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एक बार फिर चर्चा में ठाकुर बांकेबिहारी, कोर्ट में हो रही इस मामले की सुनवाई

Tue, 19 Dec 2017 01:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला वृंदावन (मथुरा)
ब्यूरो/अमर उजाला वृंदावन (मथुरा) Updated Tue, 19 Dec 2017 01:25 PM IST
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thakur bankebihari mandir case in local court of mathura
अदालत। - फोटो : amar ujala
वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में ठाकुरजी के दर्शनों का समय बढ़ाए जाने का मुद्दा कोर्ट पहुंच गया है। मामले में प्रशासनिक पहल पर सोमवार को सुनवाई भी शुरू हो गई। इस दौरान लोगों ने धार्मिक आस्था से जुडे़ इस अहम मसले पर अपना पक्ष रखा। 
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वृंदावन स्थित विश्वविख्यात बांकेबिहारी मंदिर में भक्तों की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है। ताजा प्रशासनिक आंकलन के मुताबिक साल भर में 1.25 करोड़ भक्त यहां दर्शन को आ रहे हैं। 
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खासकर अक्षय तृतीया, गुरुपूर्णिमा, हरियाली तीज, जन्माष्टमी, शरद पूर्णिमा, भाई दूज और होली पर तो यह संख्या एक दिन में ही 3 से 3.5 लाख रहती है। इसी को आधार बनाकर पिछले दिनों प्रशासन ने मंदिर प्रशासक सिविल जज जूनियर डिवीजन के समक्ष दर्शन का समय बढ़ाए जाने की अपील की थी। 
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इसी अपील पर ठाकुर बांकेबिहारी को लेकर सोमवार दोपहर 12 बजे शुरू हुई न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आपत्तियां सुनी गईं। इसमें दीपक शर्मा, नंदलाल चतुर्वेदी, सौरभ गौड़, ब्रजेश गौतम, बीके गौतम, श्रीदास प्रजापति, भगवान दास चौधरी ने कोर्ट में आपत्तियां दर्ज कराईं। डीजीसी सिविल बद्रीप्रसाद सिंह की ओर से प्रशासनिक पक्ष रखा गया।

thakur bankebihari mandir case in local court of mathura
बांके बिहारी जी - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
बिहारीजी प्रबंध कमेटी के पूर्व अध्यक्ष गौरव गोस्वामी, राजीव मुकंद गोस्वामी, मोर मुकुट गोस्वामी, रवि गोस्वामी, श्रीनाथ गोस्वामी, घनश्याम गोस्वामी, आकाश गोस्वामी, हरि शंकर गोस्वामी, तरुण गोस्वामी, विनोद गोस्वामी, अविनाश गोस्वामी, प्रणव गोस्वामी, बालकिशन गोस्वामी, हरी शंकर गोस्वामी ने अपना पक्ष रखने के लिए कोर्ट से और समय मांगा। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 21 दिसंबर तय कर दी है। 

मंदिर की प्रबंध कमेटी के पूर्व अध्यक्ष गौरव गोस्वामी ने बताया कि उन्होंने कोर्ट में कहा है कि बिहारी जी की बाल सेवा है, इसलिए उनकी सेवा में समय बढ़ाने से व्यवधान होगा। 

इधर, डीजीसी सिविल बद्रीप्रसाद सिंह ने बताया कि उन्होंने कोर्ट को बताया कि स्कीम फॉर मैनेजमेंट ऑफ श्रीबांकेबिहारी जी महाराज मंदिर के तहत ही ठाकुर जी के भक्तों की सुविधा को देखते हुए सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सदर ने मंदिर के खुलने की समय बढ़ाने की मांग की है।

भक्तों ने कोर्ट में दीं दलील

जन-जन के आराध्य ठाकुर बांके बिहारी जी मंदिर के दर्शनों का समय बढ़ाने के मामले में बिहारी जी के भक्तों ने सिविल जज जूनियर डिवीजन की कोर्ट में अपना पक्ष रखा। सोमवार दोपहर करीब 12 बजे कोर्ट द्वारा इस संबंध में आपत्तियां सुनी गईं। 

आपत्ति दर्ज कराते हुए दीपक शर्मा एडवोकेट, नंदलाल चतुर्वेदी एडवोकेट ,सौरभ गौड़, ब्रजेश गौतम एडवोकेट, बीके गौतम, श्रीदास प्रजापति कैलाश नगर वृंदावन, भगवान दास चौधरी ने कोर्ट में आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बिहारी जी की सेवा चूंकि बाल सेवा है इसलिए उनकी सेवा में व्यवधान नहीं किया जा सकता है। 

दर्शनों का समय बढ़ाने से बिहारी जी की सेवा प्रभावित होगी और बिहारी जी को कष्ट होगा। उन्होंने बताया कि पहले से ही बिहारी जी मंदिर 12 घंटे से अधिक समय तक खुला रहता है। उधर डीजीसी सिविल बद्रीप्रसाद सिंह ने बताया कि उन्होंने कोर्ट को बताया कि स्कीम फॉर मैनेजमेंट ऑफ श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर के तहत ही दोनों प्रशासनिक अधिकारियों ने कोर्ट से मंदिर के खुलने की समय बढ़ाने की मांग की है। 

बहस का मुद्दा बना कौन बड़ा भक्त

सोमवार को कोर्ट में यह बात बहस का मुद्दा बन गई कि दोनों पक्षों में से कौन सबसे बड़ा बिहारी जी का भक्त है। बिहारी जी मंदिर के गोस्वामीजन और आपत्तियां दर्ज कराने वाले अधिवक्ता का कहना था कि समय बढ़ाने की मांग करने वाले सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सदर की बिहारी जी में कोई श्रद्धा नहीं है।

केवल वे अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए समय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। जबकि डीजीसी बद्रीप्रसाद सिंह ने कहा कि इसका विरोध करने वाले नहीं चाहते कि मंदिर की प्रतिष्ठा और आमदनी बढे़। 

भक्त को मिल रहे दर्शन के लिए सिर्फ 0.096 सेकेंड

वृंदावन स्थित मंदिर बांकेबिहारी में भक्तों की बढ़ती भीड़ के चलते पलभर भी दर्शन दुर्लभ हो गए हैं। चौंकाने वाले प्रशासनिक आंकड़ों बताते हैं कि भीड़ के बीच एक भक्त के हिस्से में ठाकुर जी के दर्शन का समय सिर्फ 0.096 सेकेंड ही आता है। ठाकुर जी के दर्शन का समय बढ़ाए जाने की आवश्यकता पर डीजीसी बद्री प्रसाद सिंह ने बताया कि वर्ष 1862 में दर्शन के लिए आठ घंटे निर्धारित थे। 

उस वक्त मात्र सौ श्रद्धालु मंदिर में दर्शन को आते थे। प्रति व्यक्ति दर्शन करने का समय 280 सेकेंड था। वर्ष 1960 में श्रद्धालु पांच हजार तो समय प्रति व्यक्ति 5.76 हो गया। वर्ष 2017 तक पहुंचते श्रद्धालुओं की संख्या विशेष उत्सवों में प्रतिदिन तीन से साढ़े तीन लाख तक जा पहुंच गई। इस प्रकार एक श्रद्धालु के हिस्से में दर्शन करने के लिए सिर्फ 0.096 सेकेंड का समय आया।
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