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आगरा में 10 वर्षीय बालिका ने दी जान: पिता ने बेसहारा छोड़ा, मां की हो चुकी मौत, बहन कर रही थी परवरिश
Sun, 14 Mar 2021 04:18 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 14 Mar 2021 04:18 PM IST
सार
- घर में रहते थे चार भाई-बहन, मां की हो चुकी है मौत
- पिता घर छोड़कर जा चुके, बड़ी बहन कर रही थी परवरिश
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मृतका की बहन से पूछताछ करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा की तहसील फतेहाबाद के एक गांव में 10 वर्षीय बालिका की खुदकुशी ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। लोग सन्न रह गए। बचपन में ही मां का प्यार और पिता के दुलार से वंचित ये चार भाई-बहन ही घर में रहते थे। इनकी मां की मौत हो चुकी है। पिता का भी कुछ पता नहीं है।
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फतेहाबाद के गांव में शनिवार की शाम पांच साल के छोटे भाई से झगड़ने के बाद 10 वर्षीय बालिका ने फंदे से लटककर जान दे दी। सूचना पर क्षेत्राधिकारी और इंस्पेक्टर पहुंचे। घटना की छानबीन करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
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इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार ने बताया कि घर में 18 वर्षीय बड़ी बहन के साथ 10 वर्षीय बालिका, 5 वर्षीय भाई और डेढ़ साल की एक और बहन रहती थी। बड़ी बहन के मुताबिक घटना के बाद वह घर आई, तो छोटी बहन की मौत हो चुकी थी। भाई भी कुछ नहीं बता पा रहा है। आसपास के लोगों को भी घटना की जानकारी बाद में हुई।
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बड़ी बहन ने बताया कि उसकी मां की डेढ़ साल पहले मौत हो चुकी है। पिता भी छोड़कर कहीं चला गया है। परिवार के अन्य सदस्य गांव में ही दूसरे घर में रहते हैं। वह कपड़े की दुकान पर काम करके किसी तरह भाई-बहनों को पाल रही थी।
डर में कदम उठाने की आशंका
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. केसी गुरनानी ने बताया कि झगड़े के बाद बच्ची के मन में यह डर बैठ गया होगा कि भाई शिकायत कर देगा। बहन पिटाई न कर दे। इस भय में उसने यह कदम उठाया होगा।
एक आशंका यह भी है कि कई बार झगड़ा होने पर परिजन कहते हैं कि इससे तो अच्छा है मर ही जाएं, झंझट ही खत्म हो जाएगा। यह भाव बच्चों के मन में बैठ जाता है। झगड़ा होने पर उन्हीं बातों को अमल करते हुए बच्चे खेल समझ यह कदम उठा लेते हैं।
डर में कदम उठाने की आशंका
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. केसी गुरनानी ने बताया कि झगड़े के बाद बच्ची के मन में यह डर बैठ गया होगा कि भाई शिकायत कर देगा। बहन पिटाई न कर दे। इस भय में उसने यह कदम उठाया होगा।
एक आशंका यह भी है कि कई बार झगड़ा होने पर परिजन कहते हैं कि इससे तो अच्छा है मर ही जाएं, झंझट ही खत्म हो जाएगा। यह भाव बच्चों के मन में बैठ जाता है। झगड़ा होने पर उन्हीं बातों को अमल करते हुए बच्चे खेल समझ यह कदम उठा लेते हैं।