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Agra News: निर्दोष को जेल भेजने वाले दरोगा को 2 साल कारावास, 20 हजार के अर्थ दंड की सजा
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बाह। बटेश्वर के दलित कालीचरन को जेल भेजे जाने के 11 साल पुराने मामले में बाह थाने के विवेचक उपनिरीक्षक वीरेंद्र सिंह तोमर को कोर्ट ने एससीएसटी एक्ट के मामले में दोषी पाया है। उनको 2 साल के कारावास एवं 20 हजार के अर्थ दंड की सजा सुनाई है। दरअसल जिस दिन कालीचरन एससीएसटी आयोग के कार्यालय में मौजूद था, उसी दिन बटेश्वर में हुई मारपीट में नामजदगी के आधार पर कालीचरण को जेल भेज दिया था। 6 जनवरी 2014 को दरोगा के खिलाफ एससीएसटी एक्ट में एफआईआर दर्ज हुई थी।
विशेष न्यायधीश (एससीएसटी एक्ट) आगरा शिवराम द्वितीय ने 11 साल पुराने मामले में तत्कालीन दरोगा वीरेंद्र सिंह तोमर को एससीएसटी एक्ट के अपराध में दोषी पाए जाने पर 2 साल के कारावास एवं 20 हजार रुपये के अर्थ दंड की सजा सुनाई है। अर्थ दंड की अदायगी न करने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। 24 जून 2013 को बटेश्वर के श्रीकृष्ण और कालीचरन पक्ष के बीच हुई मारपीट की घटना में नामजद किए गए कालीचरन घटना वाले दिन एससीएसटी आयोग के कार्यालय में मौजूद थे। बावजूद इसके 7 नवंबर 2013 को कालीचरन को बाह पुलिस ने जेल भेज दिया। आयोग के हस्तक्षेप के बाद जेल भेजे गए कालीचरन को क्लीन चिट मिली और 30 नवंबर 2013 को जेल से रिहाई हुई थी।
आगरा के सिकंदरा थाने में तैनात थे सेवानिवृत्त दरोगा
निर्दोष को जेल भेजे जाने के मामले में आयोग के हस्तक्षेप पर विवेचक दरोगा वीरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ 6 जनवरी 2014 को एफआईआर दर्ज हुई थी। लेकिन दरोगा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई और ना ही अरेस्टिंग हुई। जिस पर आयोग के अध्यक्ष डॉ. पीएल पूनिया ने नाराजगी जताते हुए सीबीसीआईडी को जांच सौंपी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उस वक्त बागपत मेरठ के रहने वाले वीरेंद्र सिंह तोमर आगरा के सिकंदरा थाने में तैनात थे। 2015 में इसी थाने से सेवानिवृत्त हुए। 11 साल बाद अदालत ने दरोगा वीरेंद्र सिंह तोमर को दोषी माना और सजा सुनाई है।
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विशेष न्यायधीश (एससीएसटी एक्ट) आगरा शिवराम द्वितीय ने 11 साल पुराने मामले में तत्कालीन दरोगा वीरेंद्र सिंह तोमर को एससीएसटी एक्ट के अपराध में दोषी पाए जाने पर 2 साल के कारावास एवं 20 हजार रुपये के अर्थ दंड की सजा सुनाई है। अर्थ दंड की अदायगी न करने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। 24 जून 2013 को बटेश्वर के श्रीकृष्ण और कालीचरन पक्ष के बीच हुई मारपीट की घटना में नामजद किए गए कालीचरन घटना वाले दिन एससीएसटी आयोग के कार्यालय में मौजूद थे। बावजूद इसके 7 नवंबर 2013 को कालीचरन को बाह पुलिस ने जेल भेज दिया। आयोग के हस्तक्षेप के बाद जेल भेजे गए कालीचरन को क्लीन चिट मिली और 30 नवंबर 2013 को जेल से रिहाई हुई थी।
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आगरा के सिकंदरा थाने में तैनात थे सेवानिवृत्त दरोगा
निर्दोष को जेल भेजे जाने के मामले में आयोग के हस्तक्षेप पर विवेचक दरोगा वीरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ 6 जनवरी 2014 को एफआईआर दर्ज हुई थी। लेकिन दरोगा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई और ना ही अरेस्टिंग हुई। जिस पर आयोग के अध्यक्ष डॉ. पीएल पूनिया ने नाराजगी जताते हुए सीबीसीआईडी को जांच सौंपी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उस वक्त बागपत मेरठ के रहने वाले वीरेंद्र सिंह तोमर आगरा के सिकंदरा थाने में तैनात थे। 2015 में इसी थाने से सेवानिवृत्त हुए। 11 साल बाद अदालत ने दरोगा वीरेंद्र सिंह तोमर को दोषी माना और सजा सुनाई है।
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