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मां-बाप की मौत के बाद ताऊ ने भी तोड़ा दम, अनाथ हो गई अंजलि
Thu, 30 May 2019 04:39 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 30 May 2019 04:39 PM IST
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मिट्टी की ढाय में दबकर हुई महिला की मौत के बाद विलाप करते परिजन (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
पिता की मौत के बाद मां ने बमुश्किल बच्ची को सहारा दिया। लेकिन, दस साल की अंजलि पर दुखों का पहाड़ उस समय टूटा जब मिट्टी की ढाय में दबकर मां की मौत हुई और इसके कुछ घंटे बाद ताऊ ने भी दम तोड़ दिया। ताऊ की मौत के बाद बालिका अनाथ हो गई।
कासंगज के नगला मुंडा में मंगलवार को मिट्टी की ढाय में दबकर दो महिलाओं की मौत हुई थी। इनमें एक महिला तारानी थीं। तारानी के जेठ ने गुरुवार को दम तोड़ दिया है। छोटे भाई की पत्नी की मौत से वह सदमे में आ गए थे। अनाथ अंजली को ताऊ से ही तमाम उम्मीदें थीं।
नगला मुंडा की घटना में तारानी पत्नी प्रेमपाल की मौत हो गई थी। तारानी विधवा थीं। अपने जेठ महेंद्र की देखरेख भी तारानी करती थी। छोटे भाई की पत्नी की मौत की खबर सुनकर महेंद्र सदमे में आ गए। घटनास्थल पर जाते समय वह रास्ते में गिर पड़े। लोगों ने उनका उपचार कराया।
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कासंगज के नगला मुंडा में मंगलवार को मिट्टी की ढाय में दबकर दो महिलाओं की मौत हुई थी। इनमें एक महिला तारानी थीं। तारानी के जेठ ने गुरुवार को दम तोड़ दिया है। छोटे भाई की पत्नी की मौत से वह सदमे में आ गए थे। अनाथ अंजली को ताऊ से ही तमाम उम्मीदें थीं।
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नगला मुंडा की घटना में तारानी पत्नी प्रेमपाल की मौत हो गई थी। तारानी विधवा थीं। अपने जेठ महेंद्र की देखरेख भी तारानी करती थी। छोटे भाई की पत्नी की मौत की खबर सुनकर महेंद्र सदमे में आ गए। घटनास्थल पर जाते समय वह रास्ते में गिर पड़े। लोगों ने उनका उपचार कराया।
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बुधवार को तारानी के अंतिम संस्कार के बाद महेंद्र की हालत बिगड़ गई। उन्हें तेज घबराहट हुई। वह छोटे भाई की पत्नी की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सके और उनकी भी मौत हो गई।
गुरुवार को ग्रामीणों ने उनका अंतिम संस्कार किया। अनाथ अंजली को अपने ताऊ महेंद्र से उम्मीदें बंधी थीं। अंजली पर एक और दुख का पहाड़ टूटा है। दस साल की अंजली अब बिना सहारे के है। अब प्रशासन से ही उसको उम्मीदें हैं। अंजली भी सदमे में है। वह ज्यादा कुछ नहीं बोल रही। बार बार सिर्फ रो रही है।
गुरुवार को ग्रामीणों ने उनका अंतिम संस्कार किया। अनाथ अंजली को अपने ताऊ महेंद्र से उम्मीदें बंधी थीं। अंजली पर एक और दुख का पहाड़ टूटा है। दस साल की अंजली अब बिना सहारे के है। अब प्रशासन से ही उसको उम्मीदें हैं। अंजली भी सदमे में है। वह ज्यादा कुछ नहीं बोल रही। बार बार सिर्फ रो रही है।