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बच्चों की मौत पर ग्रामीणों की आंखे हुईं नम
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भोगांव। सड़क हादसे में दो बच्चों की मौत से बृहस्पतिवार को गांव मेरापुर गुजराती में मातम छाया रहा। परिजन दहाड़ मारकर रोते बिलखते रहे। वहीं ग्रामीणों की आंखें भी नम रहीं। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में गमगीन माहौल में बच्चों के शवों का अंतिम संस्कार हुआ। कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला।
थाना एलाऊ क्षेत्र के गांव मेरापुर गुजराती निवासी धर्मेंद्र कुमार का 12 वर्षीय पुत्र आलोक रंजन माता-पिता का इकलौता पुत्र था। वह हंसमुख होने के साथ ही सभी का दुलारा था। बुधवार की शाम हुए सड़क हादसे में उसकी मौत के बाद अब छोटी बहन मनीषा घर में रह गई है। हादसे में घायल मां शीला देवी ट्रामा सेंटर फिरोजाबाद में भर्ती हैं। वहीं हादसे में जान गवाने वाला पांच वर्षीय वंशुल भाई अंशुल और सात वर्षीय बहन आकांक्षा से छोटा था। वंशुल भी परिजनों के साथ ग्रामीणों का चहेता था।
दोनों बच्चे ग्रामीणों के भी चहेते थे। यही वजह रही कि बृहस्पतिवार को मृतकों के घर पर सांत्वना देने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा पड़ा। सांत्वना देने पहुंचे ग्रामीणों की आंखें नम थीं। बच्चों की मौत का दुख इस बात से भी पता चलता है कि कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। गमगीन माहौल में बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया।
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मां को कौन बताए चला गया लाल
हादसे में आलोक रंजन और वंशुल की जान चली गई। वहीं दोनों की मां गंभीर रूप से घायल होने के बाद ट्रामा सेंटर फिरोजाबाद में इलाज करा रहीं हैं। बच्चों की मौत हो चुकी है, इस बारे में उनकी मां को कौन बताए। परिजन भी सूचना देने की हिम्मत नहीं जुटा सके। बृहस्पतिवार को कुछ लोगों ने हिम्मत दिखाकर बच्चों की मौत की सूचना उनकी मां को दी। यह खबर सुनकर अपनी पीड़ा भूलकर दोनों बच्चों की मां बेसुध हो गईं। किसी तरह से लोगों ने समझा बुझाकर उन्हें शांत करने का प्रयास किया।
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थाना एलाऊ क्षेत्र के गांव मेरापुर गुजराती निवासी धर्मेंद्र कुमार का 12 वर्षीय पुत्र आलोक रंजन माता-पिता का इकलौता पुत्र था। वह हंसमुख होने के साथ ही सभी का दुलारा था। बुधवार की शाम हुए सड़क हादसे में उसकी मौत के बाद अब छोटी बहन मनीषा घर में रह गई है। हादसे में घायल मां शीला देवी ट्रामा सेंटर फिरोजाबाद में भर्ती हैं। वहीं हादसे में जान गवाने वाला पांच वर्षीय वंशुल भाई अंशुल और सात वर्षीय बहन आकांक्षा से छोटा था। वंशुल भी परिजनों के साथ ग्रामीणों का चहेता था।
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दोनों बच्चे ग्रामीणों के भी चहेते थे। यही वजह रही कि बृहस्पतिवार को मृतकों के घर पर सांत्वना देने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा पड़ा। सांत्वना देने पहुंचे ग्रामीणों की आंखें नम थीं। बच्चों की मौत का दुख इस बात से भी पता चलता है कि कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। गमगीन माहौल में बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया।
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मां को कौन बताए चला गया लाल
हादसे में आलोक रंजन और वंशुल की जान चली गई। वहीं दोनों की मां गंभीर रूप से घायल होने के बाद ट्रामा सेंटर फिरोजाबाद में इलाज करा रहीं हैं। बच्चों की मौत हो चुकी है, इस बारे में उनकी मां को कौन बताए। परिजन भी सूचना देने की हिम्मत नहीं जुटा सके। बृहस्पतिवार को कुछ लोगों ने हिम्मत दिखाकर बच्चों की मौत की सूचना उनकी मां को दी। यह खबर सुनकर अपनी पीड़ा भूलकर दोनों बच्चों की मां बेसुध हो गईं। किसी तरह से लोगों ने समझा बुझाकर उन्हें शांत करने का प्रयास किया।