में डूब जाते थे। कला से जुड़िए, जीवन को आधार मिल जाएगा। इस फेस्टिवल और क्वीन मेरी एंप्रेस लाइब्रेरी का उद्घाटन मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर ने किया। उन्होंने कहा कि आज से दो वर्ष पूर्व बैकुंठी देवी महाविद्यालय की छात्राओं के एक पेंटिंग कार्यक्रम में उन्होंने वादा किया था उनकी कला को एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराएंगे। लाइब्रेरी उस दिशा में एक छोटा सा कदम है। डा. रंजना बंसल ने कहा कि कला और कलाकारों के प्रमोशन के लिए लाइब्रेरी वर्ष भर कार्य करेगी। बृज मंडल के कलाकार इसके माध्यम से अपनी कला देश-विदेश तक पहुंचा सकेंगे। इसमें वृंदावन के कलाकार यदुुनंदन, कृष्ण गोपाल, गोपाल, निताई, रमेश, सुमित और आशीसानंद और आगरा कालेज, बैकुंठी देवी महाविद्यालय, ललित कला संस्थान, बीडी जैन और दयालबाग अकादमी के विद्यार्थी भी अपनी चित्रकला का प्रदर्शन कर रहे हैं। शाम में योगेंद्र सिंह (राष्ट्रीय संरक्षक संस्कार भारतीय) एवं विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने दीपोत्सव एवं सांझी कला की आरती की। सोमवार शाम 5 बजे पुरस्कार वितरण एवं दीपोत्सव होगा। जिला जज राजीव लोचन मेहरोत्रा कार्यक्रम का समापन करेंगे। इस अवसर पर राजीव तिवारी, अप्सा के सचिव सुशील गुप्ता, हरविजय सिंह वाहिया, राजीव गुप्ता, डा. डीवी शर्मा, प्रहलाद अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
लुप्त हो रही हैं बृज की कलाएं
वृंदावन के कलाकार यदुनंदन ने कहा कि कई भागों में बंटी बृज की कला अति प्राचीन है। कुछ कलायें लुप्त हो हो गईं हैं। कुछ बची हैं जिनमें संाझी एक अति प्राचीन शैली है जिसे राधारानी भगवान कृष्ण को रिझाने के लिये स्वयं बनातीं थी। इसके अतिरिक्त पिछवाई शैली, मिनिएचर शैली एवं स्वर्ण-नगों से जड़ित पेंटिंग, लीलाओं को दर्शाती है। ब्रज का एक ऐसा वर्ग जिसने अपना संपूर्ण जीवन इन कलाओं को सहेजने में समर्पित कर दिया लेकिन उन्हें प्रसिद्धि नहीं मिली।
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लुप्त हो रही हैं बृज की कलाएं
वृंदावन के कलाकार यदुनंदन ने कहा कि कई भागों में बंटी बृज की कला अति प्राचीन है। कुछ कलायें लुप्त हो हो गईं हैं। कुछ बची हैं जिनमें संाझी एक अति प्राचीन शैली है जिसे राधारानी भगवान कृष्ण को रिझाने के लिये स्वयं बनातीं थी। इसके अतिरिक्त पिछवाई शैली, मिनिएचर शैली एवं स्वर्ण-नगों से जड़ित पेंटिंग, लीलाओं को दर्शाती है। ब्रज का एक ऐसा वर्ग जिसने अपना संपूर्ण जीवन इन कलाओं को सहेजने में समर्पित कर दिया लेकिन उन्हें प्रसिद्धि नहीं मिली।
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